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उत्तराखंड छोड़ गईं 28 प्रजाति की चिड़ियां

Fri, 11 Sep 2015 11:53 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 11 Sep 2015 11:53 AM IST
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28 bird species left uttarakhand.

जिन चिड़ियों की चहचहाहट पर्वतीय साहित्य में गूंजती रही ऐसी 28 प्रजाति की चिड़ियां अपना उत्तराखंड का ‘घर’ छोड़ गई हैं।

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अंदेशा है कि जलवायु परिवर्तन से हिमालयी क्षेत्र के माहौल में आ रहा बदलाव इन्हें रास नहीं आया। वन विभाग ने अपनी नई चेक लिस्ट में इन्हें ‘डाउटफुल’ की श्रेणी में डाल दिया है।

वन विभाग ने उत्तराखंड के पक्षियों की पहली चेक लिस्ट वर्ष 2003 में तैयार की थी। इसमें 623 प्रजाति के पक्षियों की सूची थी। दूसरी चेक लिस्ट 2014 में बनी जो अब प्रकाशित हुई है। इसमें 693 पक्षियों की सूची है। प्रदेश में रह रहे 70 पक्षियों का नाम तो जुड़ गया है, लेकिन 28 पक्षी जो उत्तराखंड केसाहित्य का हिस्सा रहे हैं, वे अब नहीं मिल रहे हैं।
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पक्षियों पर आधारित जर्नल बर्ड लाइफ इंटरनेशनल ने वर्ष 2013 में आशंका जाहिर की थी कि मसूरी क्षेत्र के झड़ी पानी और नैनीताल में पाई जाने वाली हिमालयन क्वेल खत्म हो गई है।
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नई सूची में भी इस चिड़िया के संबंध में यही आशंका व्यक्त की गई है। मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) धनंजय मोहन का कहना है कि लापता 28 चिड़ियों के अलावा सूची में हिमालयन क्वेल समेत बेयर्स पोचर्ड, तीन प्रकार केगिद्ध-स्लेंडर बिल्ड वल्चर, व्हाइट रम्प्ड वल्चर, रेड हेडेड वल्चर केअस्तित्व को खतरा बताया गया है।


लापता चिड़िया
रेन क्वेल, किंग क्वेल, लेसर फ्लोरीकन, इंडियन कोर्सर, लिटिल गल, लिटिल टर्न, तिब्बतन सैंडग्रूज, यूरोपियन टर्टल डव, बार्रड कुकू डव, थिक बिल्ड ग्रीन पिजयन, इंडियन स्विफ्टलेट, सिल्वर ब्रेस्टेड ब्रॉडबिल, ग्रे चिन्नड मिनिवेट, यूरेशियन स्काईलार्क, स्लेटी बिलाइड टेसिया, रेडीज वार्बलर, यलो ब्राउड वार्बलर, थिक बिल्ड वार्बलर, बूटेड वार्बलर, ब्राउन बुश वार्बलर, कॉमन व्हाइट थ्रोट, फेरगनियस फ्लाई कैचर, कश्मीर फ्लाई कैचर, लार्ज निलटावा, तिब्बतन स्नो फिंच, फोरेस्ट  वॉगटेल, ब्लाइथ्स पिपिट, कॉर्न बंटिंग

पशु हो या पक्षी अगर उसे खाने की चीज नहीं मिलेगी तो वह वहां नहीं रहेगा। जहां भोजन मिलता उधर पशु-पक्षी चले जाते हैं।
- डॉ. वीबी माथुर, निदेशक भारतीय वन्य जीव संस्थान

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