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राजाजी नेशनल पार्क से 21 वन कर्मी हो गए ‘लापता’

Sat, 27 May 2017 09:41 AM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 27 May 2017 09:41 AM IST
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21 forest workers are missing in rajaji national park
rajaji national park

राजाजी नेशनल पार्क से 21 वन कर्मी लापता हैं। इन कर्मियों के संबंध में पार्क प्रबंधन ने खोजबीन कराई, तो किसी भी रेंज में उनकी उपस्थिति और तैनाती नहीं मिली है। इसकी रिपोर्ट वन मुख्यालय को भेजी गई है।

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2015 में राजाजी नेशनल पार्क में दैनिक श्रमिक(सामयिक कर्मकार) को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसमें पार्क के विभिन्न रेंजों में कार्यरत दैनिक श्रमिकों को वन आरक्षी बनाया जाना था। लेकिन, राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक ने 2016 में भर्ती का तय समय निकल जाने और प्रथमदृष्टया अभिलेखों के संदिग्ध होने की आशंका के चलते भर्ती रोक दी थी।
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तब इन कर्मियों को पार्क के विभिन्न रेंजों में तैनात और कार्यरत होना बताया गया था। उसके बाद संबंधित कर्मियों की खोजबीन शुरू की गई। पार्क निदेशक सनातन ने बताया कि जिन्हें 21 दैनिक श्रमिक बताया जा रहा था, उनके संबंध में सभी वन क्षेत्राधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।

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हाईकोर्ट ने दिए थे वन आरक्षी बनाने के आदेश

21 forest workers are missing in rajaji national park
rajaji national park

वन क्षेत्राधिकारियों के अनुसार यह सभी कर्मी किसी भी कंपार्टमेंट पर कार्यरत नहीं है। जबकि उनके भर्ती से जुड़े अभिलेख कथित तौर पर दैनिक श्रमिक होना बता रहे थे। इस मामले में वन मुख्यालय को अवगत कराने के साथ आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। 

वन विभाग में दैनिक भत्ता पर कार्यरत सामयिक कर्मकारों को वन आरक्षी बनाने के लिए हाईकोर्ट ने 2003 में आदेश जारी किया था। इसके बाद निश्चित शर्त और मानकों को पूरा करने वाले कर्मियों को विनियमितीकरण प्रक्रिया के तहत कार्रवाई शुरू की गई। इसमें जो हाईस्कूल पास कर्मी थी, उनको वन आरक्षी के पद पर नियमित भर्ती दी गई। 

जो हाईस्कूल पास नहीं थे, उनको चाराकटर, महावत, अर्दली, बंगला चौकीदार जैसे पदों पर नियमित किया गया। करीब 1200 दैनिक श्रमिकों को विभिन्न पदों पर तैनाती दी गई थी। जून-2016 तक नियमित करने की प्रक्रिया चली। इसके बाद रोक लग गई। लेकिन, राजाजी नेशनल पार्क में जिन 21 लोगों को दैनिक श्रमिक(सामयिक कर्मकार) बताया जा रहा था, वन क्षेत्राधिकारियों को उनके संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

2013 में दैनिक श्रमिकों को वन आरक्षी बनाया गया था। इस भर्ती में फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल की शिकायत हुई थी। इसके बाद छह वन आरक्षियों की भर्ती के मामले की जांच शुरू हुई। इसमें चार कर्मियों को 2016 में बर्खास्त कर दिया गया। एक का मामला कोर्ट में पहुंचा। एक वन आरक्षी की भर्ती की जांच हो रही है। 

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