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पैतृक कृषि भूमि पर मकान बनाने को नहीं बदलना होगा लैंडयूज
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। पैतृक कृषि भूमि पर मकान बनाने के लिए लैंडयूज बदलने की जरूरत नहीं है। 75 वर्ग मीटर तक की खेती की भूमि पर मकान बनाने के लिए किसी भूस्वामी को एमडीडीए के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। साडा क्षेत्र का एमडीडीए में विलय होने के बाद भी सरकार ने ये व्यवस्था बरकरार रखी है। इस व्यवस्था से साडा क्षेत्र में शामिल 121 गांवों के हजारों ग्रामीणों को लाभ मिलेगा।
साडा के मास्टर प्लान-2031 के तहत कृषि लैंड यूज वाली जमीन पर भी मकान बनाने की यह सुविधा दी गई थी। 75 वर्ग मीटर तक के निर्माण में लैंड यूज बदलवाने की जरूरत नहीं थी। बीते दिनों कैबिनेट में साडा को एमडीडीए में मर्ज कर दिया गया है। इससे लोगों को लगा था कि अब यह व्यवस्था बदल दी जाएगी। लेकिन, एमडीडीए क्षेत्र में भी यही व्यवस्था लागू रहेगी। इसके चलते काफी संख्या में लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन अगर जमीन का क्षेत्रफल 75 वर्ग मीटर से अधिक है तो निर्माण के लिए लैंड यूज चेंज करवाना अनिवार्य है।
इसे कहते हैं पैतृक भूमि
पैतृक संपत्ति का वजूद हिंदू परंपरागत विधि में है। 17 जून 1956 से हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम प्रभावी होने के बाद से नई पैतृक संपत्ति अस्तित्व में आना असंभव है। इसके कारण जो भी संपत्ति इस तिथि से पूर्व किसी पुरुष को अपने पिता, दादा या परदादा से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई है वही पैतृक संपत्ति कहलाएगी। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति ने अपनी पैतृक भूमि को बेच दिया है और कुछ वर्षों बाद उसे वह फिर से खरीदता है तो वह पैतृक भूमि की श्रेणी में नहीं आएगी।
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साडा के मास्टर प्लान-2031 के तहत 75 वर्गमीटर तक के भवन निर्माण में लैंड यूज बदलवाने की जरूरत नहीं है। यही व्यवस्था एमडीडीए में भी रहेगी। इससे ऐसे परिवारों को भी फायदा होगा जहां बंटवारा की स्थिति पैदा होती है।
-गिरीश चंद्र गुणवंत, सचिव एमडीडीए
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देहरादून। पैतृक कृषि भूमि पर मकान बनाने के लिए लैंडयूज बदलने की जरूरत नहीं है। 75 वर्ग मीटर तक की खेती की भूमि पर मकान बनाने के लिए किसी भूस्वामी को एमडीडीए के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। साडा क्षेत्र का एमडीडीए में विलय होने के बाद भी सरकार ने ये व्यवस्था बरकरार रखी है। इस व्यवस्था से साडा क्षेत्र में शामिल 121 गांवों के हजारों ग्रामीणों को लाभ मिलेगा।
साडा के मास्टर प्लान-2031 के तहत कृषि लैंड यूज वाली जमीन पर भी मकान बनाने की यह सुविधा दी गई थी। 75 वर्ग मीटर तक के निर्माण में लैंड यूज बदलवाने की जरूरत नहीं थी। बीते दिनों कैबिनेट में साडा को एमडीडीए में मर्ज कर दिया गया है। इससे लोगों को लगा था कि अब यह व्यवस्था बदल दी जाएगी। लेकिन, एमडीडीए क्षेत्र में भी यही व्यवस्था लागू रहेगी। इसके चलते काफी संख्या में लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन अगर जमीन का क्षेत्रफल 75 वर्ग मीटर से अधिक है तो निर्माण के लिए लैंड यूज चेंज करवाना अनिवार्य है।
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इसे कहते हैं पैतृक भूमि
पैतृक संपत्ति का वजूद हिंदू परंपरागत विधि में है। 17 जून 1956 से हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम प्रभावी होने के बाद से नई पैतृक संपत्ति अस्तित्व में आना असंभव है। इसके कारण जो भी संपत्ति इस तिथि से पूर्व किसी पुरुष को अपने पिता, दादा या परदादा से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई है वही पैतृक संपत्ति कहलाएगी। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति ने अपनी पैतृक भूमि को बेच दिया है और कुछ वर्षों बाद उसे वह फिर से खरीदता है तो वह पैतृक भूमि की श्रेणी में नहीं आएगी।
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साडा के मास्टर प्लान-2031 के तहत 75 वर्गमीटर तक के भवन निर्माण में लैंड यूज बदलवाने की जरूरत नहीं है। यही व्यवस्था एमडीडीए में भी रहेगी। इससे ऐसे परिवारों को भी फायदा होगा जहां बंटवारा की स्थिति पैदा होती है।
-गिरीश चंद्र गुणवंत, सचिव एमडीडीए