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यूपीसीएल अफसरों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच के आदेश
Updated Wed, 26 Sep 2018 02:09 AM IST
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यूपीसीएल अफसरों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच के आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। हाईकोर्ट में लंबित या निस्तारित मुकदमों में विभागीय स्तर पर ठोस पैरवी नहीं करने वाले यूपीसीएल अफसराें के खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। अपर सचिव ऊर्जा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी की ओर से जारी किए गए आदेश में प्रबंध निदेशक को निर्देशित किया गया है कि वह आला अफसरों की जांच समिति गठित कर विभागीय स्तर पर जांच कराएं और 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट को शासन को भेजें ताकि संबंधित अफसरों व कर्मचारियाें के खिलाफ कार्रवाई की जा सके ।
अपर सचिव ऊर्जा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि हाईकोर्ट समेत अन्य अदालतों में यूपीसीएल की ओर से ठोस पैरवी नहीं की जा रही है। ऐसे में यूपीसीएल को ज्यादातर मुकदमों में हार का सामना करना पड़ रहा है। अपर सचिव ऊर्जा की ओर से प्रबंध निदेशक को भेजे गए आदेश में हाल ही में हाईकोर्ट की ओर से उपनलकर्मियाें को ‘समान कार्य समान वेतन’ के मामले में दिए गए आदेश का हवाला दिया गया है। शासन का मानना है कि हाईकोर्ट व अन्य अदालतों में चल रहे मुकदमों में विभागीय अधिकारियों के स्तर पर ठोस पैरवी नहीं की जा रही है। अफसरों की इसी शिथिलता का परिणाम है कि ज्यादातर मामलों में यूपीसीएल के विपक्ष में फैसले जारी किए जा रहे हैं।
शासन के निर्देश पर यदि आला अफसरों की समिति गठित कर जांच की जाती है तो न सिर्फ तमाम अफसरों की शिथिलता उजागर होगी, वरन इन अफसरों को विभागीय कार्रवाई का भी सामना करना पड़ेगा।
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उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों राज्य विद्युत नियामक आयोग ने जन शिकायत निवारण मंचों की ओर से सुनाए गए फैसलों पर नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की थी कि यूपीसीएफ अफसरों की लेटलतीफी व शिथिलता से ही विभाग को 4500 प्रकरणों में 3500 में यूपीसीएल के विरुद्ध फैसला सुनाया गया।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। हाईकोर्ट में लंबित या निस्तारित मुकदमों में विभागीय स्तर पर ठोस पैरवी नहीं करने वाले यूपीसीएल अफसराें के खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। अपर सचिव ऊर्जा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी की ओर से जारी किए गए आदेश में प्रबंध निदेशक को निर्देशित किया गया है कि वह आला अफसरों की जांच समिति गठित कर विभागीय स्तर पर जांच कराएं और 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट को शासन को भेजें ताकि संबंधित अफसरों व कर्मचारियाें के खिलाफ कार्रवाई की जा सके ।
अपर सचिव ऊर्जा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि हाईकोर्ट समेत अन्य अदालतों में यूपीसीएल की ओर से ठोस पैरवी नहीं की जा रही है। ऐसे में यूपीसीएल को ज्यादातर मुकदमों में हार का सामना करना पड़ रहा है। अपर सचिव ऊर्जा की ओर से प्रबंध निदेशक को भेजे गए आदेश में हाल ही में हाईकोर्ट की ओर से उपनलकर्मियाें को ‘समान कार्य समान वेतन’ के मामले में दिए गए आदेश का हवाला दिया गया है। शासन का मानना है कि हाईकोर्ट व अन्य अदालतों में चल रहे मुकदमों में विभागीय अधिकारियों के स्तर पर ठोस पैरवी नहीं की जा रही है। अफसरों की इसी शिथिलता का परिणाम है कि ज्यादातर मामलों में यूपीसीएल के विपक्ष में फैसले जारी किए जा रहे हैं।
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शासन के निर्देश पर यदि आला अफसरों की समिति गठित कर जांच की जाती है तो न सिर्फ तमाम अफसरों की शिथिलता उजागर होगी, वरन इन अफसरों को विभागीय कार्रवाई का भी सामना करना पड़ेगा।
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उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों राज्य विद्युत नियामक आयोग ने जन शिकायत निवारण मंचों की ओर से सुनाए गए फैसलों पर नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की थी कि यूपीसीएफ अफसरों की लेटलतीफी व शिथिलता से ही विभाग को 4500 प्रकरणों में 3500 में यूपीसीएल के विरुद्ध फैसला सुनाया गया।