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700 अस्पतालों ने किया पंजीकरण का आवेदन
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700 अस्पतालों ने किया पंजीकरण के लिए आवेदन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अस्पताल संचालकों से सहमति व प्राधिकार शुल्क के मद में वसूली जाने वाली धनराशि को 2001 से लेकर 2016 तक सभी धनराशि को माफ करने और साल 2016 के बाद ही सहमति व प्राधिकार शुल्क वसूले जाने संबंधी फैसले के बाद अस्पताल संचालकों ने पंजीकरण में दिलचस्पी दिखायी है। बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक फैसले के बाद राज्य के 700 अस्पतालों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया है।
उल्लेखनीय है कि कई माह पूर्व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निजी अस्पताल संचालकों से सहमति व प्राधिकार शुल्क के मद में 2016 से पूर्व की कोई धनराशि नहीं वसूलने का निर्णय लिया था। बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया था कि 50 बेड से कम वाले अस्पतालों से 1500 रुपये सहमति शुल्क व 500 रुपये प्राधिकार शुल्क वसूला जाएगा। 50 से 200 बेड वाले अस्पतालों से अब 2500 रुपये सहमति शुल्क व 1000 रुपये प्राधिकार शुल्क वसूला जाएगा। इसी प्रकार 200 से 500 बेड वाले अस्पतालों के संचालकों से अब 7500 रुपये सहमति शुल्क व 5000 रुपये प्राधिकार शुल्क वसूला जाएगा। 500 से अधिक बेड वाले अस्पताल संचालकाें से अब 10000 रुपये सहमति शुल्क व 7000 रुपये प्राधिकार शुल्क वसूला जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस फैसले के बाद निजी अस्पताल संचालकाें ने पंजीकरण कराने में तेजी दिखाई है। बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने बताया कि बोर्ड बैठक मेें लिए गए निर्णय के बाद पंजीकरण प्रक्रिया में तेजी आई है और अब तक लगभग 700 अस्पतालों ने पंजीकरण के लिए आवेदन कर दिया है जिसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अस्पताल संचालकों से सहमति व प्राधिकार शुल्क के मद में वसूली जाने वाली धनराशि को 2001 से लेकर 2016 तक सभी धनराशि को माफ करने और साल 2016 के बाद ही सहमति व प्राधिकार शुल्क वसूले जाने संबंधी फैसले के बाद अस्पताल संचालकों ने पंजीकरण में दिलचस्पी दिखायी है। बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक फैसले के बाद राज्य के 700 अस्पतालों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया है।
उल्लेखनीय है कि कई माह पूर्व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निजी अस्पताल संचालकों से सहमति व प्राधिकार शुल्क के मद में 2016 से पूर्व की कोई धनराशि नहीं वसूलने का निर्णय लिया था। बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया था कि 50 बेड से कम वाले अस्पतालों से 1500 रुपये सहमति शुल्क व 500 रुपये प्राधिकार शुल्क वसूला जाएगा। 50 से 200 बेड वाले अस्पतालों से अब 2500 रुपये सहमति शुल्क व 1000 रुपये प्राधिकार शुल्क वसूला जाएगा। इसी प्रकार 200 से 500 बेड वाले अस्पतालों के संचालकों से अब 7500 रुपये सहमति शुल्क व 5000 रुपये प्राधिकार शुल्क वसूला जाएगा। 500 से अधिक बेड वाले अस्पताल संचालकाें से अब 10000 रुपये सहमति शुल्क व 7000 रुपये प्राधिकार शुल्क वसूला जाएगा।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस फैसले के बाद निजी अस्पताल संचालकाें ने पंजीकरण कराने में तेजी दिखाई है। बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने बताया कि बोर्ड बैठक मेें लिए गए निर्णय के बाद पंजीकरण प्रक्रिया में तेजी आई है और अब तक लगभग 700 अस्पतालों ने पंजीकरण के लिए आवेदन कर दिया है जिसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
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