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68 लाख खर्च कर पुराने ढर्रे पर आया जल संस्थान
Updated Mon, 03 Dec 2018 12:35 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
शहरी विकास विभाग की ओर से 68 लाख रुपये खर्च कराकर शहर के आठ ट्यूबवेलों में लगाए गए क्लोरीन गैस सिलिंडर एक महीने बाद ही ठप हो गए हैं। इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद विभाग अपने पुराने ढर्रे पर आ गया है। वहीं विभागीय अधिकारी अपने बचाव में तरह-तरह के बहाने के लगा रहे हैं।
दो साल पूर्व शहरी विकास विभाग की ओर से शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए चार नए ओवरहैड टैंकों का निर्माण किया गया था। इसके बाद कार्यदायी संस्था एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) ने शहर रामनगर, आवास विकास, मकतूलपुरी, इंदिरा पार्क, आदर्शनगर, पड़ाव, गांधी वाटिका-एक और दो में बने ओवरहैड टैंकों पर क्लोरीन गैस सिलिंडर लगाए गए थे। प्रत्येक गैस सिलिंडर को लगाने में करीब 8.50 लाख रुपये की लागत आई थी। ऐसे में आठ ओवरहैड टैंकों पर सिलिंडर लगाने में शहरी विकास विभाग का 68 लाख रुपया खर्च हुआ था। अप्रैल 2018 को एडीबी की ओर से क्लोरीन गैस सिलिंडरों की जांच कर जल संस्थान के सुपुर्द कर दिए गए थे। मगर गैस सिलिंडर चलने के एक एक महीने बाद ही बंद कर दिए गए। बताया जा रहा है कि ट्यूबवेलों में लगे सिलिंडर खाली होने के बाद जल संस्थान ने रिफिल के खर्च से बचने के लिए इन सिलिंडरों का संचालन बंद कर दिया। जबकि एडीबी ने जल संस्थान को आठ अन्य कुल 16 सिलिंडर दिए थे। अब सिलिंडर मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं, जबकि जल संस्थान पुराने ढर्रे पर लौट आया है। सिलिंडरों की स्थिति को जानने के लिए जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एससी शर्मा को फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
जब एडीबी की ओर से क्लोरीन गैस सिलिंडर जल संस्थान के हैंडओवर किए गए थे, उसके बाद लोगों ने पानी में बदबू आने की शिकायत की थी, उसके बाद से सभी ट्यूबवेलों से गैस क्लोरीन को बंद कर लिक्विड क्लोरीन डाला जा रहा है।
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-राजेश निर्वाल, जलकल अभियंता जलसंस्थान रुड़की
एडीबी की ओर से आठ ट्यूबवेलों पर जो क्लोरीन गैस सिलिंडर लगाए गए थे, एक गैस सिलिंडर लगाने में करीब 8.50 लाख रुपये खर्च हुए, अप्रैल 2018 में इन्हें जल संस्थान के हैंडओवर कर दिया गया। सिलिंडरों की रिफिल से बचने के लिए जलसंस्थान ने बंद किया होगा। एडीबी की ओर से उन्हें कुल 16 सिलिंडर दिए गए थे।
-पवन टोलिया, अपर सहायक अभियंता एडीबी रुड़की
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शहरी विकास विभाग की ओर से 68 लाख रुपये खर्च कराकर शहर के आठ ट्यूबवेलों में लगाए गए क्लोरीन गैस सिलिंडर एक महीने बाद ही ठप हो गए हैं। इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद विभाग अपने पुराने ढर्रे पर आ गया है। वहीं विभागीय अधिकारी अपने बचाव में तरह-तरह के बहाने के लगा रहे हैं।
दो साल पूर्व शहरी विकास विभाग की ओर से शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए चार नए ओवरहैड टैंकों का निर्माण किया गया था। इसके बाद कार्यदायी संस्था एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) ने शहर रामनगर, आवास विकास, मकतूलपुरी, इंदिरा पार्क, आदर्शनगर, पड़ाव, गांधी वाटिका-एक और दो में बने ओवरहैड टैंकों पर क्लोरीन गैस सिलिंडर लगाए गए थे। प्रत्येक गैस सिलिंडर को लगाने में करीब 8.50 लाख रुपये की लागत आई थी। ऐसे में आठ ओवरहैड टैंकों पर सिलिंडर लगाने में शहरी विकास विभाग का 68 लाख रुपया खर्च हुआ था। अप्रैल 2018 को एडीबी की ओर से क्लोरीन गैस सिलिंडरों की जांच कर जल संस्थान के सुपुर्द कर दिए गए थे। मगर गैस सिलिंडर चलने के एक एक महीने बाद ही बंद कर दिए गए। बताया जा रहा है कि ट्यूबवेलों में लगे सिलिंडर खाली होने के बाद जल संस्थान ने रिफिल के खर्च से बचने के लिए इन सिलिंडरों का संचालन बंद कर दिया। जबकि एडीबी ने जल संस्थान को आठ अन्य कुल 16 सिलिंडर दिए थे। अब सिलिंडर मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं, जबकि जल संस्थान पुराने ढर्रे पर लौट आया है। सिलिंडरों की स्थिति को जानने के लिए जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एससी शर्मा को फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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जब एडीबी की ओर से क्लोरीन गैस सिलिंडर जल संस्थान के हैंडओवर किए गए थे, उसके बाद लोगों ने पानी में बदबू आने की शिकायत की थी, उसके बाद से सभी ट्यूबवेलों से गैस क्लोरीन को बंद कर लिक्विड क्लोरीन डाला जा रहा है।
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-राजेश निर्वाल, जलकल अभियंता जलसंस्थान रुड़की
एडीबी की ओर से आठ ट्यूबवेलों पर जो क्लोरीन गैस सिलिंडर लगाए गए थे, एक गैस सिलिंडर लगाने में करीब 8.50 लाख रुपये खर्च हुए, अप्रैल 2018 में इन्हें जल संस्थान के हैंडओवर कर दिया गया। सिलिंडरों की रिफिल से बचने के लिए जलसंस्थान ने बंद किया होगा। एडीबी की ओर से उन्हें कुल 16 सिलिंडर दिए गए थे।
-पवन टोलिया, अपर सहायक अभियंता एडीबी रुड़की