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संचार सुविधाओं में ‘जान’ डालेंगी ऑप्टिकल फाइबर लाइनें
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संचार सुविधाओं में ‘जान’ डालेंगी ऑप्टिकल फाइबर लाइनें
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) ट्रांसमिशन लाइनों में अर्थवायर की जगह अत्याधुनिक ऑप्टिकल फाइबर लाइनें बिछाने की योजना पर काम कर रहा है। पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड स्कीम (पीएसडीएफ) के तहत योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी है। पिटकुल, सरकार व नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (एनएलडीसी) के बीच इस मुद्दे पर सहमति भी बन चुकी हैं। यदि योजना परवान चढ़ती है तो ऑप्टिकल फाइबर लाइनों को निजी दूरसंचार कंपनियों को किराये पर देकर कमायी भी की जा सकती है।
पिटकुल के प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल ने बताया कि पावर ट्रांसमिशन लाइनों में लगी अर्थवायर की जगह ऑप्टिकल फाइबर लाइनों को लगाने की योजना बनाई गई है। विभागीय स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है कि ऑप्टिकल फाइबर लाइनों की जगह क्या इससे और अधिक बेहतर तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। सिंघल का कहना है कि यदि योजना परवान चढ़ती है तो इससे जहां राज्य के दूरस्थ इलाकों में संचार सुविधाओं को और बेहतर किया जा सकेगा। वहीं दूरसंचार कंपनियों को ऑप्टिकल फाइबर लाइनें किराये पर देने के एवज में कमायी भी होगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य के पर्वतीय खासकर दूरस्थ इलाकों में भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर लाइनें नहीं होने की वजह से दूरसंचार कंपनियों को दिक्कतें आ रही हैं। यदि पिटकु़ल पावर ट्रांसमिशन लाइनों पर ऑप्टिकल फाइबर लाइनों की सुविधाएं मुहैया कराता है तो इससे दूरसंचार कंपनियों को काफी राहत मिलेगी।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) ट्रांसमिशन लाइनों में अर्थवायर की जगह अत्याधुनिक ऑप्टिकल फाइबर लाइनें बिछाने की योजना पर काम कर रहा है। पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड स्कीम (पीएसडीएफ) के तहत योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी है। पिटकुल, सरकार व नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (एनएलडीसी) के बीच इस मुद्दे पर सहमति भी बन चुकी हैं। यदि योजना परवान चढ़ती है तो ऑप्टिकल फाइबर लाइनों को निजी दूरसंचार कंपनियों को किराये पर देकर कमायी भी की जा सकती है।
पिटकुल के प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल ने बताया कि पावर ट्रांसमिशन लाइनों में लगी अर्थवायर की जगह ऑप्टिकल फाइबर लाइनों को लगाने की योजना बनाई गई है। विभागीय स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है कि ऑप्टिकल फाइबर लाइनों की जगह क्या इससे और अधिक बेहतर तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। सिंघल का कहना है कि यदि योजना परवान चढ़ती है तो इससे जहां राज्य के दूरस्थ इलाकों में संचार सुविधाओं को और बेहतर किया जा सकेगा। वहीं दूरसंचार कंपनियों को ऑप्टिकल फाइबर लाइनें किराये पर देने के एवज में कमायी भी होगी।
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उल्लेखनीय है कि राज्य के पर्वतीय खासकर दूरस्थ इलाकों में भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर लाइनें नहीं होने की वजह से दूरसंचार कंपनियों को दिक्कतें आ रही हैं। यदि पिटकु़ल पावर ट्रांसमिशन लाइनों पर ऑप्टिकल फाइबर लाइनों की सुविधाएं मुहैया कराता है तो इससे दूरसंचार कंपनियों को काफी राहत मिलेगी।
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