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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के लिए देहरादून में भी नहीं मिली जमीन
Tue, 30 Apr 2019 08:33 AM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 30 Apr 2019 08:33 AM IST
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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के लिए देहरादून में भी जमीन नहीं मिली है। संस्थान के लिए 200 से 250 एकड़ जमीन की जरूरत है, जिसको लेकर शासन ने देहरादून जिले में जमीन उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन को कहा था। लेकिन, जिले में ऐसी जमीन नहीं है जो संस्थान के निर्माण के लिए माकूल हो। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से जमीन की अनुपलब्धता संबंधी उत्तर शासन को भेजा गया है।
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इससे पहले एनआईटी के लिए श्रीनगर के सुमाड़ी में जमीन तलाशी गई थी, मगर वहां आने जाने की सुगमता नहीं होने के कारण इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया। इसके बाद दो माह पूर्व इसी जमीन का प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन अब भी वहां कई पेंच फंसे हैं। ऐसे में गत 26 अप्रैल को अपर मुख्य सचिव तकनीकी शिक्षा की ओर से देहरादून जिले में जलापूर्ति और आवागमन की व्यवस्था वाली 200-250 एकड़ (1000-1250 बीघा) भूमि का चयन करने को कहा था। इसका जल्द से जल्द प्रस्ताव शासन को भेजने को कहा गया था। जिला प्रशासन ने संस्थान के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश की तो पता चला कि जिले में कहीं ऐसी जमीन नहीं है।
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जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने बताया कि सभी उप जिलाधिकारी और तहसीलदारों से भूमि की उपलब्धता के लिए आख्या मांगी गई थी। सोमवार को उपजिलाधिकारी विकासनगर, तहसीलदार ऋषिकेश, डोईवाला देहरादून, कालसी, चकराता, त्यूनी की ओर से इस संबंध में प्रशासन को पत्र प्राप्त हो गए हैं। इस संबंध में सोमवार को ही शासन को अवगत करा दिया गया है कि जिले में संस्थान के लिए उपयुक्त कोई जमीन नहीं है।
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अस्थाई तौर पर पॉलीटेक्निक श्रीनगर में चल रहा संस्थान
लगभग एक दशक से एनआईटी जैसा महत्वपूर्ण संस्थान अस्थाई तौर पर पॉलीटेक्निक श्रीनगर के कैंपस में संचालित हो रहा है। सरकार को अब तक इसके लिए कहीं जगह नहीं मिली है। पिछले दिनों छात्रों ने भी प्रदर्शन कर जल्द से जल्द संस्थान के लिए भूमि तलाशने की मांग की थी।
पहले बांटी कौड़ियों के भाव अब ढूंढे नहीं मिल रही जमीन
राज्य गठन के बाद सरकारी जमीनें कौड़ियों के भाव बांटी गईं। यहां प्राइवेट संस्थानों ने भी खूब सरकारी जमीनें खरीदीं थीं। खराब भूमि प्रबंधन के कारण ही अब सरकार को ढूंढे जमीन नहीं मिल रहीं है। एनआईटी जैसा महत्वपूर्ण संस्थान भी इसी कुप्रबंधन की भेंट चढ़ने को तैयार है। जानकारों की माने तो यदि उस वक्त ध्यान रखा जाता तो आज यह स्थिति पैदा न हुई होती।