{"_id":"5bb67d1c867a5529516de5ad","slug":"31538686236-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिवहन निगम ने नौ महीने बाद भी नहीं दी रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिवहन निगम ने नौ महीने बाद भी नहीं दी रिपोर्ट
Updated Fri, 05 Oct 2018 02:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम ने नौ माह बाद भी अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को नहीं सौंपी है। इससे निगम को हर महीने तीन करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। परिसंपत्तियों के मामले में भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
पिछले वर्ष दिसंबर के अंत में दोनों राज्यों के बीच बसों की ट्रिप और परिसंपत्तियों को लेकर वार्ता हुई थी। लखनऊ में दोनों राज्यों के परिवहन सचिव के बीच वार्ता के बाद उन्हें रिपोर्ट दी जानी थी। जिससे आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए, लेकिन अभी तक उत्तराखंड परिवहन निगम की ओर से कोई रिपोर्ट उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को नहीं भेजी है। उत्तराखंड में रोजाना 800 बसें उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की आती हैं। इनके प्रतिदिन 1200 फेरे (ट्रिप) लगते हैं। इससे उत्तराखंड परिवहन निगम को सालाना 36 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। इसके सापेक्ष उत्तराखंड परिवहन निगम की 600 बसें उत्तर प्रदेश जाती हैं। जिसके बदले प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को सवा करोड़ रुपये प्रति माह का भुगतान करती है। इसके अलावा कानपुर, लखनऊ में वर्कशॉप और अजमेरी गेट बस अड्डा में परिवहन निगम की संपत्ति को लेकर भी महकमा कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इन संपत्तियों की कीमत 600 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है।
पिछले महीने रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। इसके बाद रिपोर्ट को यूपी परिवहन निगम को भेजी जाएगी। उसके बाद उम्मीद है मामले का निपटारा जल्द हो जाएगा।
- बीके संत, प्रबंध निदेशक, परिवहन निगम
विज्ञापन
देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम ने नौ माह बाद भी अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को नहीं सौंपी है। इससे निगम को हर महीने तीन करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। परिसंपत्तियों के मामले में भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
पिछले वर्ष दिसंबर के अंत में दोनों राज्यों के बीच बसों की ट्रिप और परिसंपत्तियों को लेकर वार्ता हुई थी। लखनऊ में दोनों राज्यों के परिवहन सचिव के बीच वार्ता के बाद उन्हें रिपोर्ट दी जानी थी। जिससे आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए, लेकिन अभी तक उत्तराखंड परिवहन निगम की ओर से कोई रिपोर्ट उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को नहीं भेजी है। उत्तराखंड में रोजाना 800 बसें उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की आती हैं। इनके प्रतिदिन 1200 फेरे (ट्रिप) लगते हैं। इससे उत्तराखंड परिवहन निगम को सालाना 36 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। इसके सापेक्ष उत्तराखंड परिवहन निगम की 600 बसें उत्तर प्रदेश जाती हैं। जिसके बदले प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को सवा करोड़ रुपये प्रति माह का भुगतान करती है। इसके अलावा कानपुर, लखनऊ में वर्कशॉप और अजमेरी गेट बस अड्डा में परिवहन निगम की संपत्ति को लेकर भी महकमा कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इन संपत्तियों की कीमत 600 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है।
विज्ञापन
पिछले महीने रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। इसके बाद रिपोर्ट को यूपी परिवहन निगम को भेजी जाएगी। उसके बाद उम्मीद है मामले का निपटारा जल्द हो जाएगा।
- बीके संत, प्रबंध निदेशक, परिवहन निगम