{"_id":"5b1845344f1c1bb26e8b6a48","slug":"191528317236-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीपीआरआई के विशेषकों ने की फुंके ट्रांसफार्मर की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीपीआरआई के विशेषकों ने की फुंके ट्रांसफार्मर की जांच
Updated Thu, 07 Jun 2018 02:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के झाझरा स्थित पावर सब स्टेशन में पिछले साल फुंके 80 एमवीए ट्रांसफार्मर की जांच के लिए सेंट्रल पॉवर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई) बंगलूरू की टीम दून पहुंच गई है। सीपीआरआई के विशेषज्ञों ने पिटकुल और ट्रांसफार्मर आपूर्ति करने वाली कंपनी के अधिकारियों के साथ फुंके ट्रांसफार्मर की जांच की।
वहीं, सीपीआरआई की जांच से उन अधिकारियों और अभियंताओं की चिंता बढ़ गई है, जिन्हें मामले में आरोप पत्र जारी किया गया है। सूत्रों का कहना है कि मामले की निष्पक्षता से जांच की गई तो कई अभियंताओं की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है। 15 मार्च 2017 को निजी कंपनी से लेकर लगाया गया करोड़ों का ट्रांसफार्मर उर्जीकृत करते समय फुंक गया था। अफसरों मुताबिक, घटिया ट्रांसफार्मर होने से पिटकुल को नुकसान झेलना पड़ा। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। इसमें आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट के विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। उन्होंने ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए सीपीआरआई के तकनीकी विशेषज्ञों से इसकी जांच कराने की बात कही। पिटकुल के प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने बताया कि बुधवार को मोबाइल लैब के साथ सीपीआरआई के विशेषज्ञों ने ट्रांसफार्मर की जांच की। अब सीपीआरआई की रिपोर्ट का इंतजार है।
--
12 अभियंताओं को जारी किया गया है आरोप पत्र
मामले में पिटकुल के कई मुख्य अभियंता समेत 12 अभियंताओं को आरोप पत्र जारी किया जा चुका है। आरोपी अभियंताओं ने बयान भी दर्ज करा दिए हैं। उनके उत्तरों के परीक्षण एवं मूल्यांकन के लिए यूपीसीएल के निदेशक परिचालन अतुल अग्रवाल और पिटकुल के निदेशक (वित्त) आशीष कुमार की अगुवाई में विशेषज्ञों की जांच टीम गठित की गई है। उधर, सूत्रों का कहना है कि प्रकरण में आरोपी अफसरों और अभियंताओं को विभागीय स्तर पर बचाने की कवायद शुरू हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के झाझरा स्थित पावर सब स्टेशन में पिछले साल फुंके 80 एमवीए ट्रांसफार्मर की जांच के लिए सेंट्रल पॉवर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई) बंगलूरू की टीम दून पहुंच गई है। सीपीआरआई के विशेषज्ञों ने पिटकुल और ट्रांसफार्मर आपूर्ति करने वाली कंपनी के अधिकारियों के साथ फुंके ट्रांसफार्मर की जांच की।
वहीं, सीपीआरआई की जांच से उन अधिकारियों और अभियंताओं की चिंता बढ़ गई है, जिन्हें मामले में आरोप पत्र जारी किया गया है। सूत्रों का कहना है कि मामले की निष्पक्षता से जांच की गई तो कई अभियंताओं की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है। 15 मार्च 2017 को निजी कंपनी से लेकर लगाया गया करोड़ों का ट्रांसफार्मर उर्जीकृत करते समय फुंक गया था। अफसरों मुताबिक, घटिया ट्रांसफार्मर होने से पिटकुल को नुकसान झेलना पड़ा। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। इसमें आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट के विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। उन्होंने ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए सीपीआरआई के तकनीकी विशेषज्ञों से इसकी जांच कराने की बात कही। पिटकुल के प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने बताया कि बुधवार को मोबाइल लैब के साथ सीपीआरआई के विशेषज्ञों ने ट्रांसफार्मर की जांच की। अब सीपीआरआई की रिपोर्ट का इंतजार है।
विज्ञापन
--
12 अभियंताओं को जारी किया गया है आरोप पत्र
मामले में पिटकुल के कई मुख्य अभियंता समेत 12 अभियंताओं को आरोप पत्र जारी किया जा चुका है। आरोपी अभियंताओं ने बयान भी दर्ज करा दिए हैं। उनके उत्तरों के परीक्षण एवं मूल्यांकन के लिए यूपीसीएल के निदेशक परिचालन अतुल अग्रवाल और पिटकुल के निदेशक (वित्त) आशीष कुमार की अगुवाई में विशेषज्ञों की जांच टीम गठित की गई है। उधर, सूत्रों का कहना है कि प्रकरण में आरोपी अफसरों और अभियंताओं को विभागीय स्तर पर बचाने की कवायद शुरू हो गई है।
विज्ञापन