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बच्चों की जासूसी नहीं बल्कि मॉनिटरिंग जरूरी : आकाश
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
अगर आपने अपने बच्चे को डॉक्टर, इंजीनियर बनाने का सपना देखा है तो उसके लिए आपका समर्पण भी जरूरी है। आपको भी शादी-विवाह, पिकनिक छोड़कर अपने बच्चे की सही तैयारी में भागीदार बनना होगा। मां-बाप को अपने बच्चों की जासूसी नहीं बल्कि मॉनिटरिंग जरूरी है।
कुछ इसी तरह की नसीहतें मंगलवार को दून पहुंचे आकाश एजुकेशन सर्विसेज लिमिटेड के सीईओ एवं पूर्णकालिक निदेशक आकाश चौधरी ने अभिभावकों को दीं। सुभाष रोड स्थित एक होटल में आयोजित मोटिवेशनल कार्यक्रम में अभिभावकों को एक विस्तृत रोडमैप दिया गया। रोडमैप के माध्यम से छात्रों के जीवन से संबंधित कई पहलुओं की जानकारियां जुटाई गईं। इसके बाद वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए अभिभावकों को उन तरीकों की पहचान करने एवं उन पर कार्य करने के लिए मार्गदर्शन दिया गया, जो छात्रों की आवश्यकताओं तथा उनकी योग्यता एवं रुचि के अनुसार सर्वोत्तम हो सकते हैं तथा भविष्य में करियर संबंधी निर्णय लेने में सहायक हो। सेमिनार में ऐसी शंकाओं को भी दूर किया गया, जिनका सामना अक्सर अभिभावकों को करना पड़ता है। इसके लिए अभिभावकों को छात्रों का मित्र एवं गुरु बनने की जरूरत है। आकाश चौधरी ने बताया कि वर्तमान में प्रतियोगिता पहले की तुलना में काफी कठिन हो चुकी है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को मोबाइल से निश्चित दूरी बनाए रखनी जरूरी है।
मां-बाप और भगवान को समय जरूर दें
आकाश चौधरी ने कहा कि आप जिंदगी में कितने भी व्यस्त हों, कितनी भी समस्याएं हों, लेकिन प्रतिदिन पांच सेकेंड अपने मां-बाप और भगवान को जरूर दें। इनमें से दो सेकेंड में भगवान की प्रार्थना करें और तीन सेकेंड में अपने मां-बाप के पैर छू लें। निश्चित तौर पर आपका आत्मविश्वास कभी कम नहीं होगा।
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अगर आपने अपने बच्चे को डॉक्टर, इंजीनियर बनाने का सपना देखा है तो उसके लिए आपका समर्पण भी जरूरी है। आपको भी शादी-विवाह, पिकनिक छोड़कर अपने बच्चे की सही तैयारी में भागीदार बनना होगा। मां-बाप को अपने बच्चों की जासूसी नहीं बल्कि मॉनिटरिंग जरूरी है।
कुछ इसी तरह की नसीहतें मंगलवार को दून पहुंचे आकाश एजुकेशन सर्विसेज लिमिटेड के सीईओ एवं पूर्णकालिक निदेशक आकाश चौधरी ने अभिभावकों को दीं। सुभाष रोड स्थित एक होटल में आयोजित मोटिवेशनल कार्यक्रम में अभिभावकों को एक विस्तृत रोडमैप दिया गया। रोडमैप के माध्यम से छात्रों के जीवन से संबंधित कई पहलुओं की जानकारियां जुटाई गईं। इसके बाद वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए अभिभावकों को उन तरीकों की पहचान करने एवं उन पर कार्य करने के लिए मार्गदर्शन दिया गया, जो छात्रों की आवश्यकताओं तथा उनकी योग्यता एवं रुचि के अनुसार सर्वोत्तम हो सकते हैं तथा भविष्य में करियर संबंधी निर्णय लेने में सहायक हो। सेमिनार में ऐसी शंकाओं को भी दूर किया गया, जिनका सामना अक्सर अभिभावकों को करना पड़ता है। इसके लिए अभिभावकों को छात्रों का मित्र एवं गुरु बनने की जरूरत है। आकाश चौधरी ने बताया कि वर्तमान में प्रतियोगिता पहले की तुलना में काफी कठिन हो चुकी है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को मोबाइल से निश्चित दूरी बनाए रखनी जरूरी है।
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मां-बाप और भगवान को समय जरूर दें
आकाश चौधरी ने कहा कि आप जिंदगी में कितने भी व्यस्त हों, कितनी भी समस्याएं हों, लेकिन प्रतिदिन पांच सेकेंड अपने मां-बाप और भगवान को जरूर दें। इनमें से दो सेकेंड में भगवान की प्रार्थना करें और तीन सेकेंड में अपने मां-बाप के पैर छू लें। निश्चित तौर पर आपका आत्मविश्वास कभी कम नहीं होगा।
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