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एनओसी के फेर में अटका बच्चों का पौष्टिक भोजन
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों का पौष्टिक मध्याह्न भोजन सरकारी सिस्टम में फंस कर रह गया है। करीब एक वर्ष पूर्व खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिस स्थान पर किचन निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था, वहां भी अब तक एनओसी नहीं मिल पाई है। इसके अलावा पांच अन्य स्थानों पर जमीन ढूंढने और एनओसी लेने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में इस साल भी बच्चों को यहां से भोजन मिल पाना संभव नहीं लग रहा है।
सरकार ने वर्ष 2017 में सरकारी विद्यालयों के बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापरक मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अक्षयपात्र फाउंडेशन के साथ अनुबंध किया था। इसके तहत प्रदेश में छह स्थानों सुद्धोवाला व डोईवाला (देहरादून), रुड़की (हरिद्वार) और सितारगंज, काशीपुर व गदरपुर (ऊधमसिंह नगर) में इंटिग्रेटेड किचन बनाए जाने थे, जहां से खाना तैयार कर आसपास के विद्यालयों को पहुंचाया जाना था। योजना के तहत जमीन सरकार को उपलब्ध करानी थी जबकि निर्माण का पैसा हंस फाउंडेशन को अदा करना है।
12 फरवरी 2018 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सुद्धोवाला में किचन का भूमि पूजन किया। लेकिन आज तक यहां किचन निर्माण को एनओसी नहीं मिल पाई है। इसके चलते अभी निर्माण कार्य शुरू तक नहीं पाया है। गदरपुर में भी भूमि पूजन किया गया था लेकिन यहां भी स्थिति जस की तस है। डोईवाला, रुड़की, सितारगंज व काशीपुर में कुछ स्थानों पर जमीन चिह्नित कर ली गई है, जबकि कहीं तलाश जारी है।
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करीब 12 विभागों की एनओसी जरूरी
किचन निर्माण से पहले अक्षय पात्र फाउंडेशन को करीब 12 विभागों की एनओसी व प्रमाण पत्र लेने होंगे। उन्हें वन एवं पर्यावरण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दमकल विभाग समेत अन्य विभागों की एनओसी लेनी होगी। इसके अलावा भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से लाइसेंस भी प्राप्त करना होगा। एमडीडीए से भवन का नक्शा भी पास करवाना होगा।
दो नए किचन मंजूर
पुराने किसी भी किचन पर सरकार भले ही अब तक काम शुरू न कर पाई हो लेकिन दो नए किचन को मंजूरी जरूर दे दी है। सरकार ने हरिद्वार और नैनीताल में भी किचन बनाने पर सहमति व्यक्त की है। इसके लिए जमीन चिह्नित की जा रही है।
कुछ स्थानों पर अक्षयपात्र फाउंडेशन को जमीन हस्तांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्हें निर्माण से पहले कई विभागों की एनओसी लेनी है, जिसके चलते अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
-पीके बिष्ट, संयुक्त निदेशक, मध्याह्न भोजन योजना।
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देहरादून। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों का पौष्टिक मध्याह्न भोजन सरकारी सिस्टम में फंस कर रह गया है। करीब एक वर्ष पूर्व खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिस स्थान पर किचन निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था, वहां भी अब तक एनओसी नहीं मिल पाई है। इसके अलावा पांच अन्य स्थानों पर जमीन ढूंढने और एनओसी लेने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में इस साल भी बच्चों को यहां से भोजन मिल पाना संभव नहीं लग रहा है।
सरकार ने वर्ष 2017 में सरकारी विद्यालयों के बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापरक मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अक्षयपात्र फाउंडेशन के साथ अनुबंध किया था। इसके तहत प्रदेश में छह स्थानों सुद्धोवाला व डोईवाला (देहरादून), रुड़की (हरिद्वार) और सितारगंज, काशीपुर व गदरपुर (ऊधमसिंह नगर) में इंटिग्रेटेड किचन बनाए जाने थे, जहां से खाना तैयार कर आसपास के विद्यालयों को पहुंचाया जाना था। योजना के तहत जमीन सरकार को उपलब्ध करानी थी जबकि निर्माण का पैसा हंस फाउंडेशन को अदा करना है।
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12 फरवरी 2018 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सुद्धोवाला में किचन का भूमि पूजन किया। लेकिन आज तक यहां किचन निर्माण को एनओसी नहीं मिल पाई है। इसके चलते अभी निर्माण कार्य शुरू तक नहीं पाया है। गदरपुर में भी भूमि पूजन किया गया था लेकिन यहां भी स्थिति जस की तस है। डोईवाला, रुड़की, सितारगंज व काशीपुर में कुछ स्थानों पर जमीन चिह्नित कर ली गई है, जबकि कहीं तलाश जारी है।
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करीब 12 विभागों की एनओसी जरूरी
किचन निर्माण से पहले अक्षय पात्र फाउंडेशन को करीब 12 विभागों की एनओसी व प्रमाण पत्र लेने होंगे। उन्हें वन एवं पर्यावरण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दमकल विभाग समेत अन्य विभागों की एनओसी लेनी होगी। इसके अलावा भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से लाइसेंस भी प्राप्त करना होगा। एमडीडीए से भवन का नक्शा भी पास करवाना होगा।
दो नए किचन मंजूर
पुराने किसी भी किचन पर सरकार भले ही अब तक काम शुरू न कर पाई हो लेकिन दो नए किचन को मंजूरी जरूर दे दी है। सरकार ने हरिद्वार और नैनीताल में भी किचन बनाने पर सहमति व्यक्त की है। इसके लिए जमीन चिह्नित की जा रही है।
कुछ स्थानों पर अक्षयपात्र फाउंडेशन को जमीन हस्तांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्हें निर्माण से पहले कई विभागों की एनओसी लेनी है, जिसके चलते अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
-पीके बिष्ट, संयुक्त निदेशक, मध्याह्न भोजन योजना।