{"_id":"5c48d134bdec225334437323","slug":"21548276020-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रक्षा संस्थानों के 6500 कर्मचारी हड़ताल पर गए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रक्षा संस्थानों के 6500 कर्मचारी हड़ताल पर गए
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। विभिन्न मांगों के लिए रक्षा संस्थानों के 6500 कर्मचारी बुधवार से हड़ताल पर चले गए हैं। तीन दिवसीय इस हड़ताल में देशभर के रक्षा संस्थानों से जुड़े करीब 10 लाख कर्मचारी शामिल हैं। देहरादून में आयुध निर्माणी, ऑप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री, आईआरडीई, डील और सीक्यूएआई के सभी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। विभिन्न संस्थानों के कर्मचारी सुबह पांच बजे से सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन कर केंद्र सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की।
संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित हड़ताल को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह हड़ताल न किसी महासंघ की है और न किसी यूनियन की। हड़ताल हम सभी के अस्तित्व को बचाने की है। एनपीएस को समाप्त कराने और पुरानी सुनिश्चित पेंशन योजना को लागू कराने के लिए है। उद्योगपतियों को फ ायदा पहुंचाने वाली केंद्र सरकार की नीतियों में परिवर्तन करवाना है। वक्ताओं ने कहा कि आयुध निर्माणियों में बनने वाले 275 उत्पादों को नॉन-कोर के नाम पर छीन लिया गया है। हथियार-गोला बारूद, युद्धक टैंकों, युद्धक वाहनों जैसे सामरिक महत्व वाले उत्पादों को निजी क्षेत्र में बनाया जा रहा है। ज्यादातर आयुध निर्माणियों में वर्कलोड बेहद कम हो चुका है, उन्हें बीमार उद्योग बनाने की कोशिश की जा रही है।
रक्षा राज्यमंत्री की ओर से ईएमई के अधीन 29 स्टेशन वर्कशॉप को बंद करने की तिथि घोषित कर दी है। आठ आर्मीबेस वर्कशॉप को गोको-मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र को सौंपने और डीजीओएस के अधीन चार भंडारगृहों को बंद करने की तिथियों की भी घोषणा राज्यसभा में हो चुकी है। डीआरडीओ, डीजीक्यूए, एमईएस, नेवी, एयरफ ोर्स में स्थायी कर्मचारियों की जगह ठेके पर कार्य कराया जा रहा है। रक्षा संस्थानों में भर्तियां नहीं की जा रही हैं। इसके साथ ही एक जनवरी 2004 और उसके बाद भर्ती कर्मचारियों से सामाजिक सुरक्षा के रूप में मिलने वाली सुनिश्चित पेंशन को छीन लिया गया है। उनके वेतन से अंशदान के रूप में काटे जाने वाली राशि को सटोरियों के हवाले कर दिया गया है। एनपीएस के तहत सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों को 700 रुपये से 2000 रुपये तक पेंशन के रूप में दी जा रही है। वृद्धावस्था में इतनी राशि से जीवन यापन करना बेहद असंभव है। इस दौरान संयुक्त संघर्ष समिति से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों ने हड़ताल को पूर्ण समर्थन देते हुए तीन दिन तक काम पर न आने का निर्णय लिया।
विज्ञापन
मौके पर अनिल उनियाल, इंदर सिंह, उमाशंकर शर्मा, रवि किशोर शर्मा, कलीम अहमद, विश्वनाथ गौड़, नीरज शर्मा, अजय पाल, संजीव मवाल, आरडी सेमवाल, सुभाष कुमार, चेतन जखमोला, तरुण उपाध्याय, कैलाश चंद, देवेंद्र सिंह, राजवीर, योगेंद्र पाल सिंह, योगेश सैनी, डीके त्यागी, सुदेश कुमार, रमन, कपिल, सुमन, राकेश आदि मौजूद रहे।
हजारों कर्मचारियों के पास नहीं है काम
कर्मचारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार मेक इन इंडिया के नाम पर देशभर में 41 आयुध निर्माणियों समेत सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य संस्थानों में 100 फीसदी एफडीआई ला रही है। एकतरफा निर्णय लेते हुए 675 डिफेंस प्रोडक्टस में से 475 प्रोडक्ट्स को नॉन कोर घोषित कर निजी क्षेत्रों में देने का निर्णय लिया गया है। जिसकी वजह से हजारों कर्मचारियों के पास काम नहीं रह गया है। इससे सैकड़ों लघु उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं।
विज्ञापन
देहरादून। विभिन्न मांगों के लिए रक्षा संस्थानों के 6500 कर्मचारी बुधवार से हड़ताल पर चले गए हैं। तीन दिवसीय इस हड़ताल में देशभर के रक्षा संस्थानों से जुड़े करीब 10 लाख कर्मचारी शामिल हैं। देहरादून में आयुध निर्माणी, ऑप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री, आईआरडीई, डील और सीक्यूएआई के सभी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। विभिन्न संस्थानों के कर्मचारी सुबह पांच बजे से सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन कर केंद्र सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की।
संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित हड़ताल को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह हड़ताल न किसी महासंघ की है और न किसी यूनियन की। हड़ताल हम सभी के अस्तित्व को बचाने की है। एनपीएस को समाप्त कराने और पुरानी सुनिश्चित पेंशन योजना को लागू कराने के लिए है। उद्योगपतियों को फ ायदा पहुंचाने वाली केंद्र सरकार की नीतियों में परिवर्तन करवाना है। वक्ताओं ने कहा कि आयुध निर्माणियों में बनने वाले 275 उत्पादों को नॉन-कोर के नाम पर छीन लिया गया है। हथियार-गोला बारूद, युद्धक टैंकों, युद्धक वाहनों जैसे सामरिक महत्व वाले उत्पादों को निजी क्षेत्र में बनाया जा रहा है। ज्यादातर आयुध निर्माणियों में वर्कलोड बेहद कम हो चुका है, उन्हें बीमार उद्योग बनाने की कोशिश की जा रही है।
विज्ञापन
रक्षा राज्यमंत्री की ओर से ईएमई के अधीन 29 स्टेशन वर्कशॉप को बंद करने की तिथि घोषित कर दी है। आठ आर्मीबेस वर्कशॉप को गोको-मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र को सौंपने और डीजीओएस के अधीन चार भंडारगृहों को बंद करने की तिथियों की भी घोषणा राज्यसभा में हो चुकी है। डीआरडीओ, डीजीक्यूए, एमईएस, नेवी, एयरफ ोर्स में स्थायी कर्मचारियों की जगह ठेके पर कार्य कराया जा रहा है। रक्षा संस्थानों में भर्तियां नहीं की जा रही हैं। इसके साथ ही एक जनवरी 2004 और उसके बाद भर्ती कर्मचारियों से सामाजिक सुरक्षा के रूप में मिलने वाली सुनिश्चित पेंशन को छीन लिया गया है। उनके वेतन से अंशदान के रूप में काटे जाने वाली राशि को सटोरियों के हवाले कर दिया गया है। एनपीएस के तहत सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों को 700 रुपये से 2000 रुपये तक पेंशन के रूप में दी जा रही है। वृद्धावस्था में इतनी राशि से जीवन यापन करना बेहद असंभव है। इस दौरान संयुक्त संघर्ष समिति से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों ने हड़ताल को पूर्ण समर्थन देते हुए तीन दिन तक काम पर न आने का निर्णय लिया।
विज्ञापन
मौके पर अनिल उनियाल, इंदर सिंह, उमाशंकर शर्मा, रवि किशोर शर्मा, कलीम अहमद, विश्वनाथ गौड़, नीरज शर्मा, अजय पाल, संजीव मवाल, आरडी सेमवाल, सुभाष कुमार, चेतन जखमोला, तरुण उपाध्याय, कैलाश चंद, देवेंद्र सिंह, राजवीर, योगेंद्र पाल सिंह, योगेश सैनी, डीके त्यागी, सुदेश कुमार, रमन, कपिल, सुमन, राकेश आदि मौजूद रहे।
हजारों कर्मचारियों के पास नहीं है काम
कर्मचारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार मेक इन इंडिया के नाम पर देशभर में 41 आयुध निर्माणियों समेत सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य संस्थानों में 100 फीसदी एफडीआई ला रही है। एकतरफा निर्णय लेते हुए 675 डिफेंस प्रोडक्टस में से 475 प्रोडक्ट्स को नॉन कोर घोषित कर निजी क्षेत्रों में देने का निर्णय लिया गया है। जिसकी वजह से हजारों कर्मचारियों के पास काम नहीं रह गया है। इससे सैकड़ों लघु उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं।