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उच्च हिमालयी गांवों में फंसे लोग करते रहे इंतजार, लेकिन 48 घंटे बाद भी नहीं मिला राशन

Sat, 13 Oct 2018 08:41 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़) Updated Sat, 13 Oct 2018 08:41 PM IST
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after 48 hours administration cannot provide ration to people of dharchula
ration

24 घंटे तो दूर शासन-प्रशासन उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में फंसे लोगों को 48 घंटे बाद भी राशन मुहैया नहीं करा पाया। राशन पहुंचाने के लिए प्रशासन के अधिकारी धारचूला हेलीपैड पर सुबह से इंतजार करते रहे, लेकिन दिन भर इंतजार के बाद भी हेलीकॉप्टर नहीं आया। अब रविवार सुबह दिल्ली से हेलीकॉप्टर के पहुंचने की उम्मीद है।

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उच्च हिमालयी क्षेत्र के गुंजी, बूंदी और गर्ब्यांग सहित अन्य गांवों में माइग्रेशन पर गए लोग रास्ता बंद होने से लौट नहीं पा रहे हैं। इन गांवों में अनाज की किल्लत पैदा हो गई है। अमर उजाला ने सीमांत के गांवों में राशन की कमी की इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र सिंह बुदियाल ने उक्त क्षेत्रों में राशन संकट होने से संबंधित याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा की पीठ ने 24 घंटे के भीतर राशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शासन-प्रशासन ने उच्च हिमालयी गांवों में राशन भेजने के प्रयास शुरू किए।
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शनिवार सुबह धारचूला हेलीपैड पर दाल, चावल, आटा, तेल और चीनी सहित अन्य जरूरत का सामान पहुंचाया गया। एसडीएम आरके पांडेय के निर्देश पर सहायक पूर्ति निरीक्षक पीएस बोनाल एवं किशन सिंह, पटवारी हुकुम सिंह सदर रसद सामग्री के साथ दिन भर हेलीपैड पर इंतजार करते रहे, लेकिन हेलीकॉप्टर नहीं आया। प्रशासन के अनुसार अब रविवार सुबह हेलीकॉप्टर के पहुंचने के बाद राशन भेजा जाएगा। इधर, याचिकाकर्ता महेंद्र बुदियाल का कहना है न्यायालय ने 24 घंटे के भीतर राशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, जबकि शासन-प्रशासन 48 घंटे बाद भी प्रभावितों तक राशन नहीं पहुंचा सका है।
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निराश होकर लौटे 70 से अधिक ग्रामीण
धारचूला। हेलीकॉप्टर आने की जानकारी मिलने के बाद उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में फंसे लोग शनिवार सुबह हेलीपैड पर जमा हो गए थे। बताया जा रहा है कि गुंजी, गर्ब्याग और बूंदी के हेलीपैड पर लगभग 70 लोग इंतजार में खड़े थे। हेलीकॉप्टर नहीं आने की जानकारी मिलने के बाद सभी लोग निराश होकर घरों को लौट गए।

सीमांत धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों के लिए हेलीपैड पर राशन सहित जरूरत की सभी वस्तुएं रख दी गईं थीं। हेलीकॉप्टर नहीं आने से शनिवार को खाद्यान्न नहीं भेजा जा सका। रविवार सुबह आठ बजे हेलीकॉप्टर के पहुंचने की उम्मीद है। हेलीकॉप्टर के पहुंचते ही खाद्यान्न सहित अन्य जरूरी वस्तुएं गांवों में पहुंचा दी जाएंगी।
-वंदना, प्रभारी जिलाधिकारी पिथौरागढ़

एक दिन आदेश तो दूसरा दिन हेलीकॉप्टर के इंतजार में बीता 

धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्र के लोगों पर तंत्र की मार भारी पड़ रही है। इन इलाकों में लोगों को अनाज उपलब्ध कराने के लिए हाइकोर्ट के दखल के बाद भी प्रशासन पहले तो शासन के आदेश का इंतजार करता रहा और फिर हेलीकॉप्टर के इंतजार में दूसरा दिन भी बीत गया। उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित गांवों में अब भी एक हजार से अधिक लोग फंसे हैं। इनमें बुजुर्ग भी शामिल हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी से लगातार गिर रहे तापमान, खाद्यान्न की कमी और लौटने के लिए कोई साधन नहीं होने के कारण लोग परेशान हैं। 

धारचूला से माइग्रेशन के लिए हर साल बर्फ पिघलने के बाद लोग अप्रैल में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित गांवों में जाते हैं। वहां पर लोग जड़ी-बूटी और सब्जियों की खेती करते हैं। अक्तूबर में बर्फबारी शुरू होते ही लौटने लगते हैं। इस साल लीपूलेख के लिए बन रही सड़क के कारण व्यास घाटी को जाने वाला मार्ग पूरी तरह से ध्वस्त पड़ा है। इससे माइग्रेशन में गए ग्रामीण लौट नहीं पा रहे हैं। वहां पर खाद्यान्न की कमी हो गई है। बुजुर्गों की दवाइयां समाप्त हो गई हैं।

लगातार बढ़ रही ठंड से लोगों को काफी तकलीफें उठानी पड़ रही हैं। बताया जा रहा है कि बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, कुटी, रांगकांग और गुंजी गांवों में अब भी आठ सौ से अधिक ग्रामीण हैं। यह ग्रामीण एक माह से हेलीकॉप्टर सेवा संचालित करने की मांग उठा रहे हैं। कई बार शासन-प्रशासन को स्थिति से अवगत कराने के बावजूद ग्रामीणों को वापस लाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए। रास्ते और पुल ध्वस्त होने से ग्रामीणों का पैदल वापस आ पाना मुश्किल है।

वहीं, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हरकत में आई सरकार ने प्रशासन को आदेश तो दे दिए, लेकिन स्थानीय स्तर पर हेलीकॉप्टर की कोई व्यवस्था नहीं होने से 24 घंटे के भीतर राशन नहीं भेजा जा सका। इससे प्रशासन भी पूरी तरह से लाचार नजर आया। वह पहले तो शासन के आदेश का इंतजार कर रहा। इसके हेलीकॉप्टर के इंतजार में पूरा दिन बर्बाद कर दिया।
 

सेना की ट्रायल एक्सरसाइज के कारण नहीं मिली अनुमति 

धारचूला के एसडीएम राजकुमार पांडेय ने बताया कि शनिवार को सेना के हेलीकॉप्टरों की पिथौरागढ़ से बरेली तक ट्रायल एक्सरसाइज होने के कारण एटीसी से हेलीकॉप्टर को अनुमति नहीं मिली। इस कारण हेलीकॉप्टर धारचूला नहीं आ पाया। रविवार सुबह हेलीकॉप्टर आने की जानकारी दी गई है।

इतनी सामग्री भेजी जानी है व्यास घाटी के गांवों में
सहायक खाद्य निरीक्षक पुष्कर बोनाल ने बताया कि व्यास घाटी के लिए 80 क्विंटल गेहूं, 40 क्विंटल चावल, पांच क्विंटल चीनी, दो क्विंटल दाल, 200 पैकेट मसाले, 200 पैकेट दूध, 2 क्विंटल नमक, 400 लीटर केरोसिन, 200 पैकेट चायपत्ती और माचिस आदि रसद सामग्री तैयार कर ली गई है।

लोगों से लिया जाएगा 3100 रुपये किराया
एसडीएम आरके पांडेय ने बताया कि हेलीकॉप्टर केवल एक दिन के लिए राशन पहुंचाने आ रहा है। यदि उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों से कोई व्यक्ति धारचूला आना चाहेगा तो उससे 3100 रुपये किराया लिया जाएगा। यदि शासन की ओर से आदेश मिलेगा तो बाद में किराया वापस भी किया जा सकता है।
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