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रिस्पना के पुनर्जीवन को जल्द धरातल पर शुरू होगा काम
Updated Thu, 15 Feb 2018 02:21 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
मैड संगठन से जुड़े छात्रों ने कहा कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए जल्द धरातल पर काम शुरू होगा। इस संबंध में बुधवार को उनकी मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के साथ बैठक हुई। निर्णय लिया गया कि नदी के पुनर्जीवन के लिए पूरा प्लान तैयार कर इसे मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। मैड संस्था के करन ने कहा कि नदी के पुनर्जीवन के लिए छात्र लंबे समय से प्रयासरत हैं। इसके लिए शिखर फॉल से दूधली गांव तक 35 से 40 किमी पैदल ट्रेक कर नदी के पुनर्जीवन को लेकर अपने सुझाव जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन को सौंप चुके हैं। मैड के संस्थापक अभिजय नेगी ने कहा कि बुधवार को हुई बैठक में नदी के पुनर्जीवन के लिए मैड के साथ ही विभिन्न विभागों ने सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि संगठन ने पूर्व में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री हरीश रावत से अनुरोध किया था कि रिस्पना के पुनर्जीवन के लिए शोध कराया जाए। इस पर राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की ने जनवरी-2014 में अपनी प्रारंभिक शोध रिपोर्ट तैयार की थी। जिसमें रिस्पना नदी को पहली बार किसी वैज्ञानिक दस्तावेज में बारहमासी नदी का दर्जा दिया गया था।
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मैड संगठन से जुड़े छात्रों ने कहा कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए जल्द धरातल पर काम शुरू होगा। इस संबंध में बुधवार को उनकी मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के साथ बैठक हुई। निर्णय लिया गया कि नदी के पुनर्जीवन के लिए पूरा प्लान तैयार कर इसे मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। मैड संस्था के करन ने कहा कि नदी के पुनर्जीवन के लिए छात्र लंबे समय से प्रयासरत हैं। इसके लिए शिखर फॉल से दूधली गांव तक 35 से 40 किमी पैदल ट्रेक कर नदी के पुनर्जीवन को लेकर अपने सुझाव जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन को सौंप चुके हैं। मैड के संस्थापक अभिजय नेगी ने कहा कि बुधवार को हुई बैठक में नदी के पुनर्जीवन के लिए मैड के साथ ही विभिन्न विभागों ने सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि संगठन ने पूर्व में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री हरीश रावत से अनुरोध किया था कि रिस्पना के पुनर्जीवन के लिए शोध कराया जाए। इस पर राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की ने जनवरी-2014 में अपनी प्रारंभिक शोध रिपोर्ट तैयार की थी। जिसमें रिस्पना नदी को पहली बार किसी वैज्ञानिक दस्तावेज में बारहमासी नदी का दर्जा दिया गया था।