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दस दिन में होगी अतिक्रमण की सेटेलाइट मैपिंग
Updated Fri, 03 Aug 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
राजधानी में अब सेटेलाइट मैपिंग के जरिये अतिक्रमण को चिह्नित किया जाएगा। क्षेत्रों में हुए अतिक्रमण संबंधी मैपिंग के लिए हाई रेजुलेशन डाटा की आवश्यकता है, जो अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) उपलब्ध कराएगा।
बृहस्पतिवार को यूसैक के सभागार में अधिकारियों ने बैठक कर सेटेलाइट मैपिंग पर चर्चा की। यूसैक के निदेशक प्रो. एमपीएस बिष्ट ने वर्ष 2003 के बाद हुए निर्माण कार्यों की स्थिति पर आधारित सेटेलाइट मैपिंग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण संबंधी मैपिंग के लिए हाई रेजुलेशन डाटा की जरूरत होगी। हालांकि, यह बेहद खर्चीली प्रक्रिया है। इसको देखते हुए यूसैक में उपलब्ध मानचित्रों के डाटा के आधार पर ही मैपिंग का काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में रिस्पना पुल से महाराजा अग्रसेन चौक तक के क्षेत्र को शामिल किया जा सकता है। पहले चरण में इस इलाके की सेटेलाइट मैपिंग की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यूसैक दस दिनों में सेटेलाइट मैपिंग कर एमडीडीए को डाटा उपलब्ध करा देगा। इसके आधार पर एमडीडीए अतिक्रमण को आसानी से चिह्नित कर सकेगा। अधिकारियों ने काठ बंगला क्षेत्र में सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण को भी सेटेलाइट मैपिंग से चिह्नित करने का निर्णय लिया। इसके लिए एडीएम राजस्व क्षेत्र की जानकारी यूसैक को उपलब्ध कराएंगे। बैठक में अपर जिला अधिकारी अरविंद पांडेय, एमडीडीए सचिव पीसी दुमका, उपसचिव शैलेंद्र नेगी, ईई हरीश चंद्र सिंह राणा, दिनेश चंद्र, आरएस मेहता, सुधाकर भट्ट आदि मौजूद रहे।
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राजधानी में अब सेटेलाइट मैपिंग के जरिये अतिक्रमण को चिह्नित किया जाएगा। क्षेत्रों में हुए अतिक्रमण संबंधी मैपिंग के लिए हाई रेजुलेशन डाटा की आवश्यकता है, जो अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) उपलब्ध कराएगा।
बृहस्पतिवार को यूसैक के सभागार में अधिकारियों ने बैठक कर सेटेलाइट मैपिंग पर चर्चा की। यूसैक के निदेशक प्रो. एमपीएस बिष्ट ने वर्ष 2003 के बाद हुए निर्माण कार्यों की स्थिति पर आधारित सेटेलाइट मैपिंग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण संबंधी मैपिंग के लिए हाई रेजुलेशन डाटा की जरूरत होगी। हालांकि, यह बेहद खर्चीली प्रक्रिया है। इसको देखते हुए यूसैक में उपलब्ध मानचित्रों के डाटा के आधार पर ही मैपिंग का काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में रिस्पना पुल से महाराजा अग्रसेन चौक तक के क्षेत्र को शामिल किया जा सकता है। पहले चरण में इस इलाके की सेटेलाइट मैपिंग की जाएगी।
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उन्होंने कहा कि यूसैक दस दिनों में सेटेलाइट मैपिंग कर एमडीडीए को डाटा उपलब्ध करा देगा। इसके आधार पर एमडीडीए अतिक्रमण को आसानी से चिह्नित कर सकेगा। अधिकारियों ने काठ बंगला क्षेत्र में सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण को भी सेटेलाइट मैपिंग से चिह्नित करने का निर्णय लिया। इसके लिए एडीएम राजस्व क्षेत्र की जानकारी यूसैक को उपलब्ध कराएंगे। बैठक में अपर जिला अधिकारी अरविंद पांडेय, एमडीडीए सचिव पीसी दुमका, उपसचिव शैलेंद्र नेगी, ईई हरीश चंद्र सिंह राणा, दिनेश चंद्र, आरएस मेहता, सुधाकर भट्ट आदि मौजूद रहे।
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