{"_id":"5ada536c4f1c1b6d098b5812","slug":"81524257644-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"...तो क्या राजभवन के हस्तक्षेप पर अटैच हुए मिश्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...तो क्या राजभवन के हस्तक्षेप पर अटैच हुए मिश्रा
Updated Sat, 21 Apr 2018 02:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
...तो क्या राजभवन के हस्तक्षेप पर मृत्युंजय मिश्रा को आयुर्वेद विवि कुलसचिव पद से हटाया गया ?, शुक्रवार को यह सवाल आयुर्वेद विवि और प्रशासनिक महकमें में लोगों को जुबान पर था। इस चर्चा को बल यूं मिला कि शुक्रवार को आयुर्वेद विवि के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार के राज्यपाल से वार्ता के कुछ ही घंटों के भीतर मिश्रा को अटैच करने का आदेश जारी हो गया। हालांकि राजभवन या किसी अन्य अधिकारी का इस मामले में कोई अधिकृत बयान नहीं आया।
आयुर्वेद विवि में मृत्युंजय मिश्रा का पुराना कार्यकाल राजभवन से टकराव के चलते सुर्खियों में आया था। उस वक्त नियुक्तियों पर रोक को लेकर राजभवन और आयुर्वेद विवि कुलसचिव के बीच काफी लंबा पत्राचार हुआ था। बाद में कुलसचिव मिश्रा को विवि से विदा होना पड़ा था। इस बार भी मिश्रा के चार्ज लेते ही राजभवन तक पूरा प्रकरण पहुंचा। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को आयुर्वेद विवि कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार राज्यपाल एवं विवि के कुलाधिपति डॉ. केके पाल से मिलने पहुंचे। उन्होंने राज्यपाल के समक्ष पूरा मामला रखा। जानकारी के मुताबिक इसके बाद राजभवन ने मिश्रा की तैनाती पर सख्त नाराजगी जताई। मामला सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत तक भी पहुंचा। उन्होंने भी शासन के अधिकारियों को मिश्रा को हटाने संबंधी निर्देश दिए। आखिरकार, दोपहर बाद मिश्रा को हटाकर आयुष विभाग में अटैच करने के आदेश जारी हुए। हालांकि आयुर्वेद विवि के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार का कहना है कि उनकी राज्यपाल से भेंट महज एक रूटीन प्रक्रिया के तहत हुई थी।
क्या मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर हुई थी मिश्रा की ताजपोशी
किस आलाअधिकारी ने किया खेल
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। इस ताजपोशी और विदाई पर एक और सवाल यह भी उठा कि क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अंधेरे में रखकर मिश्रा की ताजपोशी की गई। क्या किसी आलाअधिकारी ने निजी संबंधों के चलते मिश्रा को उपकृत करने के लिए सभी हदें तक पार कर दी। नतीजा, मुख्यमंत्री को अप्रिय स्थिति से गुजरना पड़ा और इस फैसले ने उनकी छवि को भी प्रभावित किया।
विज्ञापन
इसी तरह शुक्रवार को प्रशासनिक महकमे में यह सवाल चर्चा में था कि क्या मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर मृत्युंजय मिश्रा को आयुर्वेद विवि के कुलसचिव पद पर तैनाती दी गई, वरना ऐसे कौन से कारण थे कि ताजपोशी के अगले दिन ही उन्हें हटाने के आदेश दिए गए। यह भी सवाल उठा कि क्या कोई आलाधिकारी, सीएम और मृत्युंजय से अपनी करीबी संबंधों को इस तरह से भुना गया कि मुख्यमंत्री की छवि भी ध्यान नहीं रखा गया। सभी जानते हैं कि मृत्युंजय का दिल्ली से देहरादून