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सीएमओ के संज्ञान के बगैर नहीं होंगे डाक्टरों के तबादले
Updated Sat, 13 Jan 2018 01:33 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
प्रदेश में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के संज्ञान के बगैर अब डाक्टरों के तबादले नहीं होंगे। सीएमओ से परामर्श के बाद ही शासन स्तर से डाक्टरों के तबादले किए जाएंगे। वहीं, बिना सूचना लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे डाक्टरों की सेवाएं समाप्त की जाएगी। शुक्रवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय में राज्य भर से आए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक में स्वास्थ्य सचिव नितेश कुमार झा ने अधिकारियों को इसके निर्देश दिए।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि चिकित्सकों की तैनाती के लिए जनपद स्तर पर डाक्टरों की आवश्यकता का आंकलन करना होगा एवं भविष्य में इनकी तैनाती सीएमओ से परामर्श के बाद ही शासन द्वारा की जाएगी। कुछ अधिकारियों के डाक्टरों की कमी की समस्या उठाए जाने पर स्वास्थ्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बैठक स्वास्थ्य विभाग में सुधार को लेकर बुलाई गई है, लेकिन अधिकारियों को संविदा और अनुबंधित डाक्टरों की सही सूचना तक नही है। उन्होंने कहा कि संविदा और अनुबंधित डाक्टरों की सही सूचना तैयार की जाए, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के अनुसार उपकरण क्रय किए जाएं एवं शासन की ओर से जारी बजट का समय पर वरीयता के अनुसार उपयोग किया जाएं। बैठक में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, ई रक्तकोष, ई हॉस्पिटल संचालन पर भी चर्चा की गई और समस्त जनपदों को निर्देशित किया गया कि इन व्यवस्थाओं को जल्द शुरू करने का प्रयास करें। ताकि प्रत्येक जनपद में एक अस्पताल ई ऑस्पिटल पद्धति के अनुसार संचालित हो सके। बैठक में 108 आपात कालीन सेवा, सीएम की घोषणा के अनुसार समस्त जनपदों में आईसीयू विकसित करने पर भी चर्चा की गई। क्लीनिकल स्टेब्लिसमेंट एक्ट पर कहा गया कि इसे लागू करने से पहले आईएमए सदस्यों से विचार विमर्श कर इसे अंतिम रूप दिया जाए। बैठक में स्वास्थ्य मिशन के निदेशक युगल किशोर पंत, स्वास्थ्य महानिदेशक डा. अर्चना श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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प्रदेश में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के संज्ञान के बगैर अब डाक्टरों के तबादले नहीं होंगे। सीएमओ से परामर्श के बाद ही शासन स्तर से डाक्टरों के तबादले किए जाएंगे। वहीं, बिना सूचना लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे डाक्टरों की सेवाएं समाप्त की जाएगी। शुक्रवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय में राज्य भर से आए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक में स्वास्थ्य सचिव नितेश कुमार झा ने अधिकारियों को इसके निर्देश दिए।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि चिकित्सकों की तैनाती के लिए जनपद स्तर पर डाक्टरों की आवश्यकता का आंकलन करना होगा एवं भविष्य में इनकी तैनाती सीएमओ से परामर्श के बाद ही शासन द्वारा की जाएगी। कुछ अधिकारियों के डाक्टरों की कमी की समस्या उठाए जाने पर स्वास्थ्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बैठक स्वास्थ्य विभाग में सुधार को लेकर बुलाई गई है, लेकिन अधिकारियों को संविदा और अनुबंधित डाक्टरों की सही सूचना तक नही है। उन्होंने कहा कि संविदा और अनुबंधित डाक्टरों की सही सूचना तैयार की जाए, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के अनुसार उपकरण क्रय किए जाएं एवं शासन की ओर से जारी बजट का समय पर वरीयता के अनुसार उपयोग किया जाएं। बैठक में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, ई रक्तकोष, ई हॉस्पिटल संचालन पर भी चर्चा की गई और समस्त जनपदों को निर्देशित किया गया कि इन व्यवस्थाओं को जल्द शुरू करने का प्रयास करें। ताकि प्रत्येक जनपद में एक अस्पताल ई ऑस्पिटल पद्धति के अनुसार संचालित हो सके। बैठक में 108 आपात कालीन सेवा, सीएम की घोषणा के अनुसार समस्त जनपदों में आईसीयू विकसित करने पर भी चर्चा की गई। क्लीनिकल स्टेब्लिसमेंट एक्ट पर कहा गया कि इसे लागू करने से पहले आईएमए सदस्यों से विचार विमर्श कर इसे अंतिम रूप दिया जाए। बैठक में स्वास्थ्य मिशन के निदेशक युगल किशोर पंत, स्वास्थ्य महानिदेशक डा. अर्चना श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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