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तीन साल से सिंचाई नहरें सूखीं
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
साहिया। कालसी ब्लॉक अंतर्गत सिंचाई के लिए बनाई गईं लगभग 135 नहरों और गूलों की तीन साल से मरम्मत नहीं होने से खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। सिंचाई के अभाव में किसानों की फसल प्रभावित हो रही है, जिससे वे मायूस हैं।
काश्तकारों का आरोप है कि लघु सिंचाई विभाग से कई बार नहरों और गूलों की मरम्मत की गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन हर बार बजट की कमी का हवाला देकर विभाग मरम्मत करने में असमर्थता जता रहा है। जौनसार बावर परगना कृषि प्रधान क्षेत्र हैं। यहां परंपरागत खेती के साथ ही नकदी फसलों और फलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। लोग खेती बाड़ी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता से परगने में अब उपज कम होने लगी है। यहां सिंचाई सुविधा के लिए बनाई गई नहरें और गूलें पिछले तीन सालों से सूखी पड़ीं हुई हैं।
काश्तकार गोपाल सिंह, गजेंद्र सिंह, तुलसी सिंह, राजेंद्र सिंह, सूर्यपाल चौहान, सतपाल, केशर सिंह, नरेश, दिनेश आदि ने बताया कि वर्ष 2015 के बाद से ही नहरों और गूलों की मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे अधिकांश नहरें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सिंचाई सुविधा नहीं मिलने से फसलों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिसके चलते किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। बताया कि किसान खेती के लिए बारिश पर निर्भर हैं।
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उधर, लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रविंद्र कुमार ने बताया कि बजट के अभाव में नहरों की मरम्मत नहीं की जा रही है। बजट मुहैया होते ही प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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ये नहरें और गूलें हैं क्षतिग्रस्त
डुमडा छानी, झड़वाला छानी, भंगोगी, गढ़ावगी, चरगाड़, साहिया छानी, जोगियों खेड़ा, हईया, पंजिया छानी, सुईनाड, सिलाई छानी, किमोटा, बडनू छानी, पिशोगी छानी, कोटी कॉलोनी, डावड़ा खेड़ा, तुनियाया, सराड़ी, मोखाड़ खड्ड, जामुआ सहित कुल 135 नहरें और गूलें क्षतिग्रस्त हैं।
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साहिया। कालसी ब्लॉक अंतर्गत सिंचाई के लिए बनाई गईं लगभग 135 नहरों और गूलों की तीन साल से मरम्मत नहीं होने से खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। सिंचाई के अभाव में किसानों की फसल प्रभावित हो रही है, जिससे वे मायूस हैं।
काश्तकारों का आरोप है कि लघु सिंचाई विभाग से कई बार नहरों और गूलों की मरम्मत की गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन हर बार बजट की कमी का हवाला देकर विभाग मरम्मत करने में असमर्थता जता रहा है। जौनसार बावर परगना कृषि प्रधान क्षेत्र हैं। यहां परंपरागत खेती के साथ ही नकदी फसलों और फलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। लोग खेती बाड़ी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता से परगने में अब उपज कम होने लगी है। यहां सिंचाई सुविधा के लिए बनाई गई नहरें और गूलें पिछले तीन सालों से सूखी पड़ीं हुई हैं।
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काश्तकार गोपाल सिंह, गजेंद्र सिंह, तुलसी सिंह, राजेंद्र सिंह, सूर्यपाल चौहान, सतपाल, केशर सिंह, नरेश, दिनेश आदि ने बताया कि वर्ष 2015 के बाद से ही नहरों और गूलों की मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे अधिकांश नहरें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सिंचाई सुविधा नहीं मिलने से फसलों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिसके चलते किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। बताया कि किसान खेती के लिए बारिश पर निर्भर हैं।
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उधर, लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रविंद्र कुमार ने बताया कि बजट के अभाव में नहरों की मरम्मत नहीं की जा रही है। बजट मुहैया होते ही प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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ये नहरें और गूलें हैं क्षतिग्रस्त
डुमडा छानी, झड़वाला छानी, भंगोगी, गढ़ावगी, चरगाड़, साहिया छानी, जोगियों खेड़ा, हईया, पंजिया छानी, सुईनाड, सिलाई छानी, किमोटा, बडनू छानी, पिशोगी छानी, कोटी कॉलोनी, डावड़ा खेड़ा, तुनियाया, सराड़ी, मोखाड़ खड्ड, जामुआ सहित कुल 135 नहरें और गूलें क्षतिग्रस्त हैं।