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त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे भगवान श्रीचंद्र : भगत राम
Updated Tue, 18 Sep 2018 01:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
उदासीनाचार्य जगद्गुरु भगवान श्रीचंद्र का 524वां जन्मोत्सव कनखल के श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन में धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान अखाड़ा परिसर में धर्म ध्वजा भी स्थापित की गई।
श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण के मुखिया महंत भगत राम महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद्र त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। जिन्होंने संसार में ज्ञान की प्रेरणा देकर समरसता का वातावरण बनाया। इन्होंने देश में एकता व अखंडता बनाए रखने के लिए युवावस्था में ही अपने घर-परिवार का त्याग कर दिया था। समस्त संत समाज को उनके बताए मार्ग पर चलकर देश को उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करना होगा। कार्यक्रम के दौरान शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, निवर्तमान मेयर मनोज गर्ग व मुखिया महंत भगत राम महाराज ने भगवान श्रीचंद्र के भजनों की सीडी का विमोचन भी किया। शहरी विकास मंत्री ने कहा कि सभी को श्रीचंद्र भगवान के उपदेशों से प्रेरणा लेकर देश के उत्थान में अपना योगदान देना चाहिए। महंत धूनी दास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद्र साक्षात भगवान शिव के अवतार थे, जिन्होंने संसार को मोह माया का परित्याग कर सादगी पूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी। महंत प्रेमदास व महंत निरंजनदास महाराज ने कहा कि संतों के दर्शन मात्र से पुण्य की प्राप्ति व पापों की निवृति होती है। शांतरशाह गद्दी के महंत रविन्द्र दास महाराज ने कहा कि जो अपने गुरुजनों के बताए मार्ग पर चलते हैं, उनके अधूरे कार्य पूर्ण होते हैं। मुखिया महंत जगजीत सिंह महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद्र ने अपने जप तप से संपूर्ण विश्व का कल्याण किया। इस अवसर पर महंत महेश मुनि, महंत त्रिवेणी दास, महंत सरजीत मुनि, महंत सूरज मुनि, महंत बसंत मुनि, महंत तीरथ दास, महंत चंद्रमा दास, महंत जयेंद्रमुनि, महंत दामोदर दास, म.म.स्वामी शिवानंद, महंत दामोदर शरण दास, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, स्वामी आलोक गिरी, महंत विनोद महाराज, महंत जगजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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उदासीनाचार्य जगद्गुरु भगवान श्रीचंद्र का 524वां जन्मोत्सव कनखल के श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन में धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान अखाड़ा परिसर में धर्म ध्वजा भी स्थापित की गई।
श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण के मुखिया महंत भगत राम महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद्र त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। जिन्होंने संसार में ज्ञान की प्रेरणा देकर समरसता का वातावरण बनाया। इन्होंने देश में एकता व अखंडता बनाए रखने के लिए युवावस्था में ही अपने घर-परिवार का त्याग कर दिया था। समस्त संत समाज को उनके बताए मार्ग पर चलकर देश को उन्नति के मार्ग पर अग्रसर करना होगा। कार्यक्रम के दौरान शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, निवर्तमान मेयर मनोज गर्ग व मुखिया महंत भगत राम महाराज ने भगवान श्रीचंद्र के भजनों की सीडी का विमोचन भी किया। शहरी विकास मंत्री ने कहा कि सभी को श्रीचंद्र भगवान के उपदेशों से प्रेरणा लेकर देश के उत्थान में अपना योगदान देना चाहिए। महंत धूनी दास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद्र साक्षात भगवान शिव के अवतार थे, जिन्होंने संसार को मोह माया का परित्याग कर सादगी पूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी। महंत प्रेमदास व महंत निरंजनदास महाराज ने कहा कि संतों के दर्शन मात्र से पुण्य की प्राप्ति व पापों की निवृति होती है। शांतरशाह गद्दी के महंत रविन्द्र दास महाराज ने कहा कि जो अपने गुरुजनों के बताए मार्ग पर चलते हैं, उनके अधूरे कार्य पूर्ण होते हैं। मुखिया महंत जगजीत सिंह महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद्र ने अपने जप तप से संपूर्ण विश्व का कल्याण किया। इस अवसर पर महंत महेश मुनि, महंत त्रिवेणी दास, महंत सरजीत मुनि, महंत सूरज मुनि, महंत बसंत मुनि, महंत तीरथ दास, महंत चंद्रमा दास, महंत जयेंद्रमुनि, महंत दामोदर दास, म.म.स्वामी शिवानंद, महंत दामोदर शरण दास, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, स्वामी आलोक गिरी, महंत विनोद महाराज, महंत जगजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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