गड़बड़ी के आरोपियों पर होनी थी कार्रवाई, कर दिया प्रमोशन
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पौड़ी में कृषि विभाग में 38.75 लाख की वित्तीय अनियमितता के जिन आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी थी, विभाग ने उनका प्रमोशन कर दिया। तीन अधिकारियों में से दो प्रभारी कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारियों का नियमित श्रेणी दो में प्रमोशन किया गया है। यह स्थिति तब है जबकि इस मामले में राज्य सूचना आयोग भी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे चुका है।
पौड़ी जिले के पाबौ में एक कर्मचारी की मौत और वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर विभाग ने जून 2016 में प्रकरण की जांच की तो पाया कि लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। अधिकारियों ने मिलीभगत कर चेक के जरिये बैंक से लाखों रुपये की धनराशि निकाली, लेकिन जांच के बावजूद विभाग पूरे प्रकरण को दबाए रहा।
दून निवासी एक व्यक्ति ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत विभाग से सूचना मांगी तो उसे भी घुमाया गया। राज्य सूचना आयोग में अपील पर विभाग ने बताया कि प्रकरण की जांच चल रही है। दस अक्तूबर 2016 को आयोग ने अपने आदेश में कहा कि गबन की कार्रवाई सोच समझकर की गई है। बैंक और संबंधित अधिकारियों से हस्ताक्षर की पुष्टि की कार्रवाई निरर्थक है। कैशबुक में प्रविष्टि नहीं है उसके संबंध में कोई पत्रावली भी नहीं है।
जांच रिपोर्ट दबाकर आरोपियों को दे दिया प्रमोशन
प्रकरण की तत्काल प्राथमिकी दर्ज करायी जानी चाहिए, लेकिन प्रकरण में प्राथमिक के बजाए आरोपियों को प्रमोशन दे दिया गया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट को दबाकर आरोपियों को आरोप पत्र दिए जाने से पहले प्रमोशन दिया गया।
तीन अधिकारियों को आरोप पत्र
विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक प्रभारी कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी केके कोटियाल, तत्कालीन प्रभारी कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी पाबौ आरके बाटला को 15 अक्तूबर 2016 एवं तत्कालीन कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी सतीश चंद्र अकेला को 24 अक्तूबर 2016 को आरोप पत्र दिया गया। जांच कार्रवाई लंबित होने के बावजूद इनमें दो अधिकारियों केके कोटियाल व आरके बाटला को क्लास दो के पद पर प्रमोशन दिया गया।
यह प्रकरण मेरी जानकारी में नहीं है। इस मामले में जो कोई दोषी होगा उसके खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-श्रीधर बाबू अद्दांकी, अपर सचिव कृषि