{"_id":"5bb13546867a550139684e63","slug":"153834014715-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूरोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी अहम : डॉ. रवि कांत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूरोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी अहम : डॉ. रवि कांत
Updated Mon, 01 Oct 2018 02:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । एम्स ऋषिकेश के यूरोलॉजी विभाग के सहयोग से आयोजित उत्तराखंड यूरोलॉजिकल एसोसिएशन की दो दिवसीय कार्यशाला रविवार को संपन्न की गई। इस दौरान एम्स निदेशक प्रोफसर डॉ. रविकांत ने बताया कि वर्तमान में यूरोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी काफी अहम है। कारण, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को पर्सनल हाइजीन पर ध्यान नहीं दिया जाता है, जिससे उनमें मूत्र संबंधी रोग होने की संभावना काफी अधिक होती है।
उन्होंने यूरोलॉजी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों और बेहतर इलाज के कई टिप्स भी दिए। कार्यशाला में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से ही आते हैं। देश में हर वर्ग की महिलाओं में मूत्र व जनन इंद्रियों से संबंधित रोग आम बात है, लेकिन कई सामाजिक कारणों से महिलाएं इसके उपचार के बारे में नहीं सोचती।
कार्यशाला में महिलाओं में पाए जाने वाले रोग जैसे पेशाब का बार-बार आना, पेशाब का लीक होना या हंसते-हंसते पेशाब आ जाना, पेशाब में कठिनाई होना और गर्भाश्य का बाहर आ जाना जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उनके उपचार एवं ऑपरेशन में उपलब्ध नई तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी गई। देश से लगभग 200 यूरोलॉजिस्ट कार्यशाला में शामिल हुए। मौके पर डॉ. संजय गोयल, डॉ. अंकुर मित्तल, डीन डॉ. सुरेखा किशोर, डॉ. अजीत सक्सेना, डॉ. समीर त्रिवेदी आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने यूरोलॉजी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों और बेहतर इलाज के कई टिप्स भी दिए। कार्यशाला में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से ही आते हैं। देश में हर वर्ग की महिलाओं में मूत्र व जनन इंद्रियों से संबंधित रोग आम बात है, लेकिन कई सामाजिक कारणों से महिलाएं इसके उपचार के बारे में नहीं सोचती।
विज्ञापन
कार्यशाला में महिलाओं में पाए जाने वाले रोग जैसे पेशाब का बार-बार आना, पेशाब का लीक होना या हंसते-हंसते पेशाब आ जाना, पेशाब में कठिनाई होना और गर्भाश्य का बाहर आ जाना जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उनके उपचार एवं ऑपरेशन में उपलब्ध नई तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी गई। देश से लगभग 200 यूरोलॉजिस्ट कार्यशाला में शामिल हुए। मौके पर डॉ. संजय गोयल, डॉ. अंकुर मित्तल, डीन डॉ. सुरेखा किशोर, डॉ. अजीत सक्सेना, डॉ. समीर त्रिवेदी आदि मौजूद थे।
विज्ञापन