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एनआईटी शिफ्टिंग के विरोध में फूटा गुस्सा
Updated Tue, 13 Nov 2018 10:31 PM IST
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श्रीनगर। एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के अस्थायी कैंपस के ऋषिकेश में शिफ्टिंग की तैयारी के विरोध में विभिन्न संगठनों ने एनआईटी प्रशासन, केंद्र व राज्य सरकारों के पुतले फूंके। संगठनों ने इसके लिए मुख्यमंत्री और क्षेत्रीय विधायक को जिम्मेदार मानते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
एनआईटी उत्तराखंड में विगत तीन अक्तूबर से छात्र कैंपस शिफ्टिंग की मांग के लिए कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। एनआईटी प्रशासन ने आंदोलन को देखते हुए विकल्प के तौर पर ऋषिकेश में एक शिक्षण संस्थान को चिह्नित किया है। मीडिया में यह खबर प्रकाशित होने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा। मंगलवार अपराह्न एक बजे प्रगतिशील जनमंच के बैनर तले स्थानीय लोग एनआईटी गेट पर पहुंचे, जहां उन्होंने एनआईटी प्रशासन और केंद्र व राज्य सरकार के विरोध में प्रदर्शन करते हुए पुतला फूंका। इस मौके पर कहा गया कि स्थायी कैंपस के निर्माण के लिए जनता लगातार आंदोलन कर रही है। इसके विपरीत कैंपस को मैदानी क्षेत्र में शिफ्टिंग की बात की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों में मंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी, कांग्रेस के मुख्य प्रचार समन्वयक धीरेंद्र प्रताप, सुरजीत बिष्ट, सदानंद पुरी, उम्मेद सिंह मेहरा, संजय फौजी और जेपी रतूड़ी आदि शामिल थे। अपराह्न करीब दो बजे कांग्रेस नगर कमेटी ने भी मानव संसाधन विकास मंत्री का पुतला फूंका। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि डबल इंजन की सरकार एनआईटी शिफ्ट करने की साजिश कर रही है। यदि ऐसे ही पहाड़ में संस्थान बंद किए जाएंगे, तो पलायन कहां से रुकेगा। पहाड़ में विकास अवरुद्ध हो जाएगा। पुतला फूंकने वालों में भूपेंद्र पुंडीर, प्रांतीय प्रवक्ता प्रदीप तिवाड़ी, जिला महामंत्री गणपति भट्ट, वीरेंद्र नेगी, राजेश जुगरान, मुकेश अग्रवाल और कमल रावत आदि शामिल थे। उधर, प्रगतिशील जनमंच ने एनआईटी शिफ्टिंग के विरोध में 16 नवंबर को मशाल जुलूस निकालने और तीन दिसंबर को महापंचायत का एलान किया है। मंच ने कहा कि राजनीतिक जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र में नहीं घुसने दिया जाएगा। कांग्रेस एनआईटी गेट के समक्ष धरना देगी।
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एनआईटी प्रशासन ने शिफ्टिंग की खबर बेबुनियाद बताया
श्रीनगर। एनआईटी की कक्षाएं ऋषिकेश में संचालित किए जाने की बात को एनआईटी प्रशासन ने बेबुनियाद बताया है। एनआईटी अधिकारियों का कहना है कि अस्थायी परिसर स्थानांतरित करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और न ही एमएचआडी से इस संबंध को उन्हें कोई निर्देश प्राप्त हुए हैं। कक्षाएं श्रीनगर में ही संचालित होंगी।
संस्थान के कुलसचिव कर्नल सुखपाल (सेवानिवृत्त) ने बताया कि परिसर स्थानांतरण उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। परिसर स्थानांतरण का अधिकार एमएचआरडी के स्तर का है। संस्थान ने छात्रों के आंदोलन को देखते हुए विकल्पों पर चर्चा की जाती रही है, लेकिन निर्णय एमएचआरडी ही ले सकता है। ब्यूरो
मजबूती से पैरवी करे राज्य सरकार
