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Dehradun News: तंग सड़क के किनारे खड़ा है 60 मीटर लंबा मौत का पंजा

Fri, 20 Oct 2023 11:49 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 20 Oct 2023 11:49 PM IST
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60 meter long death claw standing on the side of a narrow road
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IIमौत की दीवार: टूटी हुई दीवार का बाकी 60 मीटर के हिस्से का भी झुकाव सड़क की ओर
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Iएक सदी से भी ज्यादा पुराने कॉलेज की दीवारों की नहीं हुई मरम्मत
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Iडीबीएस रोड पर डीएवी कॉलेज की पिछली दीवार गिरने के बाद भी खतरा टला नहीं है। अब भी इस तंग सड़क के किनारे दीवार के रूप में 60 मीटर लंबा मौत का पंजा खड़ा है। इस दीवार का ज्यादातर हिस्सा सड़क की ओर झुका है। पीछे खड़े पेड़ साल दर साल इस दीवार को जैसे सड़क की ओर धकेल रहे हैं। हालात ये हैं कि अगर इसकी समय से मरम्मत नहीं कराई या ढहाई गई तो यह कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। सुष्मिता और रघुवीर की तरह हर रोज पढ़ने के लिए कोचिंग और अन्य शिक्षण संस्थानों में आने-जाने वाले छात्र इसकी चपेट में आ सकते हैं।
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Iबता दें कि डीएवी कॉलेज की देहरादून के इतिहास में अपनी अलग पहचान है। वर्ष 1872 में यह कभी डीएवी स्कूल हुआ करता था। इसके बाद इसे 1948 में पीजी कॉलेज का दर्जा मिला। इसका विशालकाय भवन और दीवार आज भी उसी वक्त के बने हुए हैं। छोटे-मोटे मरम्मत के काम और कुछ कमरों के निर्माण को छोड़ दें तो यहां इसके बाद से कोई नया निर्माण नहीं हुआ है। डीबीएस रोड पर बृहस्पतिवार को जो दीवार गिरी वह भी एक सदी से ज्यादा पुरानी थी। इस दीवार से सटे हुए कई बड़े पेड़ हैं। बरसों बरस इन पेड़ों की जड़ दीवार की बुनियाद में जगह बना चुकी हैं। यही कारण है कि अब दीवार जर्जर और कमजोर हो चुकी है।
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Iइस मार्ग की बात करें तो डीबीएस रोड बमुश्किल 18 मीटर चौड़ी है। इसी रास्ते से रोज हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं। दिन में हजारों वाहन आवाजाही करते हैं। इस सड़क किनारे 80 मीटर लंबी यह दीवार है। इसका तकरीबन 20 मीटर का हिस्सा ढह गया, जिसके नीचे दबने से सुष्मिता की मौत हो गई। डीएवी कॉलेज प्रबंधन अपने ऊपर से टालकर इस बात को वन विभाग के पाले में डाल रहा है। बताया जा रहा है कि इस दीवार के किनारे खड़े पेड़ों को कटवाने के लिए वन विभाग से मिन्नतें की गई थीं। लेकिन, किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। प्रबंधन और वन विभाग के बीच जो भी कुछ हुआ हो लेकिन, उनकी यह लापरवाही अपने कॅरियर की शुरूआत करने जा रही सुष्मिता की जान पर भारी पड़ गई। अब भी प्रबंधन यहां से मलबा हटाने में लगा है, लेकिन अगले 60 मीटर के हिस्से को लेकर कोई जवाब किसी के पास नहीं है।
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Iडीएवी के किसी भी अधिकारी ने वन विभाग से फोन पर या किसी माध्यम से संपर्क नहीं किया है। पेड़ काटने की अनुमति के लिए चिट्ठी लिखी थी, जिस पर निरीक्षण करने के बाद 12 अक्तूबर को अनुमति जारी कर दी गई थी। अनुमति के बाद यह पेड़ कटवाना डीएवी प्रबंधन को ही था। घटना के बाद फिर से निरीक्षण किया गया था। लेकिन, पेड़ की वजह से दीवार नहीं गिरी है। - नितिशनमणि त्रिपाठी, डीएफओ, देहरादूनI
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