{"_id":"5bf6e0fbbdec2241871fec9e","slug":"154290615412-karnpryag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नियमों के फेर में फंसी ब्लॉक की पांच पेयजल योजनाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नियमों के फेर में फंसी ब्लॉक की पांच पेयजल योजनाएं
Updated Thu, 22 Nov 2018 10:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
देवाल। ब्लाक मुख्यालय सहित कई गांवों में इन दिनों पेयजल संकट बना हुआ है। किसी गांव में पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं है तो किसी गांव का पेयजल स्रोत ही सूख गया है। ग्रामीण इस ठंड में भी 2 से 3 किलोमीटर दूर प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं।
देवाल बाजार की पुरानी पेयजल योजना से 5 हजार की आबादी को पानी की आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में अधिकांश लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। यही स्थिति दूरस्थ गांव घेस की है। प्रेम सिंह ने बताया कि घेस गांव में पेयजल स्रोत सूखने से कई तोको में बसे लोगों को 2 से 3 किलोमीटर दूर से पीने का पानी ढोना पड़ रहा है। पिछले साल सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से घेस गांव के सभी तोकों में नई पेयजल योजना बनाने की मांग की थी, लेकिन धन के अभाव में प्रस्तावित पेयजल योजना अभी तक नहीं बन पाई है। बमोटिया-बेराधार पेयजल योजना की फाइल भी धन के अभाव में लटकी है। बेराधार के चंद्र सिंह, रघुवीर सिंह आदि ने बताया कि बमोटिया में पेयजल स्रोत में पानी कम होने से लोगों को एक बाल्टी पानी के लिए डेढ़ से दो घंटे इंतजार करना पड़ता है। पेयजल योजनाओं का विभागीय स्तर पर तकनीकी परीक्षण के बाद भी शासन से वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। क्षेत्र पंचायत प्रमुख उर्मिला बिष्ट ने बताया कि विगत वर्ष पेयजल निगम की ओर से चार पेयजल योजनाओं का इस्टीमेट बनाकर केंद्र को भेजा था लेकिन केंद्र ने आपत्ति लगाकर इसे लौटा दिया। पेयजल निर्माण निगम के ईई मदन पुरी ने बताया कि केंद्र सरकार की पेयजल योजनाओं के निर्माण के लिए नई गाइड लाइन आई है। इसके तहत प्रस्तावित पेयजल योजनाओं में लगी आपत्तियों को दूर कर पुन: केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
इन योजनाओं का होना है निर्माण
देवाल बाजार = 1.50 करोड़
बेराधार = 214 लाख
तेजुलगाड़ घेस की पेयजल योजना = 28.60 लाख
दानकोट = 48.32 लाख
देवाल बाजार की पुरानी पेयजल योजना से 5 हजार की आबादी को पानी की आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में अधिकांश लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। यही स्थिति दूरस्थ गांव घेस की है। प्रेम सिंह ने बताया कि घेस गांव में पेयजल स्रोत सूखने से कई तोको में बसे लोगों को 2 से 3 किलोमीटर दूर से पीने का पानी ढोना पड़ रहा है। पिछले साल सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से घेस गांव के सभी तोकों में नई पेयजल योजना बनाने की मांग की थी, लेकिन धन के अभाव में प्रस्तावित पेयजल योजना अभी तक नहीं बन पाई है। बमोटिया-बेराधार पेयजल योजना की फाइल भी धन के अभाव में लटकी है। बेराधार के चंद्र सिंह, रघुवीर सिंह आदि ने बताया कि बमोटिया में पेयजल स्रोत में पानी कम होने से लोगों को एक बाल्टी पानी के लिए डेढ़ से दो घंटे इंतजार करना पड़ता है। पेयजल योजनाओं का विभागीय स्तर पर तकनीकी परीक्षण के बाद भी शासन से वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। क्षेत्र पंचायत प्रमुख उर्मिला बिष्ट ने बताया कि विगत वर्ष पेयजल निगम की ओर से चार पेयजल योजनाओं का इस्टीमेट बनाकर केंद्र को भेजा था लेकिन केंद्र ने आपत्ति लगाकर इसे लौटा दिया। पेयजल निर्माण निगम के ईई मदन पुरी ने बताया कि केंद्र सरकार की पेयजल योजनाओं के निर्माण के लिए नई गाइड लाइन आई है। इसके तहत प्रस्तावित पेयजल योजनाओं में लगी आपत्तियों को दूर कर पुन: केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
विज्ञापन
इन योजनाओं का होना है निर्माण
देवाल बाजार = 1.50 करोड़
बेराधार = 214 लाख
तेजुलगाड़ घेस की पेयजल योजना = 28.60 लाख
दानकोट = 48.32 लाख