नहीं बचेंगे तेल बिल घोटाले के दोषी, कार्रवाई का रास्ता हुआ साफ
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स्वास्थ्य विभाग में हुए करोड़ों के फर्जी तेल बिल घोटाले के दोषियों पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फाइल पर अनुमोदन दे दिया है। वर्ष 2009 से 2012 के बीच हुए इस घोटाले की विभागीय जांच में कई अधिकारियों को दोषी पाया गया था। इनमें डॉ. आरके पंत स्वास्थ्य महानिदेशक और डॉ. दीपा शर्मा सीएमओ पद से रिटायर्ड हो चुके हैं। जबकि डॉ. गुरपाल सिंह और डॉ. राजीव हटवाल का निधन हो चुका है।
मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय की संलिप्तता भी सामने आई थी। लिहाजा उच्च स्तर पर विभागीय अधिकारियों को बचाने और मामले को दबाने के हर संभव प्रयास भी हुए। यहां तक कि मामले को भटकाने के लिए ट्रैवल एजेंसी वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया, जबकि असली दोषी अधिकारी ठाठ से नौकरी करते रहे।
आरोपियों के खिलाफ दाखिल होंगे आरोप पत्र
पिछले हफ्ते शासन ने मामले की फाइल स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को भेजी थी। जहां से फाइल मुख्यमंत्री के पास पहुंची। उनके अनुमोदन के बाद अब सीसीए रूल के तहत जांच गठित होगी और आरोप पत्र दाखिल किए जाएंगे।
मामले के आरोपी डॉ. आरएस असवाल एनएचएम निदेशक, डॉ. एसपी अग्रवाल निदेशक स्वास्थ्य, डॉ. मीनू रावत जेडी महानिदेशालय, डॉ. सुरेंद्र सकलानी पीएमएस उत्तरकाशी के पद पर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दूसरे विभागों से संबंधित आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।