आना गुपचुप नहीं हुआ। मृत्युंजय मिश्रा को दिल्ली में अपर स्थानिक आयुक्त के पद से हटाने की खबरें आम हुई। उन्हें मूल विभाग में भेजने को लेकर भी मीडिया में खबरें आईं। जानकार बताते हैं कि आयुर्वेद विवि में पहली तैनाती के दौरान मृत्युंजय मिश्रा विवादों में चल रहे थे तो उन दिनों बतौर भाजपा नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत भी उन लोगों में से एक थे, जो मिश्रा के कृत्यों की मुखालफत कर रहे थे। ऐसे में अब बतौर सीएम उनकी सहमति से मृत्युंजय मिश्रा की आयुर्वेद विवि के कुल सचिव पद पर फिर तैनाती लोगों के गले से नहीं उतर रही थी। मिश्रा को हटाए जाने के सवाल पर सीएम के मीडिया सलाहकार दर्शन सिंह रावत का बयान इसकी पुष्टि करता है, खेल कुछ ऐसा ही है। वे कहते हैं कि मुख्यमंत्री को मृत्युंजय मिश्रा की तैनाती की जानकारी नहीं थी, ज्योंही पता चला उन्होंने मिश्रा को हटाने के आदेश कर दिए। यानि यह सच है कि किसी आलाअधिकारी ने मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर यह खेल किया था, उससे इस बात से कोई सरोकार नहीं था कि इस फैसले का मुख्यमंत्री की छवि पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उपकुलसचिव को हटाकर खुद विदा हो गए मिश्रा
विवि में उपकुलसचिव एवं प्रभारी कुलसचिव डॉ. राजेश कुमार को किया कार्यमुक्त
दोपहर बाद खुद ही मृत्युंजय मिश्रा भी हो गए शासन में अटैच
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
उत्तराखंड आयुर्वेद विवि में कार्यभार ग्रहण करने के दूसरे ही दिन डॉ. मृत्युंजय मिश्रा ने उपकुलसचिव डॉ. राजेश कुमार अदाना को हटाने का आदेश जारी कर दिया। इसके कुछ ही देर बाद खुद मिश्रा भी विवि से विदा हो गए। हालांकि कुलपति का कहना है कि उनकी अनुमति के बिना आदेश प्रभावी नहीं होगा। इसलिए डॉ. राजेश कुमार प्रभारी कुलसचिव बने रहेेंगे।
शुक्रवार को कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय मिश्रा ने आदेश जारी किया कि डॉ. राजेश कुमार को आयुर्वेद विवि तैनाती के शासनादेश की प्रतिलिपि उनके मूल जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी पौड़ी गढ़वाल कार्यालय को नहीं दी गई। न ही डॉ. राजेश को इसकी प्रतिलिपि दी गई। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए एक तरफा डॉ. राजेश को कार्यमुक्त कर दिया था और तत्कालीन कुलसचिव ने कार्यभार ग्रहण करा दिया था। जबकि नियमानुसार शासनादेश के अनुरूप नियुक्ति पत्र कुलसचिव या कुलपति द्वारा ही निर्गत किए जाने चाहिए थे। डॉ. राजेश को वेतन अभी भी जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय से ही आहरित हो रहा है, जबकि उनके संबद्धता के आदेश भी शासन से निर्गत नहीं हुए हैं, न ही विवि ने इसकी सेवाओं की कोई मांग की थी। मिश्रा ने इस आधार पर डॉ. राजेश कुमार की विवि में नियुक्ति प्रक्रिया को दूषित मानते हुए उन्हें जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी कार्यालय पौड़ी गढ़वाल के लिए कार्यमुक्त कर दिया। यह आदेश प्रभावी होता, इससे पहले ही मृत्युंजय मिश्रा की आयुर्वेद विवि से विदाई हो गई। दिनभर यह घटनाक्रम चर्चाओं में रहा। मामले में आयुर्वेद विवि के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार का कहना है कि कुलसचिव का कोई भी आदेश उनकी अनुमति के बिना प्रभावी नहीं है। इसलिए डॉ. राजेश कुमार अदाना फिलहाल स्थायी कुलसचिव आने तक प्रभारी कुलसचिव एवं उपकुलसचिव के पद पर सेवाएं देते रहेंगे।
