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समय पर मिला बजट, फिर भी योजना में देरी
Updated Mon, 09 Jul 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
बजट जारी होने बावजूद पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड (पीएसडीएफ) के तहत बिजली आपूर्ति सुधारने की योजना पिटकुल अधिकारी समय पर पूरा नहीं कर पाए। महालेखा परीक्षक की ओर से कराए गए ऑडिट में यह बात सामने आने आई है। समय पर कार्य पूर नहीं होने की स्थिति में योजना के बजट लैप्स होने का खतरा है। अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए ऑडिट रिपोर्ट पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी को भेज दी गई है।
वर्ष 2014 में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से पावर पीएसडीएफ के तहत बिजली ट्रांसमिशन सुधारने के लिए योजना तैयार कर सभी राज्यों को बजट जारी किया गया। उत्तराखंड में भी योजना को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (एनएलडीसी) को सौंपी गई। अप्रैल 2015 में सात करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया, लेकिन मार्च 2016 में नोडल एजेंसी ने संशोधित प्रस्ताव तैयार कर बजट को 127 करोड़ कर दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने 125 करोड़ का बजट मंजूरी किया, लेकिन कुछ शर्तें भी लगा दीं।
इसके मुताबिक, अप्रैल-2018 तक योजना को किसी भी सूरत में पूरा करने की बात कही गई। चौंकाने वाली बात यह है कि पिटकुल के अफसरों ने योजना की डीपीआर तैयार करने में ही एक वर्ष लगा दिया। इसके बाद चार एजेंसियों को सामान की आपूर्ति और टॉवर खड़े करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। 31 मार्च 2018 तक पिटकुल को 97.95 करोड़ के सामानों की आपूर्ति कर दी गई, लेकिन निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया।
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एक की जांच हुई नहीं, दूसरा मामला आ गया
बजट जारी होने के बाद भी काशीपुर-श्रीनगर 440 केवी की हाईटेंशन लाइन का कार्य समय से पूरा नहीं होने की जांच पूरी होने से पहले पिटकुल की एक और लापरवाही सामने आने पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। हाइटेंशन लाइन के लिए एडीबी ने 530 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था, लेकिन इसका काम भी समय पर नहीं पूरा हो पाया था। मामले की शासन और पिटकुल प्रबंधन के स्तर से जांच कराई जा रही है। नवंबर 2017 में समिति को रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन सात माह बीत जाने के बावजूद समिति जांच रिपोर्ट नहीं सौंप पाई है।
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बजट जारी होने बावजूद पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड (पीएसडीएफ) के तहत बिजली आपूर्ति सुधारने की योजना पिटकुल अधिकारी समय पर पूरा नहीं कर पाए। महालेखा परीक्षक की ओर से कराए गए ऑडिट में यह बात सामने आने आई है। समय पर कार्य पूर नहीं होने की स्थिति में योजना के बजट लैप्स होने का खतरा है। अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए ऑडिट रिपोर्ट पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी को भेज दी गई है।
वर्ष 2014 में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से पावर पीएसडीएफ के तहत बिजली ट्रांसमिशन सुधारने के लिए योजना तैयार कर सभी राज्यों को बजट जारी किया गया। उत्तराखंड में भी योजना को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (एनएलडीसी) को सौंपी गई। अप्रैल 2015 में सात करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया, लेकिन मार्च 2016 में नोडल एजेंसी ने संशोधित प्रस्ताव तैयार कर बजट को 127 करोड़ कर दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने 125 करोड़ का बजट मंजूरी किया, लेकिन कुछ शर्तें भी लगा दीं।
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इसके मुताबिक, अप्रैल-2018 तक योजना को किसी भी सूरत में पूरा करने की बात कही गई। चौंकाने वाली बात यह है कि पिटकुल के अफसरों ने योजना की डीपीआर तैयार करने में ही एक वर्ष लगा दिया। इसके बाद चार एजेंसियों को सामान की आपूर्ति और टॉवर खड़े करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। 31 मार्च 2018 तक पिटकुल को 97.95 करोड़ के सामानों की आपूर्ति कर दी गई, लेकिन निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया।
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एक की जांच हुई नहीं, दूसरा मामला आ गया
बजट जारी होने के बाद भी काशीपुर-श्रीनगर 440 केवी की हाईटेंशन लाइन का कार्य समय से पूरा नहीं होने की जांच पूरी होने से पहले पिटकुल की एक और लापरवाही सामने आने पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। हाइटेंशन लाइन के लिए एडीबी ने 530 करोड़ का बजट स्वीकृत किया था, लेकिन इसका काम भी समय पर नहीं पूरा हो पाया था। मामले की शासन और पिटकुल प्रबंधन के स्तर से जांच कराई जा रही है। नवंबर 2017 में समिति को रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन सात माह बीत जाने के बावजूद समिति जांच रिपोर्ट नहीं सौंप पाई है।