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पहाड़ पर जगी ट्रेन की आस, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल को मिली स्वीकृति

Tue, 18 Oct 2016 01:06 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 18 Oct 2016 01:06 PM IST
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acceptance of rishikesh and karanprayag train
train

एक शताब्दी बीत गई पर पहाड़ पर रेलगाड़ी नहीं चढ़ी। कभी दृढ़ इच्छा शक्ति की कमी तो कभी केंद्रीय वन मंत्रालय की हीलाहवाली। पर अब ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के प्रथम फेज को केंद्रीय मंत्रालय ने सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है।

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इस परियोजना के तहत तीन सौ हेक्टेयर वन भूमि परियोजना को हस्तांतरित की जानी है। इस कदम से ट्रेन के पहाड़ पर चढ़ने की उम्मीदों को पंख लग गए हैं। माना तो यह जा रहा है कि दिसंबर में परियोजना पर कार्य शुरू हो जाएगा।
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को दो फेज में बांटा गया है। मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय के केंद्रीय अपर प्रमुख वन संरक्षक अजय कुमार ने बताया कि पहले फेज के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। इसके बाद विधिवत स्वीकृति दी जाएगी। दूसरे फेज के लिए प्रक्रिया चल रही है।
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यह परियोजना पूरी होने पर ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की यात्रा अधिक सुरक्षित हो जाएगी। साथ ही यात्रा का समय भी ढाई से तीन घंटे कम हो जाएगा।

सवा सौ किमी लंबी यह रेल परियोजना पांच जिलों देहरादून, टिहरी, चमोली और रुद्रप्रयाग से होकर गुजरेगी। इस पर 12 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं। पहला रेलवे स्टेशन दून के वन चौकी क्षेत्र में प्रस्तावित है और आखिरी स्टेशन कर्णप्रयाग होगा।

सामरिक दृष्टि से भी जरूरी 

acceptance of rishikesh and karanprayag train

1962 के भारत-चीन युद्ध की सबसे बड़ी खामी यही रही कि भारतीय सैनिकों को बर्फीले पहाड़ों पर चढ़ा दिया गया। वे इसके अभ्यस्त नहीं थे और युद्ध से पहले ही बेदम हो गए। सैनिकों को आने-जाने के ठीक साधन और परिवहन व्यवस्था बेहतर होती तो शायद युद्ध का परिणाम कुछ और ही होता।

पर समस्या यह है कि उस हार के बाद भी हमने सबक नहीं लिया और आज भी स्थिति जस की तस है। आतंकवाद पर चौतरफा घिरा होने के बावजूद पाकिस्तान के साथ चीन का खड़ा होना भारत के लिए बड़ा खतरा है। ऐसे में जरूरी है कि चीन सीमा तक ट्रेन जितनी जल्दी पहुंच सके उतना ही अच्छा है।

देहरादून से हावड़ा तक इलेक्ट्रिक इंजन से दौड़ेंगी ट्रेन
दिवाली से पहले देहरादून से हावड़ा के बीच इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों संचालन शुरू हो जाएगा। देहरादून हरिद्वार के बीच चल रहा रेलवे लाइन का इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक इंजन के साथ रविवार को सफल ट्रायल भी कर लिया गया। 19 अक्तूबर को सीआरएस के निरीक्षण के बाद ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। चार साल में रेलवे ने अलग अलग सेक्शन में रेलवे लाइन इलेक्ट्रिफिकेशन का काम किया है।

पहले सहारनपुर से मुरादाबाद, मुरादाबाद लखनऊ के बाद हरिद्वार लक्सर का कार्य पूरा करने के बाद देहरादून हरिद्वार लाइन पर इलेक्ट्रिफिकेशन शुरू किया गया था। अभी तक हरिद्वार से इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन किया जा रहा था। लेकिन देहरादून से चलने वाली गाड़ियों को डीजल इंजन से चलना पड़ता था।

डीआरएम प्रमोद कुमार ने बताया कि 19 अक्तूबर को सीआरएस निरीक्षण करेंगे। उनके ओके करने के साथ ही ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा। पहले सप्ताह में इलेक्ट्रिक इंजन से मालगाड़ियों को गुजारा जाएगा। दिवाली से पहले इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों को चलाने पर विचार किया जा रहा है। अब देहरादून से हावड़ा तक लाइन इलेक्ट्रिफाइड हो चुकी है।

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