निवर्तमान पालिकाध्यक्ष बिपिन मैठानी ने कहा कि एनआईटी के छात्र सुप्रीम कोर्ट में गए हैं। यदि राज्य सरकार ने यहां अपना मजबूत पक्ष नहीं रखा, तो एनआईटी हमारे हाथ से निकल जाएगी। राज्य सरकार को मामले में मजबूती से पैरवी करनी चाहिए।
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एनआईटी उत्तराखंड में विगत तीन अक्तूबर से छात्र कैंपस शिफ्टिंग की मांग के लिए कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। एनआईटी प्रशासन ने आंदोलन को देखते हुए विकल्प के तौर पर ऋषिकेश में एक शिक्षण संस्थान को चिह्नित किया है। मीडिया में यह खबर प्रकाशित होने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा। मंगलवार अपराह्न एक बजे प्रगतिशील जनमंच के बैनर तले स्थानीय लोग एनआईटी गेट पर पहुंचे, जहां उन्होंने एनआईटी प्रशासन और केंद्र व राज्य सरकार के विरोध में प्रदर्शन करते हुए पुतला फूंका। इस मौके पर कहा गया कि स्थायी कैंपस के निर्माण के लिए जनता लगातार आंदोलन कर रही है। इसके विपरीत कैंपस को मैदानी क्षेत्र में शिफ्टिंग की बात की जा रही है।
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प्रदर्शनकारियों में मंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी, कांग्रेस के मुख्य प्रचार समन्वयक धीरेंद्र प्रताप, सुरजीत बिष्ट, सदानंद पुरी, उम्मेद सिंह मेहरा, संजय फौजी और जेपी रतूड़ी आदि शामिल थे। अपराह्न करीब दो बजे कांग्रेस नगर कमेटी ने भी मानव संसाधन विकास मंत्री का पुतला फूंका। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि डबल इंजन की सरकार एनआईटी शिफ्ट करने की साजिश कर रही है। यदि ऐसे ही पहाड़ में संस्थान बंद किए जाएंगे, तो पलायन कहां से रुकेगा। पहाड़ में विकास अवरुद्ध हो जाएगा। पुतला फूंकने वालों में भूपेंद्र पुंडीर, प्रांतीय प्रवक्ता प्रदीप तिवाड़ी, जिला महामंत्री गणपति भट्ट, वीरेंद्र नेगी, राजेश जुगरान, मुकेश अग्रवाल और कमल रावत आदि शामिल थे। उधर, प्रगतिशील जनमंच ने एनआईटी शिफ्टिंग के विरोध में 16 नवंबर को मशाल जुलूस निकालने और तीन दिसंबर को महापंचायत का एलान किया है। मंच ने कहा कि राजनीतिक जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र में नहीं घुसने दिया जाएगा। कांग्रेस एनआईटी गेट के समक्ष धरना देगी।
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एनआईटी प्रशासन ने शिफ्टिंग की खबर बेबुनियाद बताया
श्रीनगर। एनआईटी की कक्षाएं ऋषिकेश में संचालित किए जाने की बात को एनआईटी प्रशासन ने बेबुनियाद बताया है। एनआईटी अधिकारियों का कहना है कि अस्थायी परिसर स्थानांतरित करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और न ही एमएचआडी से इस संबंध को उन्हें कोई निर्देश प्राप्त हुए हैं। कक्षाएं श्रीनगर में ही संचालित होंगी।
संस्थान के कुलसचिव कर्नल सुखपाल (सेवानिवृत्त) ने बताया कि परिसर स्थानांतरण उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। परिसर स्थानांतरण का अधिकार एमएचआरडी के स्तर का है। संस्थान ने छात्रों के आंदोलन को देखते हुए विकल्पों पर चर्चा की जाती रही है, लेकिन निर्णय एमएचआरडी ही ले सकता है। ब्यूरो
मजबूती से पैरवी करे राज्य सरकार
निवर्तमान पालिकाध्यक्ष बिपिन मैठानी ने कहा कि एनआईटी के छात्र सुप्रीम कोर्ट में गए हैं। यदि राज्य सरकार ने यहां अपना मजबूत पक्ष नहीं रखा, तो एनआईटी हमारे हाथ से निकल जाएगी। राज्य सरकार को मामले में मजबूती से पैरवी करनी चाहिए।