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विज्ञान के साथ पर्यावरण का ध्यान रख कर हो विकास: भट्ट
Updated Sat, 27 Oct 2018 10:32 PM IST
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कर्णप्रयाग। कालेश्वर में आयोजित दो दिवसीय हिमालयन कान्क्लेव के दूसरे दिन पर्यावरण संतुलन, आपदा प्रबंधन एवं पर्यटन संभावनाओं पर चर्चा की गई। इसमें विषय विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। पदमश्री चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि पर्यावरण का ध्यान रख कर विकास होना चाहिए।
शनिवार को आयोजित कार्यक्रम के पहले सत्र के मुख्य अतिथि पर्यावरणविद् पदमश्री चंडी प्रसाद भट्ट ने पहाड़ी क्षेत्र के उपेक्षित किसानों, काश्तकारों को सीधे कंपनियों के साथ जोड़ने के लिए जनपद में हिमालयन कान्क्लेव का आयोजन पर जिला प्रशासन की सराहना की। उन्होेंने कहा कि आने वाले समय में निश्चित रूप से इस आयोजन का फायदा यहां के किसानों को मिलेगा। पर्यावरण संतुलन एवं प्राकृतिक आपदाओं के विषयों पर स्लाइड शो के माध्यम से भट्ट ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं का निर्माण किया जाना चाहिए। पर्यावरणविद् पदमश्री चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि विकास के लिए सड़कों का निर्माण आवश्यक है, लेकिन सड़कों का निर्माण मानकों के अनुसार ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहाड़ों पर सड़क कटिंग मलबे का उचित निस्तारण न किए जाने, पानी निकासी की सही व्यवस्था न होने के कारण कई प्राकृतिक आपदाएं जन्म ले रही हैं। कार्यक्रम में आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के प्रभारी निदेशक डा. पियूष रौतेला ने आपदा प्रबंधन के पारंपरिक तरीकों पर जोर देते हुए कहा कि पुराने शैली के मकान प्राकृतिक आपदाओं के न्यूनीकरण में किफायती साबित हुए हैं। वाडिया इंस्टीट्यूट देहरादून के वैज्ञानिक डा. डीपी डोभाल ने कहा कि शीतकाल में लगातार तापमान बढ़ने तथा बर्फबारी कम होने के कारण आज हिमालयी क्षेत्रों से ग्लेशियर लगातार घट रहे हैं। उन्होंने कहा कि केदारानाथ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोकने के लिए प्रदेश में 1266 झीलों को चिन्हित किया गया है। इस दौरान हिमालयन कान्क्लेव में पर्यावरण संतुलन एवं आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए आयोजित सामूहिक चर्चा के दौरान पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट, एडीएम एमएस बर्निया, संयुक्त मजिस्ट्रेट रोहित मीणा, आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट राजकुमार, एसीएमओ डा. मयंक बडोला ने भी अपने अनुभवों को साझा करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
जिले के पर्यटक स्थलों के बारे में बताया
कर्णप्रयाग। हिमालयन कान्क्लेव के दूसरे सत्र के दौरान हिमालयन पर्यटन में सतत विकास की संभावनाओं पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में जिला पर्यटन विकास अधिकारी बीजेंद्र पांडे ने जिले में स्थित विभिन्न धार्मिक एवं पर्यटक स्थलों की जानकारी दी। मुख्य अतिथि विशेष सचिव पर्यावरण एवं ऊर्जा तेलंगाना अजय मिश्रा और विशिष्ट अतिथि प्रमुख सचिव तेलंगाना शालनी मिश्रा ने कहा कि आज उत्तराखंड में जगह-जगह ग्रे एरिया और भूस्खलन अधिक नजर आ रहा है। इस दौरान जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया, सीडीओ हंसा दत्त पांडे, एसडीएम कर्णप्रयाग जीआर बिनवाल सहित आईआरएस से जुड़े सभी नोडल अधिकारी आदि उपस्थित थे। हिमालयन कान्क्लेव का संचालन इलेट्स ऑर्गेनाइजेशन के शोबित गोस्वामी ने किया।
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आपदा की वेबसाइट की लांच
