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देखरेख के अभाव में वीरान पड़ा है अश्वमेध यज्ञ स्थल
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
पुुरातत्व विभाग और सरकार की उपेक्षा के कारण पछवादून स्थित पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण तीसरी सदी का अश्वमेध यज्ञ स्थल वीरान पड़ा हुआ है। जगत ग्राम स्थित इस स्थल तक जाने वाले पगडंडीनुमा मार्ग की हालत भी जर्जर है। पुरातत्व विभाग इस स्थल को संजोने के चाहे जितने भी दावे करे, लेकिन वास्तविकता का अहसास इस स्थल पर पहुंचने से हो जाता है। स्थल पर पेयजल और शौचालय की भी कोई सुविधा नहीं है।
विकासनगर से छह किमी दूर कालसी के समीप बाड़वाला नामक स्थान पर एक सघन आम के बाग के बीच अदृश्य और उपेक्षित किंतु अत्यधिक महत्व का एतिहासिक स्थल जगत ग्राम है। यह एतिहासिक स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा सन 1952 से 1954 के बीच किए गए उत्खनन से प्रकाश में आया। इस उत्खनन में पक्की ईंटों से निर्मित तीसरी शताब्दी की उड़ते हुए बगीचे के आकार वाली तीन यज्ञ वेदिकाओं का अनावरण हुआ, जो आसपास के धरातल से तीन चार फीट नीचे दबी पड़ी थीं। इन यज्ञ वेदिकाओं को भारतीय पुरातत्व विभाग ने अखिल भारतीय संदर्भ में दुर्लभतम माना है। तीन वेदिकाओं में से एक वेदिका की ईंटों पर ब्राह्मी लिपी में उत्कीर्ण सूचना के आधार पर जो तथ्य प्रकाश में आए, उनके अनुसार ईसा की पहली से पांचवीं सदी के बीच वर्तमान सरसावा, हरिपुर, विकासनगर और संभवतया लाखामंडल तक युग शैल नामक एक साम्राज्य था। जिसकी राजधानी हरिपुर थी। यह साम्राज्य बृषगण गौत्रीय वर्मन वंश द्वारा शासित था। इस साम्राज्य का उत्कर्ष काल तीसरी शदाब्दी में शील वर्मन नामक परम शक्तिशाली राजा हुए, उन्होंने जगतग्राम पर चार अश्वमेध यज्ञ कर अपने उत्कर्ष का प्रदर्शन किया। इन्हीं अश्वमेध यज्ञों में से तीन यज्ञों की वेदिकाएं हैं और चौथा स्थल अभी खोजना बाकी है।
पुरातात्विक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण यह स्थल भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग से संरक्षित तो है, इसकी चारदीवारी भी कराई गई है। लेकिन, देखभाल के लिए विभाग द्वारा मात्र दो संविदाकर्मी तैनात किए गए हैं। जबकि, स्थल तक जाने के लिए मार्ग भी नहीं बनाया गया है। निजी संपत्ति वाले आम के बाग से गुजर कर यहां पहुंचना पड़ता है। आम के सीजन में बाग के गेट पर बाग स्वामी ताला लगा देते हैं, जिससे पर्यटक और शोधार्थी यहां नहीं पहुंच पाते।
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पुरातत्व विभाग के संरक्षक सहायक मुद्स्सर अली के अनुसार बाग स्वामी के साथ मार्ग के लिए जमीन देने पर सहमति बन गई है। बाग स्वामी मार्ग की जमीन दान देने के लिए तैयार है। अभी कार्रवाई जारी है।
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पुुरातत्व विभाग और सरकार की उपेक्षा के कारण पछवादून स्थित पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण तीसरी सदी का अश्वमेध यज्ञ स्थल वीरान पड़ा हुआ है। जगत ग्राम स्थित इस स्थल तक जाने वाले पगडंडीनुमा मार्ग की हालत भी जर्जर है। पुरातत्व विभाग इस स्थल को संजोने के चाहे जितने भी दावे करे, लेकिन वास्तविकता का अहसास इस स्थल पर पहुंचने से हो जाता है। स्थल पर पेयजल और शौचालय की भी कोई सुविधा नहीं है।
विकासनगर से छह किमी दूर कालसी के समीप बाड़वाला नामक स्थान पर एक सघन आम के बाग के बीच अदृश्य और उपेक्षित किंतु अत्यधिक महत्व का एतिहासिक स्थल जगत ग्राम है। यह एतिहासिक स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा सन 1952 से 1954 के बीच किए गए उत्खनन से प्रकाश में आया। इस उत्खनन में पक्की ईंटों से निर्मित तीसरी शताब्दी की उड़ते हुए बगीचे के आकार वाली तीन यज्ञ वेदिकाओं का अनावरण हुआ, जो आसपास के धरातल से तीन चार फीट नीचे दबी पड़ी थीं। इन यज्ञ वेदिकाओं को भारतीय पुरातत्व विभाग ने अखिल भारतीय संदर्भ में दुर्लभतम माना है। तीन वेदिकाओं में से एक वेदिका की ईंटों पर ब्राह्मी लिपी में उत्कीर्ण सूचना के आधार पर जो तथ्य प्रकाश में आए, उनके अनुसार ईसा की पहली से पांचवीं सदी के बीच वर्तमान सरसावा, हरिपुर, विकासनगर और संभवतया लाखामंडल तक युग शैल नामक एक साम्राज्य था। जिसकी राजधानी हरिपुर थी। यह साम्राज्य बृषगण गौत्रीय वर्मन वंश द्वारा शासित था। इस साम्राज्य का उत्कर्ष काल तीसरी शदाब्दी में शील वर्मन नामक परम शक्तिशाली राजा हुए, उन्होंने जगतग्राम पर चार अश्वमेध यज्ञ कर अपने उत्कर्ष का प्रदर्शन किया। इन्हीं अश्वमेध यज्ञों में से तीन यज्ञों की वेदिकाएं हैं और चौथा स्थल अभी खोजना बाकी है।
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पुरातात्विक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण यह स्थल भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग से संरक्षित तो है, इसकी चारदीवारी भी कराई गई है। लेकिन, देखभाल के लिए विभाग द्वारा मात्र दो संविदाकर्मी तैनात किए गए हैं। जबकि, स्थल तक जाने के लिए मार्ग भी नहीं बनाया गया है। निजी संपत्ति वाले आम के बाग से गुजर कर यहां पहुंचना पड़ता है। आम के सीजन में बाग के गेट पर बाग स्वामी ताला लगा देते हैं, जिससे पर्यटक और शोधार्थी यहां नहीं पहुंच पाते।
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पुरातत्व विभाग के संरक्षक सहायक मुद्स्सर अली के अनुसार बाग स्वामी के साथ मार्ग के लिए जमीन देने पर सहमति बन गई है। बाग स्वामी मार्ग की जमीन दान देने के लिए तैयार है। अभी कार्रवाई जारी है।