{"_id":"5b490cc54f1c1b3b5a8b4783","slug":"51531514053-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्राम्य विकास अधिकारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्राम्य विकास अधिकारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं
Updated Sat, 14 Jul 2018 02:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन ने शुक्रवार को रायपुर रोड स्थित उत्तराखंड सामाजिक अंकेक्षण जवाबदेही एवं पारदर्शिता अभिकरण ग्राम्य विकास विभाग (उसाटा) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर आक्रोश जताया। एसोसिएशन ने कहा कि ग्राम्य विकास अधिकारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। व्यवस्था में सुधार होने पर एसोसिएशन ने कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। साथ ही अपर सचिव को चार सूत्रीय सुझाव भी दिए।
एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष शक्ति प्रसाद भट्ट के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने रायपुर रोड स्थित उसाटा के कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन करते हुए नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश भर से ग्राम विकास अधिकारियों की नई भर्ती नहीं होने से 950 पदों के सापेक्ष फील्ड स्तर पर 250 पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में संवर्ग के ग्राम विकास अधिकारी करीब 20-40 ग्राम पंचायतों का कार्यभार देख रहे हैं। ग्राम विकास अधिकारी इसके अलावा अन्य योजनाओं को भी देखते हैं। इसके चलते वह बीमार हो रहे हैं। उन्होंने ग्राम विकास अधिकारियों को राहत देने की मांग की। इस मौके पर प्रांतीय महामंत्री केएस सामंत, संयुक्त मोर्चा के मुख्य संयोजक ठाकुर प्रहलाद सिंह, सचिव रवि पचौरी, महावीर गुसांई, अनुज चौहान, डीपी चमोली आदि मौजूद रहे।
---
ये दिए सुझाव
- अंकेक्षण के लिए समय पर कार्यक्रम प्रेषित किया जाए।
- ग्राम विकास अधिकारियों के पूर्व के देयकों के भुगतान एवं कार्य संबंधी स्टेशनरी, लैपटॉप आदि मुहैया कराए जाएं।
- अनियमितता एवं भुगतान में देरी के लिए केवल ग्राम विकास अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए उनसे वसूली न की जाए, बल्कि विभिन्न स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।
विज्ञापन
- जन सुनवाई के दौरान आरोपों के आधार पर ग्राम विकास अधिकारी को दोषी नहीं माना जाना चाहिए, उन्हें अपना पक्ष रखने का भी अवसर दिया जाए।
विज्ञापन
ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन ने शुक्रवार को रायपुर रोड स्थित उत्तराखंड सामाजिक अंकेक्षण जवाबदेही एवं पारदर्शिता अभिकरण ग्राम्य विकास विभाग (उसाटा) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर आक्रोश जताया। एसोसिएशन ने कहा कि ग्राम्य विकास अधिकारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। व्यवस्था में सुधार होने पर एसोसिएशन ने कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। साथ ही अपर सचिव को चार सूत्रीय सुझाव भी दिए।
एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष शक्ति प्रसाद भट्ट के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने रायपुर रोड स्थित उसाटा के कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन करते हुए नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश भर से ग्राम विकास अधिकारियों की नई भर्ती नहीं होने से 950 पदों के सापेक्ष फील्ड स्तर पर 250 पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में संवर्ग के ग्राम विकास अधिकारी करीब 20-40 ग्राम पंचायतों का कार्यभार देख रहे हैं। ग्राम विकास अधिकारी इसके अलावा अन्य योजनाओं को भी देखते हैं। इसके चलते वह बीमार हो रहे हैं। उन्होंने ग्राम विकास अधिकारियों को राहत देने की मांग की। इस मौके पर प्रांतीय महामंत्री केएस सामंत, संयुक्त मोर्चा के मुख्य संयोजक ठाकुर प्रहलाद सिंह, सचिव रवि पचौरी, महावीर गुसांई, अनुज चौहान, डीपी चमोली आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
---
ये दिए सुझाव
- अंकेक्षण के लिए समय पर कार्यक्रम प्रेषित किया जाए।
- ग्राम विकास अधिकारियों के पूर्व के देयकों के भुगतान एवं कार्य संबंधी स्टेशनरी, लैपटॉप आदि मुहैया कराए जाएं।
- अनियमितता एवं भुगतान में देरी के लिए केवल ग्राम विकास अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए उनसे वसूली न की जाए, बल्कि विभिन्न स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।
विज्ञापन
- जन सुनवाई के दौरान आरोपों के आधार पर ग्राम विकास अधिकारी को दोषी नहीं माना जाना चाहिए, उन्हें अपना पक्ष रखने का भी अवसर दिया जाए।