उत्तराखंड के 1800 प्राइमरी स्कूल होंगे बंद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में करीब 1800 प्राइमरी स्कूलों पर अगले शिक्षा सत्र से ताला लगने जा रहा है। छात्र संख्या 10 से कम होने के कारण इन स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी है। इसके लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में इस समय पांच लाख 56 हजार छात्र हैं। असहायतित और सहायता प्राप्त विद्यालयों के बच्चों की संख्या जोड़ने पर यह संख्या करीब साढ़े दस लाख हो जाएगी। प्रदेश में कुल मिलाकर 15428 प्राथमिक विद्यालय हैं।
शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक इनमें से करीब 1800 स्कूल ऐसे हैं जिनमें छात्र संख्या 10 या इससे कम है। इसे देखते हुए इन स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी है।
बंद होने वाले प्राइमरी स्कूलों के छात्रों को दो-तीन गांवों के बीच के स्कूल में समायोजित किया जाएगा। ब्लॉक मुख्यालयों में नवोदय की तर्ज पर आवासीय विद्यालय भी बनाने की योजना चल रही है।
मर्ज स्कूलों के छात्रों को मिलेगा नया विद्यालय
मर्ज किए जाने वाले स्कूलों के छात्रों को इन आवासीय विद्यालयों में भी जगह दी जा सकती है। हालांकि, इसमें चुनौती यह भी है कि स्कूल छात्रों के लिए अधिक दूरी पर न हो। ऐसे में मर्ज किए जाने वाले स्कूलों का पूरा प्लान शिक्षा विभाग को तैयार करना पड़ रहा है।
बोले शिक्षा मंत्री
स्कूलों में छात्र संख्या कम होने के कारण यह फैसला किया गया है। इन स्कूलों के बच्चों को किसी अन्य स्कूल में समायोजित करने के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। इसके लिए पैनल गठित करने का निर्देश दिया गया है।
-मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री
संख्या कम होने के कारण
- पहाड़ से परिवारों का पलायन
- सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी
- निजी स्कूलों की तरफ बढ़ता रुझान
- गुणवत्ता परक शिक्षा दिलाने की चाहत
- अंग्रेजी शिक्षा के प्रति आकर्षण