भारत-चीन युद्ध के बाद से बंद गर्तांगली 55 साल बाद खुला, भ्रमण के लिए देश के 50 पर्यटकों का दल रवाना
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विश्व पर्यटन दिवस पर देश के कुछ चुनिंदा पर्यटकों को गर्तांगली के भ्रमण का सुनहरा मौका मिला है। वर्ष 1962 भारत चीन युद्ध के बाद ये पहला मौका होगा, जब पर्यटक इस अद्भुत स्थान पर जा सकेंगे।
दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान करीब 50 पर्यटकों का यह दल गर्तांगली के अलावा नेलांग वैली का भी भ्रमण करेगा। टूर का सबसे खास हिस्सा पहाड़ पर बना लकड़ी का पुल होगा, जिसे कभी व्यापार मार्ग के तौर पर प्रयोग किया जाता था।
बुधवार को डीएम डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव व अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य डा. स्वराज विद्वान ने संयुक्त रूप से पर्यटक दल को नेलांग घाटी के लिए रवाना किया। दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से आए पर्यटकों का यह दल दो दिन तक नेलांग घाटी में रहेगा, जिसके पहले दिन वो गर्तांगली व दूसरे दिन नेलांग का भ्रमण करेंगे।
डीएम ने कहा कि टूर के दौरान पर्यटक नेलांग घाटी के नैसर्गिक सौंदर्य का लुत्फ उठाने के साथ ही, अनोखे गर्तांगली मार्ग को भी देखेंगे। पेशवार के पठानों की ओर से बनाया गया यह लकड़ी का पुल, किसी दौर में भारत तिब्बत व्यापार का मुख्य मार्ग हुआ करता था।
युद्ध के बाद इसे बंद कर दिया गया था। जिला प्रशासन की ओर से वाइल्ड लाइफ बोर्ड से विशेष अनुमति लेकर एक दिन के लिए यह मार्ग खोला गया है, जिसका उद्देश्य नेलांग घाटी में एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देना है।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मार्ग का मरम्मतीकरण का कार्य भी किया गया है। भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट आने व राज्य वाइड लाइफ बोर्ड की स्वीकृति के बाद यह मार्ग आम जन के लिए भी खोल दिया जाएगा। इस दौरान पुलिस अधीक्षक सुखविंदर सिंह, जिला पर्यटन अधिकारी भगवती प्रसाद टम्टा आदि मौजूद थे।