ऐसे सामने आया नारी निकेतन में संवासिनी के गर्भपात का सच
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नारी निकेतन के अंदर की काली करतूत को छिपाने में वहां के कारिंदे झूठ पर झूठ बोलते रहे। जिला प्रशासन की टीम भी पहले नारी निकेतन के स्टाफ के कहने पर चली। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने तो उन्हीं के बयानों को आधार बनाकर क्लीन चिट दे दी। मामला तब पलटा जब एडीएम झरना कमठान को जांच सौंपी गई।
कमठान के नेतृत्व वाली जांच समिति की रिपोर्ट में दर्ज दो महिला नर्सों के बयान ने कार्रवाई की जमीन तैयार की। एसआईटी ने उसे आधार बनाकर प्रकरण को निर्णायक मोड़ पर ला दिया है।
अपर जिलाधिकारी वित्त झरना कमठान के नेतृत्व वाली टीम की रिपोर्ट में सात कर्मचारियों के बयान दर्ज हैं। इनमें से दो नर्स के बयान महत्वपूर्ण हैं।
दूसरी नर्स ने बताया, अपने आप ही हुआ था गर्भपात
दून अस्पताल की महिला नर्स ने बताया है कि 16 नवंबर की सुबह साढ़े छह बजे मुंह ढककर एक संवासिनी को ब्लीडिंग की शिकायत पर अस्पताल लाया गया था। उसे भर्ती की सलाह देते पर्ची दी गई।
बावजूद इसके यह महिलाएं बिना बताए कहीं चली गईं और लौटकर नर्हीं आइं। दूसरा बयान नारी निकेतन से जुड़ी महिला नर्स का है। इस बयान में कहा गया है कि संवासिनी का गर्भपात अपने आप हो गया था। केंद्र की कार्यवाह प्रभारी के बुलावे पर ब्लीडिंग की शिकायत पर उसे देखने के लिए आई थी।
इन बयानों को ही आधार बनाकर जांच टीम ने रिपोर्ट में कहा कि जिस तरह आधा सच और आधा झूठ सामने आ रहा है, उससे लगता है कि कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर है। जांच टीम ने मूक बधिर की वीडियो रिकार्डिंग के संबंध में मूक बधिर की सांकेतिक भाषा के एक्सपर्ट की राय का भी रिपोर्ट में जिक्र किया है।
बाईपास पुलिस चौकी पर डाला एसआईटी ने डेरा
विवादों से घिरे नारी निकेतन में इन दिनों अजीब सा माहौल है। एसआईटी के सामने संवासिनी और कर्मचारी चुप्पी साधे रहे। महिला पुलिस कर्मियों ने सख्त लहजे का इस्तेमाल किया तो उनके मुंह से आवाज तो निकली, लेकिन कोई कुछ बता नहीं पाया।
यही वजह थी कि एसआईटी कर्मचारियों को बाईपास चौकी बुलाकर पूछताछ करती रही। एसआईटी ने नारी निकेतन के करीब 14 रजिस्टर कब्जे में लिए हैं। देर रात तक एसआई से जुड़े कर्मचारी रजिस्टरों की जांच पड़ताल में जुटे रहे। कई रजिस्ट्ररों में छेड़छाड़ की बात भी उजागर हुई है।
खंगाला मोबाइल का डाटा
एसआईटी ने नारी निकेतन से जुड़े कर्मचारियों की 15 और 16 नवंबर की काल डिटेल खंगाली है। यह जानने की कोशिश की गई कि उस दिन कौन कहां था। कर्मचारियों ने आपस में कितनी देर बात की है। इस आधार पर एसओजी कार्रवाई को पुख्ता करने में जुटी है। इसके लिए दून के अलावा कई अन्य सीसीटीवी कैमरे के फुटेज भी जुटाए है।