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एनआईटी के छात्र-छात्राओं ने किया कक्षाओं का बहिष्कार
Updated Thu, 04 Oct 2018 10:28 PM IST
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श्रीनगर। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कार की टक्कर से दो छात्राओं के घायल होने के बाद एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी परिषद) उत्तराखंड के छात्र-छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। छात्रों ने कहा कि एनआईटी का अपना कैंपस नहीं होने के कारण छात्रों को लैब के लिए हाईवे पार कर जाना पड़ रहा। उन्होंने स्थायी कैंपस की मांग पूरी नहीं होने तक कक्षाओं के बहिष्कार का एलान किया।
एनआईटी उत्तराखंड में लगभग 930 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। बृहस्पतिवार सुबह लगभग संस्थान के छात्र-छात्राएं कक्षाओं में जाने के बजाय प्रांगण में एकत्रित हो गए। इस मौके पर आयोजित सभा में उन्होंने कहा कि बीते दिवस संस्थान की दो छात्राएं कक्षा से लैब की ओर स्कूटी में जा रही थी। इसी दौरान हाईवे पर एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी। एक छात्रा की गंभीर स्थिति बनी हुई है। उन्होंने रोष जताया कि यह एनआईटी में छात्रों को परिसर मेें आने-जाने के लिए हाईवे से गुजरना पड़ता है। यदि स्थायी कैंपस बन जाता, तो यह स्थिति नहीं आती। कहा कि संस्थान की स्थापना हुए 10 साल होने को हैं, लेकिन अभी तक स्थायी कैंपस का निर्माण नहीं हो पाया है। इसकी वजह से उन्हें अव्यवस्थाएं झेलनी पड़ती हैं। छात्रों ने स्थायी कैंपस का निर्माण होने तक अस्थायी तौर पर अन्य एनआईटी में शिफ्ट करने की मांग की। इधर, एनआईटी प्रशासन का कहना है कि छात्रों से कक्षाओं में लौटने का अनुरोध किया गया है। संस्थान के स्तर पर स्थायी कैंपस का मामला लंबित नहीं है।
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--- स्थायी कैंपस का मामला सभी के संज्ञान में है। पूर्व में जो भी छात्रों की ओर से मांगे की गई हैं, वो पूरी की गई हैं। यदि हमेें भूमि मिलती है, तो भवन निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। छात्रों के आंदोलन के संबंध में अपर सचिव और निदेशक को अवगत करा दिया गया है। बच्चे हाईवे से न जाए, इसके लिए पीछे की ओर से रास्ते का निर्माण किया जा रहा है। कर्नल सुखपाल सिंह, रजिस्ट्रार एनआईटी उत्तराखंड
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एनआईटी उत्तराखंड में लगभग 930 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। बृहस्पतिवार सुबह लगभग संस्थान के छात्र-छात्राएं कक्षाओं में जाने के बजाय प्रांगण में एकत्रित हो गए। इस मौके पर आयोजित सभा में उन्होंने कहा कि बीते दिवस संस्थान की दो छात्राएं कक्षा से लैब की ओर स्कूटी में जा रही थी। इसी दौरान हाईवे पर एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी। एक छात्रा की गंभीर स्थिति बनी हुई है। उन्होंने रोष जताया कि यह एनआईटी में छात्रों को परिसर मेें आने-जाने के लिए हाईवे से गुजरना पड़ता है। यदि स्थायी कैंपस बन जाता, तो यह स्थिति नहीं आती। कहा कि संस्थान की स्थापना हुए 10 साल होने को हैं, लेकिन अभी तक स्थायी कैंपस का निर्माण नहीं हो पाया है। इसकी वजह से उन्हें अव्यवस्थाएं झेलनी पड़ती हैं। छात्रों ने स्थायी कैंपस का निर्माण होने तक अस्थायी तौर पर अन्य एनआईटी में शिफ्ट करने की मांग की। इधर, एनआईटी प्रशासन का कहना है कि छात्रों से कक्षाओं में लौटने का अनुरोध किया गया है। संस्थान के स्तर पर स्थायी कैंपस का मामला लंबित नहीं है।
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--- स्थायी कैंपस का मामला सभी के संज्ञान में है। पूर्व में जो भी छात्रों की ओर से मांगे की गई हैं, वो पूरी की गई हैं। यदि हमेें भूमि मिलती है, तो भवन निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। छात्रों के आंदोलन के संबंध में अपर सचिव और निदेशक को अवगत करा दिया गया है। बच्चे हाईवे से न जाए, इसके लिए पीछे की ओर से रास्ते का निर्माण किया जा रहा है। कर्नल सुखपाल सिंह, रजिस्ट्रार एनआईटी उत्तराखंड
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