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एनएच 74 घोटाला: दो आईएएस अफसरों पर कार्रवाई होगी
Updated Sun, 05 Aug 2018 02:40 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-74 के मुआवजा घोटाले की एसआईटी जांच के घेरे में आए दो आईएएस अफसर पंकज और चंद्रेश की जरा-सी भी लिप्तता पाई तो उनपर कार्रवाई तय मानी जा रही है। ऐसा करके सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस का संदेश देना चाहती है। इस घोटाले में अभी तक जिन अफसरों पर गाज गिरी है, विपक्ष उन्हें छोटी मछली बताकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाता रहा है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह का कहना है कि दोनों अफसरों को एक हफ्ते में जवाब देना है। जवाब पर विचार के बाद शासन विधि सम्मत कार्रवाई करेगा। उधर, शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने फिर दोहराया कि घोटाले में जो भी दोषी होगा, चाहे बड़ा हो या छोटा उसे नहीं बख्शा नहीं जाएगा।
सूत्रों से मुताबिक एनएच घोटाले के मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का भी रुख एकदम साफ है। दो आईएएस अफसरों के मामले में वह कोई नरमी दिखाने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि शासन स्तर पर दोनों अफसरों के मामले में यदि परिस्थितिजन्य साक्ष्य उनके खिलाफ आए तो उन पर कार्रवाई होने से कोई नहीं रोक पाएगा। एनएच घोटाले के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए आठ में से सात पीसीएस अफसर निलंबित हैं। इनमें से एक सेवानिवृत्त है। अब दो आईएएस अफसर भी जांच के लपेटे में आ गए तो सरकार पर यह सवाल उठने शुरू हो गया कि इनके मामले में तेजी से एक्शन क्यों नहीं हो रहा। यह सवाल जब मुख्य सचिव से उठा तो उन्होंने कार्रवाई के मामले में भेदभाव से साफ इंकार किया। उन्होंने कहा कि जो तथ्य सामने आते हैं, उसके तहत ही गुण-दोष पर निर्णय लिया जाता है।
इनसेट
नोटिस गोपनीय है, नाम नहीं बता सकते
एसआईटी जांच में जिन दो आईएएस अफसरों के खिलाफ साक्ष्य मिले हैं, क्या वे तत्कालीन आर्बिट्रेटर रहे डॉ. पंकज पांडेय और चंद्रेश यादव हैं? इस प्रश्न के जवाब में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा, ‘चूंकि दोनों को गोपनीय नोटिस जारी किया गया है, इसलिए मेरे स्तर से उनके नाम लेना उचित नहीं है।’ अलबत्ता उन्होंने यह जरूर माना कि पिछले एक साल से अधिक समय से एसआईटी जांच में दो अफसरों के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिली है। उन्हें नोटिस दिया गया है। उनका पक्ष सुनने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। जवाब आने के पश्चात शासन स्तर पर विचार करके आगे कार्रवाई की जाएगी।
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कोट
एसआईटी की जांच पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ रही है। लेकिन इसमें आगे क्या-क्या होगा, यह बताया जाना संभव नहीं है। सरकार का इरादा एकदम साफ है कि दोषी चाहे बड़ा हो छोटा, सरकार किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करेगी और उचित कार्रवाई अमल में लाएगी।- मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता
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राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-74 के मुआवजा घोटाले की एसआईटी जांच के घेरे में आए दो आईएएस अफसर पंकज और चंद्रेश की जरा-सी भी लिप्तता पाई तो उनपर कार्रवाई तय मानी जा रही है। ऐसा करके सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस का संदेश देना चाहती है। इस घोटाले में अभी तक जिन अफसरों पर गाज गिरी है, विपक्ष उन्हें छोटी मछली बताकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाता रहा है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह का कहना है कि दोनों अफसरों को एक हफ्ते में जवाब देना है। जवाब पर विचार के बाद शासन विधि सम्मत कार्रवाई करेगा। उधर, शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने फिर दोहराया कि घोटाले में जो भी दोषी होगा, चाहे बड़ा हो या छोटा उसे नहीं बख्शा नहीं जाएगा।
सूत्रों से मुताबिक एनएच घोटाले के मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का भी रुख एकदम साफ है। दो आईएएस अफसरों के मामले में वह कोई नरमी दिखाने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि शासन स्तर पर दोनों अफसरों के मामले में यदि परिस्थितिजन्य साक्ष्य उनके खिलाफ आए तो उन पर कार्रवाई होने से कोई नहीं रोक पाएगा। एनएच घोटाले के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए आठ में से सात पीसीएस अफसर निलंबित हैं। इनमें से एक सेवानिवृत्त है। अब दो आईएएस अफसर भी जांच के लपेटे में आ गए तो सरकार पर यह सवाल उठने शुरू हो गया कि इनके मामले में तेजी से एक्शन क्यों नहीं हो रहा। यह सवाल जब मुख्य सचिव से उठा तो उन्होंने कार्रवाई के मामले में भेदभाव से साफ इंकार किया। उन्होंने कहा कि जो तथ्य सामने आते हैं, उसके तहत ही गुण-दोष पर निर्णय लिया जाता है।
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नोटिस गोपनीय है, नाम नहीं बता सकते
एसआईटी जांच में जिन दो आईएएस अफसरों के खिलाफ साक्ष्य मिले हैं, क्या वे तत्कालीन आर्बिट्रेटर रहे डॉ. पंकज पांडेय और चंद्रेश यादव हैं? इस प्रश्न के जवाब में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा, ‘चूंकि दोनों को गोपनीय नोटिस जारी किया गया है, इसलिए मेरे स्तर से उनके नाम लेना उचित नहीं है।’ अलबत्ता उन्होंने यह जरूर माना कि पिछले एक साल से अधिक समय से एसआईटी जांच में दो अफसरों के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिली है। उन्हें नोटिस दिया गया है। उनका पक्ष सुनने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। जवाब आने के पश्चात शासन स्तर पर विचार करके आगे कार्रवाई की जाएगी।
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एसआईटी की जांच पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ रही है। लेकिन इसमें आगे क्या-क्या होगा, यह बताया जाना संभव नहीं है। सरकार का इरादा एकदम साफ है कि दोषी चाहे बड़ा हो छोटा, सरकार किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करेगी और उचित कार्रवाई अमल में लाएगी।- मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता