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Dehradun News: 150 साल बाद दोहा में होगा चालदा देवता का शाही स्नान
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खत शैली के ग्राम दोहा स्थित चालदा देवता मंदिर में 150 साल बाद देवता का शाही स्नान होगा। सात सितंबर को गणेश चतुर्थी पर संपन्न होने वाले इस कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शाही स्नान में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
दोहा गांव में जागड़ा पर्व धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देवता के शाही स्नान में श्रद्धालुओं की भीड़ की संभावना को देखते हुए मंदिर समिति ने व्यापक स्तर पर प्रबंध किए हैं। देवता के पुजारी विद्यादत्त जोशी, भीमदत्त जोशी, बारू और पप्पू जोशी ने बताया कि श्रद्धालु छह सितंबर को देव प्रांगण में रात (रात्रि जागरण) लगाएंगे। सात सितंबर को शुभ लग्नानुसार चालदा देवता के सभी चिह्नों को मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकालकर शंख-नाद की गूंज और ढोल-दमाऊ आदि वाद्ययंत्रों के साथ पवित्र जल स्रोत (देव पाणी ) ले जाएंगे। वहां शाही स्नान कराया जाएगा। इसके बाद देवचिह्न को पुनः मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कराया जाएगा।
सदर स्याणा राजेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि जौनसार बावर का दूसरा सिद्धपीठ मंदिर माना जाने वाले थैना मंदिर के चालदा देवता जौनसार क्षेत्र के निर्धारित गांवों में प्रवास यात्रा पर रहते हैं। इसी क्रम में देवता पिछले साल 16 जून को खत बनगांव के घणता स्थित मंदिर में दो साल का प्रवास पूरा करके खत शैली के दोहा में नवनिर्मित मंदिर में विराजमान हुए थे।
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मंदिर समिति के सदस्य राजेंद्र जोशी, महावीर तोमर, रमेश चौहान, गंभीर चौहान आदि ने बताया कि इससे पहले चालदा देवता 150 साल पहले दोहा गांव की प्रवास यात्रा पर आए थे। 150 साल बाद चालदा देवता के शाही स्नान को लेकर खत शैली के सभी 25 गांवों के ग्रामीण बेहद उत्साहित हैं।
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दोहा गांव में जागड़ा पर्व धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देवता के शाही स्नान में श्रद्धालुओं की भीड़ की संभावना को देखते हुए मंदिर समिति ने व्यापक स्तर पर प्रबंध किए हैं। देवता के पुजारी विद्यादत्त जोशी, भीमदत्त जोशी, बारू और पप्पू जोशी ने बताया कि श्रद्धालु छह सितंबर को देव प्रांगण में रात (रात्रि जागरण) लगाएंगे। सात सितंबर को शुभ लग्नानुसार चालदा देवता के सभी चिह्नों को मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकालकर शंख-नाद की गूंज और ढोल-दमाऊ आदि वाद्ययंत्रों के साथ पवित्र जल स्रोत (देव पाणी ) ले जाएंगे। वहां शाही स्नान कराया जाएगा। इसके बाद देवचिह्न को पुनः मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कराया जाएगा।
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सदर स्याणा राजेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि जौनसार बावर का दूसरा सिद्धपीठ मंदिर माना जाने वाले थैना मंदिर के चालदा देवता जौनसार क्षेत्र के निर्धारित गांवों में प्रवास यात्रा पर रहते हैं। इसी क्रम में देवता पिछले साल 16 जून को खत बनगांव के घणता स्थित मंदिर में दो साल का प्रवास पूरा करके खत शैली के दोहा में नवनिर्मित मंदिर में विराजमान हुए थे।
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मंदिर समिति के सदस्य राजेंद्र जोशी, महावीर तोमर, रमेश चौहान, गंभीर चौहान आदि ने बताया कि इससे पहले चालदा देवता 150 साल पहले दोहा गांव की प्रवास यात्रा पर आए थे। 150 साल बाद चालदा देवता के शाही स्नान को लेकर खत शैली के सभी 25 गांवों के ग्रामीण बेहद उत्साहित हैं।