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टीकाकरण के बावजूद खुरपका-मुंहपका की चपेट में आ रहे पालतू पशु
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ब्यूरो/अमर उजाला, लक्सर
टीकाकरण के बावजूद मुंहपका और खुरपका जैसी बीमारियों से हुई पालतू पशुओं की मौत से पशुपालन विभाग के कामकाज पर सवाल खड़ा हो गया है। विभाग का मानना है कि रोग के वायरस ने वैक्सीन का प्रभाव कम कर दिया है। फिलहाल, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, मुक्तेश्वर की एक टीम जिलेभर से पशुओं के सैंपल लेकर जांच कर रही है।
हरिद्वार जिले के अधिकांश किसान खेती-किसानी के साथ दुधारू पशु भी पालते हैं। मुंहपका और खुरपका जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए पशुपालन विभाग हर साल बरसात से पहले पालतू पशुओं का टीकाकरण करता है। इस बार भी विभाग ने पालतू पशुओं को समय पर टीके लगवाए थे। इसके बावजूद पिछले करीब डेढ़ महीने से लक्सर सहित जिलेभर के कई गांवों में पालतू पशु को इन बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो लक्सर के खेड़ी, हुसैनपुर, दाबकी के अलावा जिले के नारसन खुर्द, मानकपुर, आमखेड़ी, बहादरपुर जट सहित कई गांवों के 20 से अधिक पशु इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। टीका लगवाने के बावजूद पशुओं में इस बीमारी के प्रकोप ने पशुपालन विभाग के वैक्सीनेशन पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। विभाग का मानना है कि एफएमडी फैलाने वाले वायरस की ओर से वैक्सीन की प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की वजह से ऐसा हो रहा है। उधर, उत्तराखंड किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष महकार सिंह ने इस संबंध में पशुपालन राज्यमंत्री रेखा आर्य को पत्र लिखा है। उन्होंने इस बीमारी की रोकथाम नहीं होने पर हरिद्वार के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के कार्यालय पर धरना देने की चेतावनी दी है।
वैक्सीनेशन के बावजूद पशुओं को मुंहपका और खुरपका होना चिंताजनक है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) मुक्तेश्वर की टीम से इसकी जांच कराई जा रही है। जिलेभर में इससे ग्रस्त पशुओं का इलाज किया जा रहा है।
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- डॉ. बीसी कर्नाटक, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, हरिद्वार
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टीकाकरण के बावजूद मुंहपका और खुरपका जैसी बीमारियों से हुई पालतू पशुओं की मौत से पशुपालन विभाग के कामकाज पर सवाल खड़ा हो गया है। विभाग का मानना है कि रोग के वायरस ने वैक्सीन का प्रभाव कम कर दिया है। फिलहाल, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, मुक्तेश्वर की एक टीम जिलेभर से पशुओं के सैंपल लेकर जांच कर रही है।
हरिद्वार जिले के अधिकांश किसान खेती-किसानी के साथ दुधारू पशु भी पालते हैं। मुंहपका और खुरपका जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए पशुपालन विभाग हर साल बरसात से पहले पालतू पशुओं का टीकाकरण करता है। इस बार भी विभाग ने पालतू पशुओं को समय पर टीके लगवाए थे। इसके बावजूद पिछले करीब डेढ़ महीने से लक्सर सहित जिलेभर के कई गांवों में पालतू पशु को इन बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो लक्सर के खेड़ी, हुसैनपुर, दाबकी के अलावा जिले के नारसन खुर्द, मानकपुर, आमखेड़ी, बहादरपुर जट सहित कई गांवों के 20 से अधिक पशु इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। टीका लगवाने के बावजूद पशुओं में इस बीमारी के प्रकोप ने पशुपालन विभाग के वैक्सीनेशन पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। विभाग का मानना है कि एफएमडी फैलाने वाले वायरस की ओर से वैक्सीन की प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की वजह से ऐसा हो रहा है। उधर, उत्तराखंड किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष महकार सिंह ने इस संबंध में पशुपालन राज्यमंत्री रेखा आर्य को पत्र लिखा है। उन्होंने इस बीमारी की रोकथाम नहीं होने पर हरिद्वार के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के कार्यालय पर धरना देने की चेतावनी दी है।
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वैक्सीनेशन के बावजूद पशुओं को मुंहपका और खुरपका होना चिंताजनक है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) मुक्तेश्वर की टीम से इसकी जांच कराई जा रही है। जिलेभर में इससे ग्रस्त पशुओं का इलाज किया जा रहा है।
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- डॉ. बीसी कर्नाटक, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, हरिद्वार