विज्ञापन
...तो क्या राजभवन के हस्तक्षेप पर मृत्युंजय मिश्रा को आयुर्वेद विवि कुलसचिव पद से हटाया गया ?, शुक्रवार को यह सवाल आयुर्वेद विवि और प्रशासनिक महकमें में लोगों को जुबान पर था। इस चर्चा को बल यूं मिला कि शुक्रवार को आयुर्वेद विवि के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार के राज्यपाल से वार्ता के कुछ ही घंटों के भीतर मिश्रा को अटैच करने का आदेश जारी हो गया। हालांकि राजभवन या किसी अन्य अधिकारी का इस मामले में कोई अधिकृत बयान नहीं आया।
आयुर्वेद विवि में मृत्युंजय मिश्रा का पुराना कार्यकाल राजभवन से टकराव के चलते सुर्खियों में आया था। उस वक्त नियुक्तियों पर रोक को लेकर राजभवन और आयुर्वेद विवि कुलसचिव के बीच काफी लंबा पत्राचार हुआ था। बाद में कुलसचिव मिश्रा को विवि से विदा होना पड़ा था। इस बार भी मिश्रा के चार्ज लेते ही राजभवन तक पूरा प्रकरण पहुंचा। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को आयुर्वेद विवि कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार राज्यपाल एवं विवि के कुलाधिपति डॉ. केके पाल से मिलने पहुंचे। उन्होंने राज्यपाल के समक्ष पूरा मामला रखा। जानकारी के मुताबिक इसके बाद राजभवन ने मिश्रा की तैनाती पर सख्त नाराजगी जताई। मामला सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत तक भी पहुंचा। उन्होंने भी शासन के अधिकारियों को मिश्रा को हटाने संबंधी निर्देश दिए। आखिरकार, दोपहर बाद मिश्रा को हटाकर आयुष विभाग में अटैच करने के आदेश जारी हुए। हालांकि आयुर्वेद विवि के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार का कहना है कि उनकी राज्यपाल से भेंट महज एक रूटीन प्रक्रिया के तहत हुई थी।
विज्ञापन
क्या मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर हुई थी मिश्रा की ताजपोशी
किस आलाअधिकारी ने किया खेल
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। इस ताजपोशी और विदाई पर एक और सवाल यह भी उठा कि क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अंधेरे में रखकर मिश्रा की ताजपोशी की गई। क्या किसी आलाअधिकारी ने निजी संबंधों के चलते मिश्रा को उपकृत करने के लिए सभी हदें तक पार कर दी। नतीजा, मुख्यमंत्री को अप्रिय स्थिति से गुजरना पड़ा और इस फैसले ने उनकी छवि को भी प्रभावित किया।
विज्ञापन
इसी तरह शुक्रवार को प्रशासनिक महकमे में यह सवाल चर्चा में था कि क्या मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर मृत्युंजय मिश्रा को आयुर्वेद विवि के कुलसचिव पद पर तैनाती दी गई, वरना ऐसे कौन से कारण थे कि ताजपोशी के अगले दिन ही उन्हें हटाने के आदेश दिए गए। यह भी सवाल उठा कि क्या कोई आलाधिकारी, सीएम और मृत्युंजय से अपनी करीबी संबंधों को इस तरह से भुना गया कि मुख्यमंत्री की छवि भी ध्यान नहीं रखा गया। सभी जानते हैं कि मृत्युंजय का दिल्ली से देहरादून आना गुपचुप नहीं हुआ। मृत्युंजय मिश्रा को दिल्ली में अपर स्थानिक आयुक्त के पद से हटाने की खबरें आम हुई। उन्हें मूल विभाग में भेजने को लेकर भी मीडिया में खबरें