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प्लास्टिक के पुन: उपयोग के जरिए पर्यावरण स्वच्छ रखने पर जोर
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Iभारतीय पेट्रोलियम संस्थान में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजनI
सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान देहरादून में जिज्ञासा 2.0 कार्यक्रम के तहत पॉलिमर के पर्यावरणीय खतरे विषय पर सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज (एसडीसी) फाउंडेशन के सहयोग से एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न सरकारी विद्यालयों के करीब 150 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को अपशिष्ट प्लास्टिक के बारे में जागरूक करना एवं उसके पुनः उपयोग व पुन:चक्रण के जरिए पर्यावरण स्वच्छ रखना रहा। निदेशक डॉ. हरेंद्र बिष्ट ने छात्रों को अपशिष्ट प्लास्टिक को गैसोलीन, डीजल, पेट्रोल में बदलने के लिए सीएसआईआर-आईआईपी की ओर से विकसित तकनीकों के बारे में जानकारी दी। डॉ. आरती ने छात्रों को उन्नत शोध कार्यों और प्रौद्योगिकियों से अवगत कराया। उन्होंने छात्रों से स्वच्छ एवं हरित पर्यावरण के लिए प्लास्टिक का विवेकपूर्ण उपयोग करने का आग्रह किया। सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज (एसडीसी) फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. अनूप नौटियाल, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. उमेश कुमार ने भी अपने विचार रखे। छात्रों ने पायलट प्लांट एवं उन्नत कच्चे तेल अनुसंधान केंद्र का दौरा किया। इस मौके पर डॉ. अंकुर बोरदोलोई, डॉ. कमल कुमार, डॉ. ज्योति पोरवाल, डॉ. रघुवीर सिंह, डॉ. दीपेंद्र त्रिपाठी, डॉ. प्रदीप त्यागी, प्रदीप पुंडीर, मुकुल शर्मा, संजय मौर्य, गोकुल और अजय पॉल आदि मौजूद रहे।
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सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान देहरादून में जिज्ञासा 2.0 कार्यक्रम के तहत पॉलिमर के पर्यावरणीय खतरे विषय पर सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज (एसडीसी) फाउंडेशन के सहयोग से एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न सरकारी विद्यालयों के करीब 150 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को अपशिष्ट प्लास्टिक के बारे में जागरूक करना एवं उसके पुनः उपयोग व पुन:चक्रण के जरिए पर्यावरण स्वच्छ रखना रहा। निदेशक डॉ. हरेंद्र बिष्ट ने छात्रों को अपशिष्ट प्लास्टिक को गैसोलीन, डीजल, पेट्रोल में बदलने के लिए सीएसआईआर-आईआईपी की ओर से विकसित तकनीकों के बारे में जानकारी दी। डॉ. आरती ने छात्रों को उन्नत शोध कार्यों और प्रौद्योगिकियों से अवगत कराया। उन्होंने छात्रों से स्वच्छ एवं हरित पर्यावरण के लिए प्लास्टिक का विवेकपूर्ण उपयोग करने का आग्रह किया। सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज (एसडीसी) फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. अनूप नौटियाल, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. उमेश कुमार ने भी अपने विचार रखे। छात्रों ने पायलट प्लांट एवं उन्नत कच्चे तेल अनुसंधान केंद्र का दौरा किया। इस मौके पर डॉ. अंकुर बोरदोलोई, डॉ. कमल कुमार, डॉ. ज्योति पोरवाल, डॉ. रघुवीर सिंह, डॉ. दीपेंद्र त्रिपाठी, डॉ. प्रदीप त्यागी, प्रदीप पुंडीर, मुकुल शर्मा, संजय मौर्य, गोकुल और अजय पॉल आदि मौजूद रहे।
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