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हर साल 20 से 22 फीट पीछे खिसक रहा गंगोत्री ग्लेशियर
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हर साल 20 से 22 फीट पीछे खिसक रहा गंगोत्री ग्लेशियर
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। ‘भारत में जैव विविधता संरक्षण, मुद्दे, चुनौतियां समाधान एवं दूरस्थ शिक्षा की भूमिका’ विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार में विज्ञानियों ने गोमुख ग्लेशियर के हर साल 20 से 22 फीट तक पीछे खिसकने पर चिंता जताई है।
हिमालयन अभ्युदय सामाजिक संस्थान, उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद् एवं उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से एसजीआरआर पीजी कॉलेज में आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ. एनपीएस बिष्ट ने कहा कि हिमालयीय क्षेत्र के सर्वांगीण विकास एवं पर्यावरण संतुलन के लिए अंतरिक्ष आधारित सूचना तकनीकों का महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में देश के सभी राष्ट्रीय व राजकीय तकनीकी संस्थानों को आपस में मिलकर काम करना होगा।
मुख्य वक्ता जल पुरुष सचिदानंद भारती ने कहा कि जैव विविधता पानी पर निर्भर करती है। गोमुख ग्लेशियर पर आज तक सबसे अधिक अध्ययन हुए हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि गोमुख ग्लेशियर हर साल 20 से 22 फीट पीछे खिसक रहा है, जो चिंताजनक है। यदि भविष्य में जल संकट से निपटना है तो पहाड़ों में पानी को रोकने के ठोस कदम उठाने होंगे। मुख्य वक्ता भारती ने जंगलों को आग से बचाने के लिए चाल खाल को जरूरी बताया। विशिष्ट अतिथि डॉ. पुष्पेंद्र कुमार शर्मा ने जैव विविधता संरक्षण पर जोर दिया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. विनय आनंद बौड़ाई ने कहा कि युवाओं को जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूक होना होगा, तभी जल, जंगल, जमीन एवं जन सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के निराकरण हो पाएगा। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रभारी निदेशक डॉ. सुभाष रमोला ने जैव विविधता संरक्षण में दूरस्थ शिक्षा की भूमिका पर विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों की जानकारी दी।
इनके अलावा सेमिनार में कई वक्ताओं ने संबोधित किया। अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय आनंद बौडाई ने की। संचालन प्राचार्य डॉ. भावना डोभाल व नरेंद्र जगूड़ी ने किया। इस मौके पर हिमालयन अभ्युदय सामाजिक संस्थान के अध्यक्ष राकेश डोभाल, डॉ. संदीप नेगी, डॉ. एचवी पंत, डॉ. अंकिता बोरा, बृजमोहन सिंह खाती, संदीप रावत, साक्षी शंकर, हरीश जोशी, चेत बहादुर थापा, अंजली सेमवाल, रश्मि बहुगुणा समेत बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं व शोधार्थी उपस्थित थे।
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देहरादून। ‘भारत में जैव विविधता संरक्षण, मुद्दे, चुनौतियां समाधान एवं दूरस्थ शिक्षा की भूमिका’ विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार में विज्ञानियों ने गोमुख ग्लेशियर के हर साल 20 से 22 फीट तक पीछे खिसकने पर चिंता जताई है।
हिमालयन अभ्युदय सामाजिक संस्थान, उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद् एवं उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से एसजीआरआर पीजी कॉलेज में आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ. एनपीएस बिष्ट ने कहा कि हिमालयीय क्षेत्र के सर्वांगीण विकास एवं पर्यावरण संतुलन के लिए अंतरिक्ष आधारित सूचना तकनीकों का महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में देश के सभी राष्ट्रीय व राजकीय तकनीकी संस्थानों को आपस में मिलकर काम करना होगा।
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मुख्य वक्ता जल पुरुष सचिदानंद भारती ने कहा कि जैव विविधता पानी पर निर्भर करती है। गोमुख ग्लेशियर पर आज तक सबसे अधिक अध्ययन हुए हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि गोमुख ग्लेशियर हर साल 20 से 22 फीट पीछे खिसक रहा है, जो चिंताजनक है। यदि भविष्य में जल संकट से निपटना है तो पहाड़ों में पानी को रोकने के ठोस कदम उठाने होंगे। मुख्य वक्ता भारती ने जंगलों को आग से बचाने के लिए चाल खाल को जरूरी बताया। विशिष्ट अतिथि डॉ. पुष्पेंद्र कुमार शर्मा ने जैव विविधता संरक्षण पर जोर दिया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. विनय आनंद बौड़ाई ने कहा कि युवाओं को जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूक होना होगा, तभी जल, जंगल, जमीन एवं जन सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के निराकरण हो पाएगा। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रभारी निदेशक डॉ. सुभाष रमोला ने जैव विविधता संरक्षण में दूरस्थ शिक्षा की भूमिका पर विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों की जानकारी दी।
इनके अलावा सेमिनार में कई वक्ताओं ने संबोधित किया। अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय आनंद बौडाई ने की। संचालन प्राचार्य डॉ. भावना डोभाल व नरेंद्र जगूड़ी ने किया। इस मौके पर हिमालयन अभ्युदय सामाजिक संस्थान के अध्यक्ष राकेश डोभाल, डॉ. संदीप नेगी, डॉ. एचवी पंत, डॉ. अंकिता बोरा, बृजमोहन सिंह खाती, संदीप रावत, साक्षी शंकर, हरीश जोशी, चेत बहादुर थापा, अंजली सेमवाल, रश्मि बहुगुणा समेत बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं व शोधार्थी उपस्थित थे।