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समारोह में 11 कुंडीय महायज्ञ का शुभारंभ
Updated Sat, 27 Oct 2018 10:33 PM IST
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कर्णप्रयाग। वीसी दरवान सिंह नेगी शताब्दी समारोह के दूसरे दिन राजकीय इंटर कॉलेज में गायत्री परिवार शांति कुंज हरिद्वार की ओर से प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए जवानों की आत्मा की शांति लिए 11 कुंडीय महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी दीं।
शनिवार को ब्रह्मबेला में विद्यालय परिसर में गायत्री परिवार की ओर से प्रथम विश्व युद्ध के शहीद सेनानियों और विद्यालय के दिवंगत संस्थापकों की आत्मा की शांति के लिए 11 कुंडीय यज्ञ शुरू किया गया। इसमें लगभग 400 यजमानों ने गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और सूर्य मंत्रों से आहुतियां अर्पित कीं। इसके बाद गढ़वाल राइफल्स के बैंड की मधुर धुनों के साथ स्कूली छात्रों ने नगर में भव्य शोभा यात्रा निकाली। दोपहर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ जीआईसी और जीजीआईसी के छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीतों से किया। वहीं हरीश भारती और दीपक भारती के ढोल वादन की प्रस्तुति बेहद सराहनीय रही। लिटिल फ्लावर चिल्ड्रन एकेडमी पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने झुणुक-झुणुक ऋतु बंसत एगी.., हिमालयन पब्लिक स्कूल के बच्चों ने हाथ मां धरयूं च तेरा रेशमी रुमाला.., गुडलक चिल्ड्रन एकेडमी के बच्चों ने चैता की चैत्वाली.., उमा पब्लिक स्कूल के बच्चों ने ‘मैया हम तेरा नाम की ज्योति जलोला... आदि की शानदार प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे जीआईसी कर्णप्रयाग के प्रधानाचार्य रह चुके पूर्व शिक्षा निदेशक चंद्र सिंह ग्वाल ने कहा कि अमर शहीद वीसी स्व. दरवान सिंह नेगी के समर्पण भाव से जीआईसी कर्णप्रयाग का नाम चौतरफा चमक रहा है। उन्होंने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से पठन-पाठन के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। प्रवक्ता रविदर्शन तोपाल के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व उप शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह झिंक्वाण, शताब्दी समारोह समिति के अध्यक्ष हरीश पुजारी, सचिव भुवन नौटियाल, डायट रुद्रप्रयाग के प्राचार्य डीएस आर्य, पूर्व डीआईओएस मोहन प्रसाद डिमरी, बीईओ कर्णप्रयाग उमेश चंद्र कैलखुरा, केएल रड़वाल, चक्रधर डिमरी, सुभाष गैरोला, अरविंद चौहान, रविंद्र पुजारी, जेपी पुरोहित व महानंद मैठाणी आदि मौजूद रहे।
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शताब्दी गौरव सम्मान से नवाजा
शताब्दी समारोह महोत्सव में आयोजकों ने पूर्व शिक्षा निदेशक चंद्र सिंह ग्वाल, पूर्व उप शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह झिंक्वाण, पूर्व डीआईओएस मोहन प्रसाद डिमरी को शताब्दी गौरव सम्मान और विद्यालय में पूर्व और वर्तमान में कार्यरत 63 शिक्षणेत्तर कर्मियों को विशिष्ट सेवा सम्मान से सम्मानित किया।
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शनिवार को ब्रह्मबेला में विद्यालय परिसर में गायत्री परिवार की ओर से प्रथम विश्व युद्ध के शहीद सेनानियों और विद्यालय के दिवंगत संस्थापकों की आत्मा की शांति के लिए 11 कुंडीय यज्ञ शुरू किया गया। इसमें लगभग 400 यजमानों ने गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और सूर्य मंत्रों से आहुतियां अर्पित कीं। इसके बाद गढ़वाल राइफल्स के बैंड की मधुर धुनों के साथ स्कूली छात्रों ने नगर में भव्य शोभा यात्रा निकाली। दोपहर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ जीआईसी और जीजीआईसी के छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीतों से किया। वहीं हरीश भारती और दीपक भारती के ढोल वादन की प्रस्तुति बेहद सराहनीय रही। लिटिल फ्लावर चिल्ड्रन एकेडमी पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने झुणुक-झुणुक ऋतु बंसत एगी.., हिमालयन पब्लिक स्कूल के बच्चों ने हाथ मां धरयूं च तेरा रेशमी रुमाला.., गुडलक चिल्ड्रन एकेडमी के बच्चों ने चैता की चैत्वाली.., उमा पब्लिक स्कूल के बच्चों ने ‘मैया हम तेरा नाम की ज्योति जलोला... आदि की शानदार प्रस्तुति दी।
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कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे जीआईसी कर्णप्रयाग के प्रधानाचार्य रह चुके पूर्व शिक्षा निदेशक चंद्र सिंह ग्वाल ने कहा कि अमर शहीद वीसी स्व. दरवान सिंह नेगी के समर्पण भाव से जीआईसी कर्णप्रयाग का नाम चौतरफा चमक रहा है। उन्होंने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से पठन-पाठन के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। प्रवक्ता रविदर्शन तोपाल के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व उप शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह झिंक्वाण, शताब्दी समारोह समिति के अध्यक्ष हरीश पुजारी, सचिव भुवन नौटियाल, डायट रुद्रप्रयाग के प्राचार्य डीएस आर्य, पूर्व डीआईओएस मोहन प्रसाद डिमरी, बीईओ कर्णप्रयाग उमेश चंद्र कैलखुरा, केएल रड़वाल, चक्रधर डिमरी, सुभाष गैरोला, अरविंद चौहान, रविंद्र पुजारी, जेपी पुरोहित व महानंद मैठाणी आदि मौजूद रहे।
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शताब्दी गौरव सम्मान से नवाजा
शताब्दी समारोह महोत्सव में आयोजकों ने पूर्व शिक्षा निदेशक चंद्र सिंह ग्वाल, पूर्व उप शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह झिंक्वाण, पूर्व डीआईओएस मोहन प्रसाद डिमरी को शताब्दी गौरव सम्मान और विद्यालय में पूर्व और वर्तमान में कार्यरत 63 शिक्षणेत्तर कर्मियों को विशिष्ट सेवा सम्मान से सम्मानित किया।