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अफसर बिटियाओं ने दी मां को मुखाग्नि
Updated Sun, 20 May 2018 02:04 AM IST
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अफसर बिटियाओं ने दी मां को मुखाग्नि
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
समाज में व्याप्त बंदिशों को तोड़ते हुए दून की दो बेटियाें ने अपनी मां को मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूर्ण कीं। दो वर्ष पूर्व दोनों बहनों ने अपने पिता (सेवानिवृत्त कर्नल) को भी मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूर्ण की थी।
ग्रीन लॉन एकेडमी डाकरा और जैंतनवाला की प्रेसीडेंट जमुना खत्री (73) का शनिवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह किडनी की बीमारी से ग्रसित थीं और तीन माह से आईसीयू में भर्ती थीं। निधन के बाद उनकी बेटियों अर्चना थापा और कामना ने मां के अंतिम संस्कार का निर्णय लिया। दोनोें बहनों ने मां को मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूर्ण कीं।
अर्चना थापा ग्रीन लॉन एकेडमी में प्रिंसिपल हैं, जबकि दूसरी बेटी कामना एयरफोर्स में विंग कमांडर हैं। वह वर्तमान में नागपुर में तैनात हैं। दो वर्ष पूर्व दोनों बहनों ने पिता सेवानिवृत्त कर्नल एमएस खत्री के निधन के बाद मुखाग्नि देकर उनके अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूर्ण की थीं। अर्चना और कामना का कहना कि आज बेटियां किसी भी तरह बेटों से कम नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर बेटियां बेटों की तरह फर्ज निभाती हैं। जिस मां ने हमें जन्म दिया, उन्हें ससम्मान अंतिम विदाई देना हमारा कर्तव्य है और हम दोनों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
समाज में व्याप्त बंदिशों को तोड़ते हुए दून की दो बेटियाें ने अपनी मां को मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूर्ण कीं। दो वर्ष पूर्व दोनों बहनों ने अपने पिता (सेवानिवृत्त कर्नल) को भी मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूर्ण की थी।
ग्रीन लॉन एकेडमी डाकरा और जैंतनवाला की प्रेसीडेंट जमुना खत्री (73) का शनिवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह किडनी की बीमारी से ग्रसित थीं और तीन माह से आईसीयू में भर्ती थीं। निधन के बाद उनकी बेटियों अर्चना थापा और कामना ने मां के अंतिम संस्कार का निर्णय लिया। दोनोें बहनों ने मां को मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूर्ण कीं।
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अर्चना थापा ग्रीन लॉन एकेडमी में प्रिंसिपल हैं, जबकि दूसरी बेटी कामना एयरफोर्स में विंग कमांडर हैं। वह वर्तमान में नागपुर में तैनात हैं। दो वर्ष पूर्व दोनों बहनों ने पिता सेवानिवृत्त कर्नल एमएस खत्री के निधन के बाद मुखाग्नि देकर उनके अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूर्ण की थीं। अर्चना और कामना का कहना कि आज बेटियां किसी भी तरह बेटों से कम नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर बेटियां बेटों की तरह फर्ज निभाती हैं। जिस मां ने हमें जन्म दिया, उन्हें ससम्मान अंतिम विदाई देना हमारा कर्तव्य है और हम दोनों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है।
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