कर्णप्रयाग। कालेश्वर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आपदा से बचाव और विभिन्न जानकारियों के लिए चमोली जिले की डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट वेबसाइट (https//www.ddmachamoli.in) लांच की गई। अधिकारियों ने बताया कि वेबसाइट में चमोली में आपदा से प्रभाव, आपदा की सूचना, आपदा से बचाव सहित कई जानकारियां दी जाएंगी।
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शनिवार को आयोजित कार्यक्रम के पहले सत्र के मुख्य अतिथि पर्यावरणविद् पदमश्री चंडी प्रसाद भट्ट ने पहाड़ी क्षेत्र के उपेक्षित किसानों, काश्तकारों को सीधे कंपनियों के साथ जोड़ने के लिए जनपद में हिमालयन कान्क्लेव का आयोजन पर जिला प्रशासन की सराहना की। उन्होेंने कहा कि आने वाले समय में निश्चित रूप से इस आयोजन का फायदा यहां के किसानों को मिलेगा। पर्यावरण संतुलन एवं प्राकृतिक आपदाओं के विषयों पर स्लाइड शो के माध्यम से भट्ट ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं का निर्माण किया जाना चाहिए। पर्यावरणविद् पदमश्री चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि विकास के लिए सड़कों का निर्माण आवश्यक है, लेकिन सड़कों का निर्माण मानकों के अनुसार ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहाड़ों पर सड़क कटिंग मलबे का उचित निस्तारण न किए जाने, पानी निकासी की सही व्यवस्था न होने के कारण कई प्राकृतिक आपदाएं जन्म ले रही हैं। कार्यक्रम में आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के प्रभारी निदेशक डा. पियूष रौतेला ने आपदा प्रबंधन के पारंपरिक तरीकों पर जोर देते हुए कहा कि पुराने शैली के मकान प्राकृतिक आपदाओं के न्यूनीकरण में किफायती साबित हुए हैं। वाडिया इंस्टीट्यूट देहरादून के वैज्ञानिक डा. डीपी डोभाल ने कहा कि शीतकाल में लगातार तापमान बढ़ने तथा बर्फबारी कम होने के कारण आज हिमालयी क्षेत्रों से ग्लेशियर लगातार घट रहे हैं। उन्होंने कहा कि केदारानाथ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोकने के लिए प्रदेश में 1266 झीलों को चिन्हित किया गया है। इस दौरान हिमालयन कान्क्लेव में पर्यावरण संतुलन एवं आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए आयोजित सामूहिक चर्चा के दौरान पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट, एडीएम एमएस बर्निया, संयुक्त मजिस्ट्रेट रोहित मीणा, आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट राजकुमार, एसीएमओ डा. मयंक बडोला ने भी अपने अनुभवों को साझा करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
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जिले के पर्यटक स्थलों के बारे में बताया
कर्णप्रयाग। हिमालयन कान्क्लेव के दूसरे सत्र के दौरान हिमालयन पर्यटन में सतत विकास की संभावनाओं पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में जिला पर्यटन विकास अधिकारी बीजेंद्र पांडे ने जिले में स्थित विभिन्न धार्मिक एवं पर्यटक स्थलों की जानकारी दी। मुख्य अतिथि विशेष सचिव पर्यावरण एवं ऊर्जा तेलंगाना अजय मिश्रा और विशिष्ट अतिथि प्रमुख सचिव तेलंगाना शालनी मिश्रा ने कहा कि आज उत्तराखंड में जगह-जगह ग्रे एरिया और भूस्खलन अधिक नजर आ रहा है। इस दौरान जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया, सीडीओ हंसा दत्त पांडे, एसडीएम कर्णप्रयाग जीआर बिनवाल सहित आईआरएस से जुड़े सभी नोडल अधिकारी आदि उपस्थित थे। हिमालयन कान्क्लेव का संचालन इलेट्स ऑर्गेनाइजेशन के शोबित गोस्वामी ने किया।
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आपदा की वेबसाइट की लांच
कर्णप्रयाग। कालेश्वर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आपदा से बचाव और विभिन्न जानकारियों के लिए चमोली जिले की डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट वेबसाइट (https//www.ddmachamoli.in) लांच की गई। अधिकारियों ने बताया कि वेबसाइट में चमोली में आपदा से प्रभाव, आपदा की सूचना, आपदा से बचाव सहित कई जानकारियां दी जाएंगी।