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वन रक्षक सीख रहे तस्करों से निपटने के गुर
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
गढ़वाल मंडल की 18 डिवीजनों के वन रक्षक रामपुर में वन एवं वन्य जीव अंगों के तस्करों से निपटने के गुर सीख रहे हैं। एक जनवरी से वन आरक्षी प्रशिक्षण केंद्र रामपुर मंडी में वन रक्षकों को वन अधिनियम की बारीकियों, कंप्यूटर एवं जीपीएस सिस्टम सहित अत्याधुनिक तकनीक की भी जानकारी दी जा रही है। साथ ही ट्रेंकुलाइज का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
खास बात यह है कि इन वन रक्षकों को विभाग में वर्षों की सेवा के बाद पहली बार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गढ़वाल मंडल के विभिन्न वन प्रभागों में कई दैनिक श्रमिक प्रमोशन पाकर वन रक्षक बने हैं, तो कुछ मृतक आश्रित हैं। इनमें कुछ छह महीने तो कुछ आठ से दस साल से विभाग में कार्यरत हैं। प्रशिक्षण केंद्र के अनुदेशक राजेंद्र हिंदवाण ने बताया कि छह महीने तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में कंप्यूटर, जीपीएस सिस्टम और ट्रेंकुलाइज का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताकि, वन तस्करों से निपटने के साथ ही घायल वन्य जीवों को भी बचाया जा सके। वन अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कोर्ट में मामले खारिज न हों इसके लिए वन रक्षकों को वन अधिनियम की भी जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण केंद्र के अनुदेशक के मुताबिक गढ़वाल मंडल की 18 डिवीजनों के 45 और एफआरआई के तीन वन रक्षकों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षक मथुरा प्रसाद बिजल्वाण के मुताबिक वन रक्षकों को शस्त्रों के बारे में भी जानकारी दी जा रहा है।
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गढ़वाल मंडल की 18 डिवीजनों के वन रक्षक रामपुर में वन एवं वन्य जीव अंगों के तस्करों से निपटने के गुर सीख रहे हैं। एक जनवरी से वन आरक्षी प्रशिक्षण केंद्र रामपुर मंडी में वन रक्षकों को वन अधिनियम की बारीकियों, कंप्यूटर एवं जीपीएस सिस्टम सहित अत्याधुनिक तकनीक की भी जानकारी दी जा रही है। साथ ही ट्रेंकुलाइज का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
खास बात यह है कि इन वन रक्षकों को विभाग में वर्षों की सेवा के बाद पहली बार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गढ़वाल मंडल के विभिन्न वन प्रभागों में कई दैनिक श्रमिक प्रमोशन पाकर वन रक्षक बने हैं, तो कुछ मृतक आश्रित हैं। इनमें कुछ छह महीने तो कुछ आठ से दस साल से विभाग में कार्यरत हैं। प्रशिक्षण केंद्र के अनुदेशक राजेंद्र हिंदवाण ने बताया कि छह महीने तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में कंप्यूटर, जीपीएस सिस्टम और ट्रेंकुलाइज का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताकि, वन तस्करों से निपटने के साथ ही घायल वन्य जीवों को भी बचाया जा सके। वन अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कोर्ट में मामले खारिज न हों इसके लिए वन रक्षकों को वन अधिनियम की भी जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण केंद्र के अनुदेशक के मुताबिक गढ़वाल मंडल की 18 डिवीजनों के 45 और एफआरआई के तीन वन रक्षकों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षक मथुरा प्रसाद बिजल्वाण के मुताबिक वन रक्षकों को शस्त्रों के बारे में भी जानकारी दी जा रहा है।
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