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अंग्रेजी साहित्य का हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में हो अनुवाद
Updated Fri, 10 Aug 2018 02:20 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
अंग्रेजी साहित्य का हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवाद होना चाहिए। बृहस्पतिवार को आईएमएस यूनिसन विश्वविद्यालय में देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल के शुभारंभ पर राज्यपाल डॉ. केके पाल ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को टीवी और फिल्मों के माध्यम से प्रसारित करने की जरूरत है। इस दौरान राज्यपाल ने आध्यात्मिक संत सद्गुरु जग्गी वासुदेव से भी भेंट की।
राज्यपाल डॉ. पाल ने कहा कि हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की किताबों को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करने की आवश्यकता है। अनुवाद के माध्यम से इन किताबों को एक बडे़ पाठक वर्ग तक पहुंचाया जा सकता है। गुरु रविंद्रनाथ टैगोर की गीतांजलि की प्रसिद्धि बढ़ाने में उनके अंग्रेजी अनुवाद का प्रमुख योगदान था। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कृतियों का भी अंग्रेजी अनुवाद उन्हें बहुत बडे़ पाठक वर्ग तक पहुंचा सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि लेखकों और प्रकाशकों को बच्चों एवं युवा वर्ग को लुभाने वाली पुस्तकाें पर ध्यान केंद्रित करना होगा। डॉ. पाल ने कहा कि उत्तराखंड की धरती सदैव लेखकों एवं साहित्यकारों की पसंद रही है। उत्तराखंड सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली रहा है। उन्होंने गौरापंत, शिवानी, शेखर जोशी, शैलेश मटियानी, रस्किन बांड, एलएन शैली जैसे लेखकों का भी उल्लेख किया। शुभारंभ सत्र में ईशा फाउंडेशन के सद्गुरु जग्गी वासुदेव और लेखक रस्किन बांड भी मौजूद रहे। यह फेस्टिवल 11 अगस्त तक चलेगा। यूनिसन वर्ल्ड स्कूल के निदेशक अमित अग्रवाल ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों में साहित्य के प्रति आकर्षण पैदा करने के लिये आवश्यक होते हैं।
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सदगुरु और रस्किन बांड के बीच व्याख्यान सत्र
पहले दिन हुए सत्र में सदगुरु ने कहा कि वो जब आठ साल के थे, तब से रिस्कन बांड को पढ़ रहे हैं। सदगुरु ने कहा, वो पहाड़ों के प्रशंसक नहीं है बल्कि वो उनके सेवक है। लेखक बांड ने कहा उनके पौते उनसे ज्यादा सदगुरु के बारे में जानते हैं। जब भी मैं उनसे पूछता हूं वो सदगुरु के बारे में क्या जानते हैं तो वो कहते हैं कि सदगुरु मोटर साइकिल चलाते हैं। इस पर सदगुरु ने कहा कि वो हर साल 55 से 60 हजार किलोमीटर मोटरसाइकिल चलाते हैं। सदगुरु की एक कविता रस्किन बांड ने भी सुनाई। पहले दिन यूनियन वर्ल्ड स्कूल ने रस्किन बांड को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और एक लाख की राशि भेंट की।
आज जुटेंगे यह दिग्गज साहित्यकार और कलाकार
शुक्रवार को लिटरेचरल फेस्ट में दिग्गज साहित्यकार और कलाकार जुटेंगे। इसमें अनीषा मोटवानी का व्याख्यान सुबह दस से 11 बजे तक होगा। उसके बाद 11 से 12 बजे तक साहित्यकार लोकेश ओहरी, जगमोहन बंगानी, संकल्प खेतवाल, जसकिरन चोपड़ा होंगे। उसके बाद 12 से एक बजे के सत्र में मोना वर्मा, रूपा गुलाब और दीपक रमोला व्याख्यान देंगे। ढाई से साढ़े तीन बजे के सत्र में लिलेट दुबे, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, दिव्या दत्ता, रुक्शमनी कुमारी और मिले एश्वर्य होंगे। साढ़े तीन से चार बजे के सत्र में दिव्या दत्ता की किताब का विमोचन होगा। जबकि चार से पांच बजे तक फि ल्म निदेशक मधुर भंडारकर के साथ राखी बख्शी होंगी। पांच बजे से छह बजे के सत्र में लेखक सुदीप चक्रवर्ती जीत बैनर्जी संग होंगे।
