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दो साल में हो जाएगा एनआईटी के स्थायी कैंपस का निर्माण
Updated Fri, 07 Dec 2018 09:59 PM IST
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श्रीनगर। एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के मुद्दे पर लगातार आलोचना झेल रहे क्षेत्रीय विधायक व राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने एक बार फिर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि एनआईटी कहीं शिफ्ट नहीं हो रही है। 13 या 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री और उनकी मानव संसाधन विकास मंत्री (एचआरडी) प्रकाश जावड़ेकर से इस मसले पर वार्ता होगी।
श्रीनगर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे धन सिंह ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि एनआईटी के स्थायी कैंपस का निर्माण दो साल के अंदर हो जाएगा। जमीन का मामला सुलझा लिया गया है। संस्थान निर्माण के लिए जितनी जमीन की आवश्यकता होगी, उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि एनआईटी कहीं शिफ्ट नहीं हो रही है। पर्वतीय क्षेत्र से इतने बड़े संस्थान को जाने नहीं दिया जाएगा। अस्थायी कैंपस में तात्कालिक दिक्कत छात्रों की है। बीटेक प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष के जो छात्र यहां पढ़ना नहीं चाहते, उनको मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि उनको उनके प्रदेश में स्थित एनआईटी में शिफ्ट किया जाएगा। बाकी छात्र यहीं पढ़ाई करेंगे। मंत्री ने कहा कि हालांकि मंत्रालय से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। साथ ही यह भी अनुरोध किया गया है कि अगले शिक्षण सत्र के दौरान छात्रों से पहले ही शपथ पत्र भरवा लिया जाए, ताकि इस तरह की स्थिति दोबारा न हो।
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श्रीनगर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे धन सिंह ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि एनआईटी के स्थायी कैंपस का निर्माण दो साल के अंदर हो जाएगा। जमीन का मामला सुलझा लिया गया है। संस्थान निर्माण के लिए जितनी जमीन की आवश्यकता होगी, उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि एनआईटी कहीं शिफ्ट नहीं हो रही है। पर्वतीय क्षेत्र से इतने बड़े संस्थान को जाने नहीं दिया जाएगा। अस्थायी कैंपस में तात्कालिक दिक्कत छात्रों की है। बीटेक प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष के जो छात्र यहां पढ़ना नहीं चाहते, उनको मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि उनको उनके प्रदेश में स्थित एनआईटी में शिफ्ट किया जाएगा। बाकी छात्र यहीं पढ़ाई करेंगे। मंत्री ने कहा कि हालांकि मंत्रालय से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। साथ ही यह भी अनुरोध किया गया है कि अगले शिक्षण सत्र के दौरान छात्रों से पहले ही शपथ पत्र भरवा लिया जाए, ताकि इस तरह की स्थिति दोबारा न हो।
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