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Dehradun News: 280 लोगों ने एमडीडीए को दिए अपने भवनों के वैध होने के प्रमाण

Sat, 08 Jun 2024 03:58 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jun 2024 03:58 AM IST
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280 people gave proof of legality of their buildings to MDDA
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Iजांच के दौरान 120 लोगों के पास मिले हैं 2016 से पहले के कागजात
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I400 लोगों को जारी किए गए हैं नोटिस, अवैध कब्जों पर जल्द चल सकता है एमडीडीए का बुलडोजर
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I एमडीडीए के अधिकार क्षेत्र वाली मलिन बस्तियों में 280 लोगों ने अपने भवनों के वैध होने के प्रमाण और जवाब जमा कराए हैं। इनमें से 120 लोगों के पास 2016 से पहले काबिज होने के दस्तावेजी प्रमाण मिले हैं। जबकि 100 से अधिक लोगों के जवाब प्राप्त नहीं हुए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दो सप्ताह के भीतर एमडीडीए अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला सकता है।
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Iबता दें कि नदी किनारे किए गए अवैध कब्जों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने शासन और नगर निगम को कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। अब एनजीटी में सुनवाई से पहले कार्रवाई को लेकर भी दबाव है। ऐसे में नगर निगम की ओर से मलिन बस्तियाें में 11 मार्च 2016 के बाद किए गए कब्जों को हटाया जा रहा है। इस दौरान कार्रवाई की निष्पक्षता को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। उधर, नदियों के किनारे मलिन बस्तियों में दो बस्तियां एमडीडीए के अधिकार क्षेत्र में आ रही है। काठ बंगला और वीर गबर सिंह बस्ती का यह इलाका करीब पांच किलोमीटर दूरी का है। इसमें करीब 400 लोगों के कब्जे हैं। पिछले दिनों एमडीडीए ने सभी परिवारों को नोटिस जारी कर मार्च 2016 से पहले के रिहायशी होने के प्रमाण मांगे थे। अभी तक 280 लोगों ने प्रमाण जमा कराए हैं। जांच के दौरान इनमें से 120 लोगों के 2016 से पहले के बिजली-पानी के बिल आदि प्रमाण मिले हैं। अभी 100 अधिक लोगों ने जवाब नहीं दिए हैं। जल्द ही इन्हें लेकर भी स्थिति साफ हो जाएगी। लेकिन अभी तक जो जांच हुई है, उसके अनुसार अवैध कब्जों की संख्या 150 से अधिक पहुंच सकती है। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी। वहीं माना जा रहा है कि नगर निगम निगम के बाद अब अपने अधिकार क्षेत्र वाली मलिन बस्तियों में एमडीडीए बुलडोजर चला सकता है।
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Iजिन्होंने बिल ही संभालकर नहीं रखे उनका क्या
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Iमलिन बस्ती के गरीब लोगों के सामने दिक्कत यह है कि अधिकांश लोगों ने 2016 से पहले के बिल संभालकर नहीं रखे। अब पुराने बिलों को निकलवाने के लिए बिजली और जलसंस्थान के चक्कर काट रहे हैं तो उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। ऐसे में 2016 से पहले रह रहे लोगों को खुद को वैध साबित करने लिए भी दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।I
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