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अंग्रेजी साहित्य का हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवाद होना चाहिए। बृहस्पतिवार को आईएमएस यूनिसन विश्वविद्यालय में देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल के शुभारंभ पर राज्यपाल डॉ. केके पाल ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को टीवी और फिल्मों के माध्यम से प्रसारित करने की जरूरत है। इस दौरान राज्यपाल ने आध्यात्मिक संत सद्गुरु जग्गी वासुदेव से भी भेंट की।
राज्यपाल डॉ. पाल ने कहा कि हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की किताबों को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करने की आवश्यकता है। अनुवाद के माध्यम से इन किताबों को एक बडे़ पाठक वर्ग तक पहुंचाया जा सकता है। गुरु रविंद्रनाथ टैगोर की गीतांजलि की प्रसिद्धि बढ़ाने में उनके अंग्रेजी अनुवाद का प्रमुख योगदान था। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कृतियों का भी अंग्रेजी अनुवाद उन्हें बहुत बडे़ पाठक वर्ग तक पहुंचा सकता है।
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राज्यपाल ने कहा कि लेखकों और प्रकाशकों को बच्चों एवं युवा वर्ग को लुभाने वाली पुस्तकाें पर ध्यान केंद्रित करना होगा। डॉ. पाल ने कहा कि उत्तराखंड की धरती सदैव लेखकों एवं साहित्यकारों की पसंद रही है। उत्तराखंड सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली रहा है। उन्होंने गौरापंत, शिवानी, शेखर जोशी, शैलेश मटियानी, रस्किन बांड, एलएन शैली जैसे लेखकों का भी उल्लेख किया। शुभारंभ सत्र में ईशा फाउंडेशन के सद्गुरु जग्गी वासुदेव और लेखक रस्किन बांड भी मौजूद रहे। यह फेस्टिवल 11 अगस्त तक चलेगा। यूनिसन वर्ल्ड स्कूल के निदेशक अमित अग्रवाल ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों में साहित्य के प्रति आकर्षण पैदा करने के लिये आवश्यक होते हैं।
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सदगुरु और रस्किन बांड के बीच व्याख्यान सत्र
पहले दिन हुए सत्र में सदगुरु ने कहा कि वो जब आठ साल के थे, तब से रिस्कन बांड को पढ़ रहे हैं। सदगुरु ने कहा, वो पहाड़ों के प्रशंसक नहीं है बल्कि वो उनके सेवक है। लेखक बांड ने कहा उनके पौते उनसे ज्यादा सदगुरु के बारे में जानते हैं। जब भी मैं उनसे पूछता हूं वो सदगुरु के बारे में क्या जानते हैं तो वो कहते हैं कि सदगुरु मोटर साइकिल चलाते हैं। इस पर सदगुरु ने कहा कि वो हर साल 55 से 60 हजार किलोमीटर मोटरसाइकिल चलाते हैं। सदगुरु की एक कविता रस्किन बांड ने भी सुनाई। पहले दिन यूनियन वर्ल्ड स्कूल ने रस्किन बांड को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और एक लाख की राशि भेंट की।
आज जुटेंगे यह दिग्गज साहित्यकार और कलाकार
शुक्रवार को लिटरेचरल फेस्ट में दिग्गज साहित्यकार और कलाकार जुटेंगे। इसमें अनीषा मोटवानी का व्याख्यान सुबह दस से 11 बजे तक होगा। उसके बाद 11 से 12 बजे तक साहित्यकार लोकेश ओहरी, जगमोहन बंगानी, संकल्प खेतवाल, जसकिरन चोपड़ा होंगे। उसके बाद 12 से एक बजे के सत्र में मोना वर्मा, रूपा गुलाब और दीपक रमोला व्याख्यान देंगे। ढाई से साढ़े तीन बजे के सत्र में लिलेट दुबे, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, दिव्या दत्ता, रुक्शमनी कुमारी और मिले एश्वर्य होंगे। साढ़े तीन से चार बजे के सत्र में दिव्या दत्ता की किताब का विमोचन होगा। जबकि चार से पांच बजे तक फि ल्म निदेशक मधुर भंडारकर के साथ राखी बख्शी होंगी। पांच बजे से छह बजे के सत्र में लेखक सुदीप चक्रवर्ती जीत बैनर्जी संग होंगे।