आईं। जानकार बताते हैं कि आयुर्वेद विवि में पहली तैनाती के दौरान मृत्युंजय मिश्रा विवादों में चल रहे थे तो उन दिनों बतौर भाजपा नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत भी उन लोगों में से एक थे, जो मिश्रा के कृत्यों की मुखालफत कर रहे थे। ऐसे में अब बतौर सीएम उनकी सहमति से मृत्युंजय मिश्रा की आयुर्वेद विवि के कुल सचिव पद पर फिर तैनाती लोगों के गले से नहीं उतर रही थी। मिश्रा को हटाए जाने के सवाल पर सीएम के मीडिया सलाहकार दर्शन सिंह रावत का बयान इसकी पुष्टि करता है, खेल कुछ ऐसा ही है। वे कहते हैं कि मुख्यमंत्री को मृत्युंजय मिश्रा की तैनाती की जानकारी नहीं थी, ज्योंही पता चला उन्होंने मिश्रा को हटाने के आदेश कर दिए। यानि यह सच है कि किसी आलाअधिकारी ने मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर यह खेल किया था, उससे इस बात से कोई सरोकार नहीं था कि इस फैसले का मुख्यमंत्री की छवि पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उपकुलसचिव को हटाकर खुद विदा हो गए मिश्रा
विवि में उपकुलसचिव एवं प्रभारी कुलसचिव डॉ. राजेश कुमार को किया कार्यमुक्त
दोपहर बाद खुद ही मृत्युंजय मिश्रा भी हो गए शासन में अटैच
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
उत्तराखंड आयुर्वेद विवि में कार्यभार ग्रहण करने के दूसरे ही दिन डॉ. मृत्युंजय मिश्रा ने उपकुलसचिव डॉ. राजेश कुमार अदाना को हटाने का आदेश जारी कर दिया। इसके कुछ ही देर बाद खुद मिश्रा भी विवि से विदा हो गए। हालांकि कुलपति का कहना है कि उनकी अनुमति के बिना आदेश प्रभावी नहीं होगा। इसलिए डॉ. राजेश कुमार प्रभारी कुलसचिव बने रहेेंगे।
शुक्रवार को कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय मिश्रा ने आदेश जारी किया कि डॉ. राजेश कुमार को आयुर्वेद विवि तैनाती के शासनादेश की प्रतिलिपि उनके मूल जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी पौड़ी गढ़वाल कार्यालय को नहीं दी गई। न ही डॉ. राजेश को इसकी प्रतिलिपि दी गई। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए एक तरफा डॉ. राजेश को कार्यमुक्त कर दिया था और तत्कालीन कुलसचिव ने कार्यभार ग्रहण करा दिया था। जबकि नियमानुसार शासनादेश के अनुरूप नियुक्ति पत्र कुलसचिव या कुलपति द्वारा ही निर्गत किए जाने चाहिए थे। डॉ. राजेश को वेतन अभी भी जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय से ही आहरित हो रहा है, जबकि उनके संबद्धता के आदेश भी शासन से निर्गत नहीं हुए हैं, न ही विवि ने इसकी सेवाओं की कोई मांग की थी। मिश्रा ने इस आधार पर डॉ. राजेश कुमार की विवि में नियुक्ति प्रक्रिया को दूषित मानते हुए उन्हें जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी कार्यालय पौड़ी गढ़वाल के लिए कार्यमुक्त कर दिया। यह आदेश प्रभावी होता, इससे पहले ही मृत्युंजय मिश्रा की आयुर्वेद विवि से विदाई हो गई। दिनभर यह घटनाक्रम चर्चाओं में रहा। मामले में आयुर्वेद विवि के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार का कहना है कि कुलसचिव का कोई भी आदेश उनकी अनुमति के बिना प्रभावी नहीं है। इसलिए डॉ. राजेश कुमार अदाना फिलहाल स्थायी कुलसचिव आने तक प्रभारी कुलसचिव एवं उपकुलसचिव के पद पर सेवाएं देते रहेंगे।