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ध्यान से प्रबल होती है आंतरिक ऊर्जा : चिदानंद
Updated Mon, 26 Nov 2018 01:59 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
परमार्थ निकेतन में गंगा तट पर आयोजित चार दिवसीय ध्यान साधना शिविर रविवार को संपन्न हो गया। शिविर में हजारों प्रतिभागियों ने गंगा स्नान, गंगा आरती, सत्संग और दिव्य तीर्थ का आनंद लिया।
इस मौके पर स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि ध्यान के अभ्यास से जीवन में आंतरिक ऊर्जा, करुणा, प्रेम, धैर्य, उदारता और क्षमा की भावना का विकास होता है। इसके अलावा तनाव और उच्च रक्तचाप जैसी अनेक बीमारियों से रक्षा होती है। ध्यान शांति का माध्यम और ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है, ध्यान हमें ब्रह्मंड से जोड़ता है। इससे पहले सुधांशु महाराज ने साधकों को ध्यान की विभिन्न विधाओं का अभ्यास कराया और गीता, उपनिषद, भारतीय दर्शन की जानकारियां प्रदान कीं। साध्वी भगवती सरस्वती ने भारतीय संस्कार, संस्कृति, उपदेश और अध्यात्म के चमत्कारिक पहलुओं की चर्चा की।
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परमार्थ निकेतन में गंगा तट पर आयोजित चार दिवसीय ध्यान साधना शिविर रविवार को संपन्न हो गया। शिविर में हजारों प्रतिभागियों ने गंगा स्नान, गंगा आरती, सत्संग और दिव्य तीर्थ का आनंद लिया।
इस मौके पर स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि ध्यान के अभ्यास से जीवन में आंतरिक ऊर्जा, करुणा, प्रेम, धैर्य, उदारता और क्षमा की भावना का विकास होता है। इसके अलावा तनाव और उच्च रक्तचाप जैसी अनेक बीमारियों से रक्षा होती है। ध्यान शांति का माध्यम और ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है, ध्यान हमें ब्रह्मंड से जोड़ता है। इससे पहले सुधांशु महाराज ने साधकों को ध्यान की विभिन्न विधाओं का अभ्यास कराया और गीता, उपनिषद, भारतीय दर्शन की जानकारियां प्रदान कीं। साध्वी भगवती सरस्वती ने भारतीय संस्कार, संस्कृति, उपदेश और अध्यात्म के चमत्कारिक पहलुओं की चर्चा की।
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