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एनआईटी आंदोलन को भड़काने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
Updated Sat, 27 Oct 2018 10:20 PM IST
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श्रीनगर। प्रगतिशील जनमंच (प्रजम) और प्रजामंडल पार्टी ने एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड को पहाड़ से मैदान ले जाने की कोशिश का विरोध किया है। संगठनों ने पहाड़ विरोधी तत्वों को चिहिृृत कर कार्रवाई की करने की मांग की है।
प्रजम के अध्यक्ष अनिल स्वामी ने इस संबंध में कोतवाली में शिकायती पत्र दिया है। उनका कहना है कि कुछ लोग लगातार एनआईटी को पहाड़ से मैदान ले जाने की साजिश रच रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। जबकि प्रजामंडल ने बैठक आयोजित करते हुए एनआईटी में चल रहे आंदोलन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एनआईटी में आंदोलन सुनियोजित साजिश के तहत चल रहा है। इस आंदोलन के पीछे संस्थान का प्रशासन है। एनआईटी के अधिकारी तराई क्षेत्र में स्थायी कैंपस चाहते हैं। इसलिए छात्रों की आड़ में सुविधाजनक स्थान में शिफ्टिंग की मांग की जा रही है।
वक्ताओं ने कहा कि एनआईटी के कतिपय प्रशासनिक अधिकारी पहाड़ में उपलब्ध भूमि को नजरअंदाज कर मैदानी भूमि की ओर इशारा करते हैं। ऐसी स्थिति में वह स्वयं खुलकर न बोलने के बजाय छात्रों को स्थायी परिसर के नाम पर भड़का रहे हैं। ताकि केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर परिसर को ऋषिकेश जैसी जगह में शिफ्ट कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की परेशानी महज एक बहाना है। छात्रों को एक परिसर से दूसरे परिसर में जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई है। जो परिसर के अंदर से छात्रों को ले जाते हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं की आशंका करना बहाना मात्र है। बैठक में पार्टी के संयोजक समीर रतूड़ी, प्रवक्ता देव सिंह नेगी, अध्यक्ष विमला देवी, उपाध्यक्ष भूपति राणा, महासचिव पूनम कैंतुरा, चंद्र कोठियाल और नंदा देवी आदि मौजूद थे।
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प्रजम के अध्यक्ष अनिल स्वामी ने इस संबंध में कोतवाली में शिकायती पत्र दिया है। उनका कहना है कि कुछ लोग लगातार एनआईटी को पहाड़ से मैदान ले जाने की साजिश रच रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। जबकि प्रजामंडल ने बैठक आयोजित करते हुए एनआईटी में चल रहे आंदोलन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एनआईटी में आंदोलन सुनियोजित साजिश के तहत चल रहा है। इस आंदोलन के पीछे संस्थान का प्रशासन है। एनआईटी के अधिकारी तराई क्षेत्र में स्थायी कैंपस चाहते हैं। इसलिए छात्रों की आड़ में सुविधाजनक स्थान में शिफ्टिंग की मांग की जा रही है।
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वक्ताओं ने कहा कि एनआईटी के कतिपय प्रशासनिक अधिकारी पहाड़ में उपलब्ध भूमि को नजरअंदाज कर मैदानी भूमि की ओर इशारा करते हैं। ऐसी स्थिति में वह स्वयं खुलकर न बोलने के बजाय छात्रों को स्थायी परिसर के नाम पर भड़का रहे हैं। ताकि केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर परिसर को ऋषिकेश जैसी जगह में शिफ्ट कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की परेशानी महज एक बहाना है। छात्रों को एक परिसर से दूसरे परिसर में जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई है। जो परिसर के अंदर से छात्रों को ले जाते हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं की आशंका करना बहाना मात्र है। बैठक में पार्टी के संयोजक समीर रतूड़ी, प्रवक्ता देव सिंह नेगी, अध्यक्ष विमला देवी, उपाध्यक्ष भूपति राणा, महासचिव पूनम कैंतुरा, चंद्र कोठियाल और नंदा देवी आदि मौजूद थे।
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