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सानंद के अनशन की उपेक्षा : शिवानंद
Updated Tue, 18 Sep 2018 01:00 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, हरिद्वार
मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने केंद्र और राज्य सरकारों पर गंगा के लिए किए जा रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के अनशन की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनहीनता कभी नहीं देखी। उन्होंने कहा कि तप के 100वें दिन 29 सितंबर को पूरे देश में गंगा प्रेमी सानंद के समर्थन में एक दिन का उपवास रखेंगे। उन्होंने हरिद्वार के संत समाज की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
सोमवार को मातृ सदन आश्रम में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि जब गंगा के लिए निगमानंद ब्रह्मचारी का बलिदान हुआ था तक मातृृ सदन में नेताओं और संतों का जमावड़ा लगा था। उस समय कहा गया था कि हर कोई गंगा की रक्षा के लिए मातृ सदन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेेंगे, लेकिन आज एक भी संत गंगा के लिए अनशन कर रहे संत के समर्थन में नहीं आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गंगा के नाम पर सत्ता में आई मोदी सरकार भी संत के अनशन के बारे में गंभीर नहीं है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में स्थिति गांधी शांति प्रतिष्ठान में रविवार से सानंद के तप को लेकर तीन दिवसीय विचार गोष्ठी चल रही है। जिसमें गोवा, दिल्ली, रांची, भोपाल, रायपुर, देहरादून, अहमदाबाद, गोवाहाटी समेत देशभर के पर्यावरणविद् भाग ले रहे हैं। गोष्ठी में प्रस्ताव पारित कर मानवाधिकार की तरह गंगा के भी अधिकार की मांग की गई। उन्होंने कहा कि सानंद के आंदोलन के 100वें दिन 29 सितंबर को एक दिवसीय उपवास देशभर में किया जाएगा। वहीं उन्होंने कहा कि जैसे हाईकोर्ट के आदेश पर हरिद्वार और देहरादून में अतिक्रमण हटाया जा रहा है, वैसे ही गंगा के लिए भी हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट की ओर से आदेश दिया गया है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दस फैसले भी लागू कराया जाए।
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मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने केंद्र और राज्य सरकारों पर गंगा के लिए किए जा रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के अनशन की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनहीनता कभी नहीं देखी। उन्होंने कहा कि तप के 100वें दिन 29 सितंबर को पूरे देश में गंगा प्रेमी सानंद के समर्थन में एक दिन का उपवास रखेंगे। उन्होंने हरिद्वार के संत समाज की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
सोमवार को मातृ सदन आश्रम में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि जब गंगा के लिए निगमानंद ब्रह्मचारी का बलिदान हुआ था तक मातृृ सदन में नेताओं और संतों का जमावड़ा लगा था। उस समय कहा गया था कि हर कोई गंगा की रक्षा के लिए मातृ सदन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेेंगे, लेकिन आज एक भी संत गंगा के लिए अनशन कर रहे संत के समर्थन में नहीं आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गंगा के नाम पर सत्ता में आई मोदी सरकार भी संत के अनशन के बारे में गंभीर नहीं है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में स्थिति गांधी शांति प्रतिष्ठान में रविवार से सानंद के तप को लेकर तीन दिवसीय विचार गोष्ठी चल रही है। जिसमें गोवा, दिल्ली, रांची, भोपाल, रायपुर, देहरादून, अहमदाबाद, गोवाहाटी समेत देशभर के पर्यावरणविद् भाग ले रहे हैं। गोष्ठी में प्रस्ताव पारित कर मानवाधिकार की तरह गंगा के भी अधिकार की मांग की गई। उन्होंने कहा कि सानंद के आंदोलन के 100वें दिन 29 सितंबर को एक दिवसीय उपवास देशभर में किया जाएगा। वहीं उन्होंने कहा कि जैसे हाईकोर्ट के आदेश पर हरिद्वार और देहरादून में अतिक्रमण हटाया जा रहा है, वैसे ही गंगा के लिए भी हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट की ओर से आदेश दिया गया है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दस फैसले भी लागू कराया जाए।
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