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शिक्षकों के समायोजन के फैसले का विरोध
Updated Fri, 10 Aug 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
पहाड़ में 10 और मैदान में 15 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में केवल एक शिक्षक तैनात करने के शासनादेश का राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध किया है। संघ पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को निदेशक आरके कुंवर को ज्ञापन भेजकर कहा कि प्रदेश सरकार के इस फैसले से सरकारी शिक्षा और स्कूलों को नुकसान होगा।
कुछ दिन पूर्व जारी आदेश में सरकार ने स्कूलों और शिक्षकों के समायोजन के निर्देश दिए थे। इसके तहत कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का विलीनीकरण और शिक्षकों का समायोजन किया जाना है। प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव दिग्विजय सिंह चौहान ने कहा कि एक तरफ सरकार शिक्षा के स्तर को उठाने का दावा करती है वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की संख्या कम करने जैसा गलत फैसला करती है। आरटीई के मानकों का हवाला देकर प्रारंभिक शिक्षा को बर्बाद किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से राज्य में शिक्षक बनने की योग्यता रखने वाले हजारों बेरोजगारों को भी नुकसान होगा। जिन लोगों ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाया है, उनका विश्वास भी घटेगा। उन्होंने सरकार से फैसला वापस लेने का अनुरोध किया है। शिक्षक नेताओं ने कहा कि ऐसा न होने पर संघ कोर्ट की शरण लेगा। उन्होंने बताया कि सभी जिलों के शिक्षकों ने इस निर्णय का विरोध किया है।
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जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ भी नाराज
शासनादेश के नियमों से जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ भी नाराज है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा, महामंत्री राजेंद्र बहुगुणा और कोषाध्यक्ष सतीश घिल्डियाल ने कहा कि यह फैसला प्रदेश के गरीब और अपवंचित बच्चों को शिक्षा से दूर करने वाला है। साथ ही इससे नौकरी की राह ताक रहे प्रशिक्षित बेरोजगारों और पदोन्नति चाहने वाले शिक्षकों को भी नुकसान होगा।
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पहाड़ में 10 और मैदान में 15 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में केवल एक शिक्षक तैनात करने के शासनादेश का राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध किया है। संघ पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को निदेशक आरके कुंवर को ज्ञापन भेजकर कहा कि प्रदेश सरकार के इस फैसले से सरकारी शिक्षा और स्कूलों को नुकसान होगा।
कुछ दिन पूर्व जारी आदेश में सरकार ने स्कूलों और शिक्षकों के समायोजन के निर्देश दिए थे। इसके तहत कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का विलीनीकरण और शिक्षकों का समायोजन किया जाना है। प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव दिग्विजय सिंह चौहान ने कहा कि एक तरफ सरकार शिक्षा के स्तर को उठाने का दावा करती है वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की संख्या कम करने जैसा गलत फैसला करती है। आरटीई के मानकों का हवाला देकर प्रारंभिक शिक्षा को बर्बाद किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि इस फैसले से राज्य में शिक्षक बनने की योग्यता रखने वाले हजारों बेरोजगारों को भी नुकसान होगा। जिन लोगों ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाया है, उनका विश्वास भी घटेगा। उन्होंने सरकार से फैसला वापस लेने का अनुरोध किया है। शिक्षक नेताओं ने कहा कि ऐसा न होने पर संघ कोर्ट की शरण लेगा। उन्होंने बताया कि सभी जिलों के शिक्षकों ने इस निर्णय का विरोध किया है।
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जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ भी नाराज
शासनादेश के नियमों से जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ भी नाराज है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा, महामंत्री राजेंद्र बहुगुणा और कोषाध्यक्ष सतीश घिल्डियाल ने कहा कि यह फैसला प्रदेश के गरीब और अपवंचित बच्चों को शिक्षा से दूर करने वाला है। साथ ही इससे नौकरी की राह ताक रहे प्रशिक्षित बेरोजगारों और पदोन्नति चाहने वाले शिक्षकों को भी नुकसान होगा।